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Bikaner: हाथ में माइक… होठों पर भगवान का नाम और फिर मंत्रोच्चार करते-करते थम गई सांसें

हाथ में माइक था, होठों पर गायत्री मंत्र और सामने यज्ञ का पावन वातावरण। नारायण दास व्यास पूरी तन्मयता से मंत्रोच्चार कर रहे थे। आवाज में श्रद्धा और लय में भक्ति थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही क्षण बाद यही मंत्रोच्चार उनके जीवन का अंतिम उच्चारण बनने वाला है।
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Narayan Das Vyas

मंत्रोच्चार करते नारायण दास व्यास। फोटो: पत्रिका

बीकानेर। हाथ में माइक था, होठों पर गायत्री मंत्र और सामने यज्ञ का पावन वातावरण। नारायण दास व्यास पूरी तन्मयता से मंत्रोच्चार कर रहे थे। आवाज में श्रद्धा और लय में भक्ति थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही क्षण बाद यही मंत्रोच्चार उनके जीवन का अंतिम उच्चारण बनने वाला है। मंत्र बोलते-बोलते अचानक उनका शरीर आगे की ओर झुक गया। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। काशी की धरती पर गायत्री उपासना के बीच उनके निधन का यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के कारण श्रद्धालुओं के बीच चर्चा और भावुकता का विषय बना हुआ है।

सोलापुर निवासी नारायण दास जी व्यास बीकानेर से काशी पहुंचे गायत्री उपासकों के दल के साथ महायज्ञ में शामिल हुए थे। अनुष्ठान के दौरान वे स्वयं मंत्रोच्चार कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी आवाज थम गई और शरीर धीरे-धीरे आगे की ओर झुक गया। एक क्षण पहले वे मंत्रोच्चार कर रहे थे और अगले ही क्षण वहां मौन छा गया। मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया, लेकिन उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

दो मिनट के वीडियो में कैद हुआ मार्मिक दृश्य

5 अक्टूबर 2026 को श्राद्धपक्ष के दौरान हुई इस घटना का करीब दो मिनट का वीडियो अब सामने आया है। इसमें व्यास जी को मंत्रोच्चार करते देखा जा सकता है। कुछ ही क्षण बाद उनका शरीर आगे की ओर झुकता है और फिर दृश्य शांत हो जाता है। वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालु इस घटना को लेकर भावुक हैं। कई लोग इसे ईश्वर के नाम का स्मरण करते हुए जीवन की अंतिम यात्रा पूरी होने के रूप में देख रहे हैं।

काशी में अंतिम क्षण ने बढ़ाई भावनाओं की गहराई

सनातन परंपरा में काशी को आध्यात्मिक और मोक्ष की नगरी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। ऐसे में इसी नगरी में श्राद्धपक्ष के दौरान गायत्री महायज्ञ में मंत्रोच्चार करते हुए किसी व्यक्ति की मृत्यु का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए स्वाभाविक रूप से भावुक करने वाला है। नारायण दास जी व्यास का मंत्रोच्चार करते हुए संसार से विदा होना उनके साथ मौजूद लोगों के लिए अत्यंत भावुक अनुभव बन गया। काशी में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए यह घटना एक अलग तरह की स्मृति छोड़ गई है।