
डोरडैश ने भारत में अपना पहला ऑफिस खोला है। (PC: DoorDash)
अमेरिका की फूड डिलीवरी और लोकल कॉमर्स कंपनी DoorDash ने भारत में कदम रख दिया है। कंपनी ने 30 सितंबर को हैदराबाद में अपना पहला भारतीय ऑफिस शुरू किया। शुरुआत में यहां करीब 500 प्रोफेशनल काम करेंगे, लेकिन कंपनी की योजना आने वाले कुछ वर्षों में इस संख्या को बढ़ाकर 3,000 से ज्यादा करने की है।
तेलंगाना के आईटी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने हैदराबाद में कंपनी के नए हब का उद्घाटन किया। इस मौके पर डोरडैश के अधिकारी रवि इनुकोन्डा और जेना कोनके समेत तेलंगाना सरकार के आईटी सलाहकार साई कृष्णा भी मौजूद रहे।
कंपनी का नया ऑफिस सिर्फ भारत में मौजूदगी दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहेगा। हैदराबाद हब से डोरडैश के दुनियाभर के कारोबार को सपोर्ट किया जाएगा। यहां मुख्य रूप से दो टीमों पर काम होगा। इनमें Customer Experience and Integrity यानी CXI और प्रशासन से जुड़ी टीमें शामिल हैं। डोरडैश के लिए यह तीसरा ग्लोबल CXI सर्विस सेंटर है। यहां काम करने वाली टीमें दुनिया के अलग-अलग बाजारों में ग्राहकों, कारोबारियों और डिलीवरी पार्टनर्स को बेहतर सेवा देने में मदद करेंगी।
कंपनी के मुताबिक, इन टीमों का काम ऐसे प्लेटफॉर्म को सपोर्ट करना है, जिनसे हर महीने करीब 5.6 करोड़ यूजर्स जुड़े हैं। ये सेवाएं ऐसे बाजारों में चलती हैं, जिनकी कुल आबादी 1 अरब से ज्यादा है।
डोरडैश की योजना हैदराबाद में अपने कर्मचारियों की संख्या तेजी से बढ़ाने की है। शुरुआत 500 लोगों से हो रही है, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में यहां 3,000 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम तैयार करने का टार्गेट है। डोरडैश की अधिकारी जेना कोनके ने हैदराबाद ऑफिस की शुरुआत को कंपनी के लिए अहम पड़ाव बताया। उनके मुताबिक, भारत में यह हब कंपनी के ग्लोबल ऑपरेशंस नेटवर्क को और मजबूत करेगा। डोरडैश 40 से ज्यादा देशों में काम करती है। ऐसे में कंपनी का हैदराबाद हब शहर के लोकल और डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम में एक और बड़ा नाम जोड़ता है।
अगर आप सोच रहे हैं कि डोरडैश आखिर करती क्या है, तो इसे भारत की जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनी के तौर पर समझ सकते हैं। डोरडैश भी ग्राहकों को स्थानीय रेस्टोरेंट और दूसरे कारोबारियों से ऑनलाइन जोड़ती है। ऑर्डर मिलने के बाद डिलीवरी पार्टनर्स के जरिए सामान ग्राहक तक पहुंचाया जाता है। कंपनी की शुरुआत 2013 में Stanford University के चार छात्रों ने की थी। शुरुआत में इसका फोकस स्थानीय रेस्टोरेंट से खाना पहुंचाने पर था।
कंपनी ने शुरुआती दौर में करीब 24 लाख डॉलर की फंडिंग जुटाई थी। उस समय Mountain View और Palo Alto के करीब 70 रेस्टोरेंट से खाना डिलीवर किया जाता था और एक ऑर्डर के लिए करीब 6 डॉलर चार्ज किया जाता था। कंपनी के को-फाउंडर एंडी फैंग ने शुरुआती दौर में डोरडैश को लॉजिस्टिक्स कंपनी के तौर पर देखा था। कंपनी का लक्ष्य डिलीवरी को ज्यादा तेज बनाना था।
यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है। जोमैटो और स्विगी के उलट डोरडैश का मुख्य कारोबार भारत में नहीं, बल्कि विदेशी बाजारों में रहा है। कंपनी की मौजूदगी उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ओशिनिया के कई बाजारों में है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के अलावा ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी डोरडैश की सेवाएं चलती हैं। यूरोप के कई देशों में कंपनी Wolt और Deliveroo जैसे ब्रांड के जरिए भी कारोबार करती है। अब हैदराबाद ऑफिस के साथ भारत डोरडैश के ग्लोबल ऑपरेशंस नेटवर्क का हिस्सा बन गया है।
हैदराबाद में ऑफिस खोलने के साथ डोरडैश ने भारत में सीधे फूड डिलीवरी कारोबार शुरू करने का ऐलान नहीं किया है। मौजूदा जानकारी के मुताबिक, नया हब मुख्य रूप से ग्लोबल ऑपरेशंस, कस्टमर एक्सपीरियंस और प्रशासनिक कामों को सपोर्ट करेगा। इस लिहाज से कंपनी का पहला कदम भारत में सीधे जोमैटो और स्विगी से मुकाबला करने के बजाय यहां मौजूद टेक और टैलेंट पूल का इस्तेमाल अपने वैश्विक कारोबार के लिए करना है।
Updated on:
30 Sept 2026 05:18 pm
Published on:
30 Sept 2026 05:07 pm
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