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Investment Strategy: सोना, चांदी या शेयर बाजार, मौजूदा हालातों में नया पैसा कहां लगाएं निवेशक? एक्सपर्ट से समझिए

Gold Vs Equity: सितंबर में सेंसेक्स और निफ्टी की तेज गिरावट के बाद निवेशकों के सामने नया पैसा लगाने को लेकर असमंजस है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शेयरों में वैल्यूएशन आकर्षक हुए हैं, लेकिन निवेश चरणबद्ध तरीके से होना चाहिए।
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भारत

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Pawan Jayaswal

•

Oct 05, 2026

Gold vs Silver vs Stocks

एक ही एसेट में सारा पैसा डालना सही नहीं है। (PC: AI)

Gold Vs Silver Vs Stocks: सितंबर में भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। निफ्टी-50 में 6.1 फीसदी और सेंसेक्स में 5.8 फीसदी की गिरावट आई है। दोनों इंडेक्स लगातार दूसरे महीने नुकसान में रहे। अब निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि इस गिरावट के बाद शेयरों में पैसा लगाया जाए या फिर सोना-चांदी जैसे एसेट्स का रुख किया जाए।

दिलचस्प बात यह है कि सितंबर में सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, कीमती धातुओं पर भी दबाव देखने को मिला। एमसीएक्स पर सोने की कीमत करीब 3 फीसदी और चांदी की कीमत 5.4 फीसदी से ज्यादा टूट गई। ऐसे माहौल में एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सारा पैसा एक ही जगह लगाने की गलती न करें। बाजार में गिरावट के बाद मौके जरूर बने हैं, लेकिन निवेश धीरे-धीरे और सोच-समझकर करना बेहतर रहेगा।

शेयर बाजार में गिरावट, लेकिन क्या यह खरीदारी का मौका है?

सितंबर की गिरावट को बाजार की पूरी तस्वीर बदलने वाली गिरावट मानने के बजाय इसे करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। च्वाइस वेल्थ के हेड (रिसर्च एंड प्रोडक्ट) अक्षत गर्ग के मुताबिक, शेयरों के वैल्यूएशन पहले के मुकाबले काफी आकर्षक हुए हैं। गर्ग के मुताबिक, निफ्टी का ट्रेलिंग P/E करीब 19 है, जबकि पिछले 10 साल का औसत करीब 23 रहा है। इसी तरह प्राइस-टू-बुक वैल्यू करीब 2.75 है, जबकि सामान्य स्तर करीब 3.62 रहा है। इसका मतलब यह है कि अच्छी कंपनियों के शेयरों में अब पहले की तुलना में बेहतर वैल्यूएशन पर एंट्री का मौका बन सकता है। खास तौर पर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों, कंजम्प्शन और चुनिंदा इंडस्ट्रियल स्टॉक्स पर नजर रखी जा सकती है।

एक साथ पूरा पैसा लगाने से बचें

च्वाइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर भी मानते हैं कि बाजार की गिरावट के बाद शेयरों में रिस्क-रिवॉर्ड पहले से बेहतर हुआ है। लेकिन उनका कहना है कि निवेशकों को एक ही बार में पूरी रकम बाजार में लगाने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, पैसा धीरे-धीरे अलग-अलग चरणों में लगाया जा सकता है। इससे अगर बाजार में आगे भी गिरावट आती है, तो निवेशक निचले स्तरों पर खरीदारी का मौका इस्तेमाल कर सकते हैं।

टेक्निकल स्तर पर भी कुछ सेक्टर्स में सपोर्ट नजर आ रहा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स के लिए 27,600 से 28,000 का जोन अहम सपोर्ट माना जा रहा है। ऑटो इंडेक्स में करीब 25,400 के आसपास सपोर्ट है। वहीं, मेटल इंडेक्स को 12,000 से 12,200 के स्तर पर सपोर्ट मिला है, जो इसके 200-day EMA के आसपास है। हालांकि, सिर्फ इसलिए किसी शेयर को नहीं खरीदना चाहिए कि वह काफी गिर चुका है। गिरा हुआ शेयर हमेशा सस्ता नहीं होता। कंपनी के कारोबार, कमाई और भविष्य की संभावनाओं को देखना भी उतना ही जरूरी है।

सोना पोर्टफोलियो के लिए क्यों जरूरी?

सोने की भूमिका शेयर बाजार से थोड़ी अलग है। जहां शेयरों से रिटर्न कंपनी की कमाई और बिजनेस ग्रोथ से जुड़ा होता है, वहीं सोने को महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के खिलाफ सुरक्षा के तौर पर देखा जाता है। सोना मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों में पोर्टफोलियो को सपोर्ट देने का काम करता है।

जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, महंगाई ज्यादा होती है या वित्तीय व्यवस्था को लेकर चिंता पैदा होती है, तो केंद्रीय बैंक और निवेशक सोने की तरफ रुख कर सकते हैं। इसकी एक खासियत यह भी है कि इसमें किसी कंपनी या संस्था से जुड़े डिफॉल्ट का जोखिम नहीं होता।

हालांकि, सोना भी हर परिस्थिति में नहीं बढ़ता। अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं या अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो सोने पर दबाव आ सकता है। इसकी वजह यह है कि सोना ब्याज या डिविडेंड जैसी नियमित आय नहीं देता। फिर भी, डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में सोने की भूमिका बनी रह सकती है।

चांदी में कमाई का मौका, लेकिन उतार-चढ़ाव भी ज्यादा

चांदी को सिर्फ कीमती धातु मानना पूरी तस्वीर नहीं बताता। इसका इस्तेमाल उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है। यही वजह है कि चांदी की परफॉर्मेंस सोने से अलग हो सकती है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में चांदी की मांग बढ़ रही है। अगर दुनियाभर में औद्योगिक गतिविधियां तेज होती हैं, तो चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमतों को फायदा मिल सकता है। लेकिन यहां जोखिम भी ज्यादा है। हितेश टेलर के मुताबिक, स्थिरता के लिहाज से कीमती धातुओं में सोना बेहतर विकल्प हो सकता है, जबकि चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहने की संभावना है।

कहां करें इन्वेस्ट?

बाजार की मौजूदा स्थिति में एक्सपर्ट किसी एक एसेट पर दांव लगाने की सलाह नहीं दे रहे हैं। बेहतर रणनीति पोर्टफोलियो में शेयर, सोना और चांदी के साथ दूसरे सुरक्षित निवेश विकल्पों को जगह देने की हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, नए निवेश का एक बड़ा हिस्सा शेयरों में रखा जा सकता है। सोने को पोर्टफोलियो में स्थायी सुरक्षा के तौर पर शामिल किया जा सकता है। वहीं, ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशक चांदी में छोटी हिस्सेदारी रख सकते हैं। इस रणनीति का मकसद सिर्फ ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं है। बाजार में अचानक गिरावट आए तो सोना पोर्टफोलियो को सपोर्ट दे सकता है, जबकि शेयर बाजार की रिकवरी होने पर इक्विटी से फायदा उठाया जा सकता है।

वहीं, अक्षत गर्ग के मुताबिक, नए निवेश का करीब 65 से 70 फीसदी हिस्सा इक्विटी में लगाया जा सकता है। लेकिन यह रकम भी एक साथ बाजार में डालने के बजाय अलग-अलग चरणों में निवेश करने की सलाह है। इसके बाद करीब 15 फीसदी रकम सोने में रखी जा सकती है। बाकी पैसा अच्छी क्वालिटी वाले फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जा सकता है। गर्ग का मानना है कि सोने और चांदी ने हाल में अच्छा परफॉर्म किया है और पोर्टफोलियो में इनकी एक स्थायी हिस्सेदारी होनी चाहिए। लेकिन बड़ी तेजी के बाद इनमें नया पैसा लगाने से पहले सावधानी जरूरी है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)