10 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पूर्व सीएम कमलनाथ का चैलेंज, ‘हिम्मत है तो 27% OBC आरक्षण बहाल करके दिखाए सरकार’

OBC Reservation : 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने भाजपा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
2 min read
Google source verification
OBC Reservation

OBC आरक्षण पर बोले कमलनाथ (फोटो सोर्स: Kamal Nath Facebook)

MP News :मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण रद्द होने के बाद शनिवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मौजूदा समय की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साध है। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 2019 में दिए गए 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को समाप्त होने से बचाने के लिए भाजपा सरकारों ने प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रखा। कमलनाथ ने मांग की है कि, सरकार तत्काल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करे और विधानसभा में नया कानून लाकर आरक्षण बहाल करे।

कमलनाथ ने कहा कि, 2018 में बनी उनकी सरकार ने साल 2019 में मध्य प्रदेश विधानसभा में कानून पारित कर ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण दिया था। उनके मुताबिक, ये फैसला संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए जनता की भलाई के लिए लिया गया था। उन्होंने आगे ये भी कहा कि, आरक्षण की रक्षा करना सरकार की ही जिम्मेदारी है, लेकिन बाद में सत्ता में आई भाजपा की दो - दो सरकारों ने अदालत के सामने ओबीसी वर्ग का पक्ष मजबूती से रखा ही नहीं।

भ्रामक बयान देने का लगाया आरोप

पूर्व सीएम कमलनाथ ने भाजपा नेताओं के उन बयानों पर आपत्ति जताई, जिनमें कांग्रेस सरकार पर जल्दबाजी में आरक्षण लागू करने का आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि, इस तरह के बयान अदालत के आदेश की गलत व्याख्या करने वाले और भ्रम फैलाने वाले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि, अगर भाजपा सरकार ने पिछले 6 साल में ओबीसी आरक्षण के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास किए तो उसके नेता कांग्रेस के फैसले पर सवाल क्यों उठा रहे हैं? कमलनाथ ने आरोप लगाया कि, भाजपा सरकारों ने ओबीसी वर्ग की जनसंख्या से जुड़े सही आंकड़े न्यायालय के सामने गंभीरता से रखे ही नहीं। आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा की कथनी और करनी में अंतर दिखाई देता है।

सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग

कमलनाथ ने भाजपा सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि, यदि वह वास्तव में ओबीसी वर्ग के हितों के प्रति संवेदनशील है, तो उसे बिना देरी किए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करनी चाहिए। साथ ही, विधानसभा में नया कानून पारित कर 27 फीसदी आरक्षण बहाल करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।