
सोने की कीमतें एक दायरे में ट्रेड कर सकती हैं। (PC: AI)
Gold Price Forecast: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। बाजार भी यही उम्मीद लगाए हुए था। यूएस फेड रेट में बढ़ोतरी सोने के लिए अच्छी खबर नहीं होती। क्योंकि इससे निवेशक ट्रेजरी बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स की तरफ जाने लगते हैं और डिमांड घटने से सोने की कीमतें नीचे आती हैं। लेकिन आगे मौद्रिक नीति सख्त होने की आशंकाएं बनी हुई हैं। दिसंबर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करता है, इस पर बाजार की नजर रहेगी। दिसंबर में फेड रेट हाइक की सभावनाएं बढ़ने पर सोने पर आगे दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सोना एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। दूसरी ओर, भारत में त्योहारी खरीदारी बढ़ने से घरेलू बाजार को कुछ सपोर्ट मिल रहा है।
फेड ने बुधवार को ब्याज दरों को 3.75% से 4.00% के दायरे में बनाए रखा है। अब निवेशक अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों और फेड की अगली बैठक के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। इनसे पता चलेगा कि आगे ब्याज दरें बढ़ने की आशंका कितनी मजबूत है। कोटक नियो में करेंसी और कमोडिटी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, फेड के फैसले से सोने की कीमतों को एक दायरे में स्टेबल होने का मौका मिल सकता है। इससे ग्राहकों को खरीदारी के लिए कुछ राहत मिल सकती है।
केडिया एडवाइजरी के एमडी अमित केडिया ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी, चीन और भारत में फिजिकल गोल्ड की मांग, गोल्ड ईटीएफ में निवेश, गोल्ड माइनिंग की बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक अनिश्चितता कीमतों को सपोर्ट दे रही हैं। सितंबर में वैश्विक गोल्ड ETF में करीब 10 अरब डॉलर का निवेश आया, जबकि अगस्त में केंद्रीय बैंकों ने 39 टन सोना खरीदा। ये आंकड़े संस्थागत निवेशकों की लगातार बनी दिलचस्पी को दिखाते हैं।
केडिया ने बताया कि ग्लोबल मार्केट में 4,220 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए अहम है। अगर कीमत इस स्तर से ऊपर टिकती है, तो मौजूदा सीमित दायरे से बाहर निकलने और नई तेजी शुरू होने का संकेत मिल सकता है। ऐसी स्थिति में सोने की कीमतें बढ़कर 4,640 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। यह मौजूदा स्तर के मुकाबले करीब 10% की संभावित बढ़त होगी।
वहीं, गिरावट की स्थिति में 3,975 डॉलर प्रति औंस पहला अहम सपोर्ट स्तर है। इसके नीचे 3,900 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर बाजार में बहुत ज्यादा कमजोरी आती है, तो सोने को 3,820 डॉलर प्रति औंस के आसपास अगला बड़ा सपोर्ट मिल सकता है।
केडिया ने बताया, "कुल मिलाकर, सोने को लेकर आउटलुक फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार के साथ तेजी की ओर झुका हुआ है। सोने ने अब तक ज्यादातर नकारात्मक खबरों का दबाव झेल लिया है और संभव है कि यह अगली बड़ी तेजी की तैयारी कर रहा हो। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, बॉन्ड यील्ड में गिरावट या फेडरल रिजर्व के रुख में बदलाव सोने की कीमतों को आगे बढ़ने का जरूरी संकेत दे सकते हैं। हालांकि, अगली तेजी की पुष्टि के लिए इन फैक्टर्स के साथ तकनीकी स्तरों पर भी नजर रखना जरूरी होगा।"
मेटल्स फोकस के रिसर्च कंसल्टेंट आदर्श दिवे के मुताबिक, इस बार फेड का फैसला बाजार की उम्मीद के अनुरूप था। इसलिए इससे सोने की कीमतों की दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा कि दिसंबर में अमेरिकी फेड के ब्याज दर बढ़ाने की संभावना 78% आंकी जा रही है। यह आशंका सोने की कीमतों पर दबाव बना सकती है। इसकी वजह यह है कि ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशकों को बॉन्ड और ब्याज देने वाले दूसरे निवेश विकल्प ज्यादा आकर्षक लग सकते हैं। सोना बिना ब्याज वाला एसेट है, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में इसकी मांग प्रभावित हो सकती है। इसके उलट, अगर अमेरिका के महंगाई के आंकड़े नरम आते हैं और दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना घटती है, तो सोने को तेजी के लिए सपोर्ट मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
29 Oct 2026, 4:25 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 4:25 PM IST
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