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ब्यावरा रेलवे स्टेशन पर RPF-GRP के पास लॉकअप तक नहीं, कुर्सी से बांधकर रखे जाते हैं आरोपी

Biaora Railway Station : अमृत भारत स्टेशन की चमक के पीछे सुरक्षा का अंधेरा। 20 करोड़ खर्च के बावजूद ब्यावरा में आरपीएफ-जीआरपी के पास लॉकअप तक नहीं है, सीसीटीवी भी बेअसर।
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Biaora Railway Station

इस तरह कुर्सी से बांधकर रखे जाते हैं आरोपी (फोटो सोर्स: Patrika)

लक्ष्मीनारायण यादव की रिपोर्ट

Rajgarh News :मध्य प्रदेश के अंतर्गत आने वाले भोपाल मंडल के राजगढ़ जिले में स्थित ब्यावरा रेलवे स्टेशन को करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक अमृत भारत स्टेशन के रूप में चमकाया जा रहा है। लेकिन, इस बाहरी चकाचौंध के पीछे सुरक्षा व्यवस्था की हालत बेहद खस्ताहाल और चौंकाने वाली है। स्टेशन पर मुस्तैद आरपीएफ और जीआरपी थानों के पास पकड़े गए अपराधियों को रखने के लिए एक लॉकअप तक नहीं है। मजबूरी में जवानों को आरोपियों को कुर्सी से बांधकर पूरी रात पहरा देना पड़ता है। इतना ही नहीं, सुरक्षा की मुख्य कड़ी माने जाने वाले सीसीटीवी कैमरे भी या तो बंद पड़े हैं या फिर दीवारों की तरफ मुंह किए बेकार साबित हो रहे हैं।

10x15 के कमरे में RPF: ऑफिस, रिकॉर्ड और आरोपी एक साथ

आरपीएफ का पूरा थाना महज 10 बाय 15 फीट के एक छोटे से कमरे में सिमटा हुआ है। इसी सीमित जगह में थाना प्रभारी का केबिन है, यहीं स्टाफ बैठता है और सारे दफ्तरी काम निपटाए जाते हैं। जगह के अभाव में यदि कोई आरोपी पकड़ा जाता है, तो उसे दफ्तर के भीतर ही कुर्सी से बांधकर बैठाया जाता है। ताला लगाने की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि पूरा थाना और सरकारी रिकॉर्ड उसी एक कमरे में है। यदि किसी दिन एक साथ तीन-चार आरोपी पकड़ में आ जाएं, तो उन्हें कहां रखा जाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। पूरी रात दो-दो जवानों को जागकर पहरेदारी करनी पड़ती है, जिससे किसी अप्रिय घटना या आरोपी के भागने का जोखिम लगातार बना रहता है।

कालकोठरी जैसी जगह में जीआरपी, यात्रियों की पहुंच से दूर

जीआरपी थाने के हालात तो और भी बदतर हैं। अमृत भारत योजना के तहत नई इमारत बनने के बाद जीआरपी को पुरानी इमारत के तलघर में भेज दिया गया है। दो संकरे और अंधेरे कमरों में चल रहा यह थाना किसी कालकोठरी जैसा नजर आता है। स्थिति यह है कि किसी आम यात्री को मदद के लिए इसे ढूंढना भी मुश्किल काम है। यहां भी लॉकअप न होने से आरोपियों को कुर्सी से बांधने की ही लाचारी है। स्टेशन निर्माण के दौरान जीआरपी को अन्यत्र स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन प्रस्तावित जगह और भी जर्जर निकली। बीते तीन सालों में कई बार नए थाने के लिए जमीन चिह्नित करने की बातें तो हुईं, लेकिन धरातल पर काम आज तक शुरू नहीं हो सका।

तीसरी आंख भी बेबस

सुरक्षा तंत्र की इस नाकामी में बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है। स्टेशन पर निगरानी के लिए लगे अधिकतर कैमरे लंबे समय से ठप पड़े हैं और जो चालू हैं, उनका रुख यात्री प्लेटफॉर्म की बजाय दीवारों की तरफ है। बीना एक्सेस की सुविधा न होने से आपात स्थिति में फुटेज हासिल करना भी कठिन चुनौती है। मामले में डीआरएम द्वारा संबंधित अधिकारियों को फटकार भी लगाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।

नए थाने के लिए जगह देखी है- TI

ब्यावरा आरपीएफ थानाप्रभारी धर्म सिंह का कहना है कि, आरोपी को थाने में ही बैठाते हैं। हां, लॉकअप नहीं है। नए थाने के लिए जगह देखी है। सीसीटीवी ठीक कराने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया है।