
Patrika Mahila Suraksha: छत्तीसग्रह के बिलासपुर जिले में महिला प्रताड़ना के मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लगातार महत्वपूर्ण निर्णय और दिशा निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने ऐसे मामले जिनमें रेप या रेप के बाद हत्या हो गई, पीड़ितों के लिए राज्य शासन से 36.7 करोड़ रुपए का मुआवजा दिलाया। हाईकोर्ट ने महिलाओं संबंधी अपराधों की जल्द सुनवाई और फैसले देने के लिए जिला न्यायालयों को भी निर्देशित किया है।
ऐसे मामलों को प्राथमिकता से लिस्ट करने के निर्देश चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने जारी किए हैं। कोर्ट को पता चला कि राज्य शासन को कई बार स्मरण पत्र भेजा जा चुका है, मगर बजट स्वीकृति नहीं हो रहा है। इसके बाद राज्य शासन ने लगभग 36 करोड़ रुपए का प्रावधान किया और भुगतान प्रक्रिया शुरू की।
हाईकोर्ट ने पांच वर्षीय बच्ची के यौन उत्पीड़न के दोषी पाए गए व्यक्ति की 20 साल की सजा को बरकरार रखा। 22 नवंबर, 2018 की घटना में फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने पीड़िता के मन और मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव पर प्रकाश डाला और कहा कि ‘बलात्कार केवल शारीरिक हमला नहीं है; यह अक्सर पीड़िता के पूरे व्यक्तित्व को नष्ट कर देता है। एक हत्यारा अपने शिकार के भौतिक शरीर को नष्ट करता है, पर एक बलात्कारी असहाय महिला की आत्मा को अपमानित करता है।’
यौन उत्पीड़न के मामले में कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की है कि पीड़िता की गवाही को केवल पुष्टि के अभाव में खारिज नहीं किया जाना चाहिए। निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के उदाहरणों का हवाला दिया गया, जिसमें यह स्थापित किया गया है कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद पाई जाती है, तो वह अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त हो सकती है।
हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत विशेष अपराधों के मामलों में पागलपन के आधार पर आरोपी को अपराध की जिम्मेदारी से छूट नहीं दी जा सकती। चीफ जस्टिस रमेश सिंह, जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने जोर देकर कहा कि अपवादों को संदेह से परे साबित करने का सिद्धांत बने रहना चाहिए। राजनांदगांव के एक मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो) द्वारा प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।
मानसिक रूप से कमजोर 16 वर्षीय लड़की के यौन उत्पीड़न को हाईकोर्ट ने अत्यधिक गंभीर मानते हुए कहा था कि दोषी बच्चों के यौन उत्पीड़न के किसी भी कृत्य को बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए और ऐसे सभी अपराधों से सख्ती से निपटना चाहिए।
रायगढ़ जिले के एक मामले में 20 साल के कठोर कारावास को उचित ठहराते हुए चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी की थी। एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध मानवता के खिलाफ अपराध अपराध हैं और उनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
अन्य मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला से हुए रेप के मामले में बहुत सोच विचार कर रिपोर्ट लिखाने निर्णय लिया जाता है। ऐसे में विलंब के आधार पर आरोपी को सजा में कोई छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने आरोपी की अपील को खारिज कर निचली अदालत द्वारा दी गई 20 वर्ष की सजा को यथावत रखा। मामला जशपुर जिले की 14 वर्षीय बालिका का है, जिसके गांव के ही 40 वर्षीय व्यक्ति ने डरा-धमका कर कई बार रेप किया और जान से मारने की धमकी दी।
Updated on:
27 Feb 2025 06:45 pm
Published on:
27 Feb 2025 08:46 am
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