
बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज हुई है। (PC: AI)
शेयर बाजार में पिछले हफ्ते लगातार चार कारोबारी सत्रों में आई बड़ी गिरावट के बाद अब इस हफ्ते माहौल तेजी का हो गया है। इस हफ्ते लगातार दूसरे दिन भारतीय बाजार अच्छी-खासी बढ़त लेकर बंद हुआ है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 0.95 फीसदी या 685 अंक की बढ़त के साथ 73,067 पर बंद हुआ है। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 आज 0.98 फीसदी या 220 अंक बढ़कर 22,776 पर बंद हुआ।
बाजार में इस तेजी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। सबसे बड़ा इंतजार आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC के फैसले को लेकर है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजिशन की कवरिंग ने भी बाजार को सपोर्ट दिया है।
आरबीआई की तीन दिन की एमपीसी बैठक सोमवार से शुरू हो चुकी है और इसका फैसला बुधवार को आने वाला है। बाजार में चर्चा है कि केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। बसव कैपिटल के को-फाउंडर संदीप पांडे के मुताबिक, अमेरिका से आए महंगाई और नॉन फार्म पेरोल के आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से अक्टूबर 2026 की बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की आशंका कम हुई है। इसका फायदा भारतीय बाजार को मिल रहा है।
भारत में भी महंगाई को लेकर फिलहाल वैसा दबाव नहीं दिख रहा है जैसा अमेरिका में देखने को मिल रहा है। इसके अलावा दूसरी तिमाही के मजबूत जीडीपी आंकड़ों के बाद आरबीआई पर भी ब्याज दरों को लेकर तुरंत कोई बड़ा कदम उठाने का दबाव कम हुआ है। यही वजह है कि बाजार में आरबीआई एमपीसी से ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद बढ़ी है।
भारतीय शेयर बाजार को दूसरा बड़ा सपोर्ट कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से मिला है। हाल की तेजी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। मिडिल ईस्ट में सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें कुछ कम होने और कुछ देशों की ओर से फिर से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने से कीमतों पर दबाव कम हुआ है। आरबीआई के फैसले से पहले भारतीय बाजार में तेजी को कच्चे तेल की नरमी से भी जोड़कर देखा जा सकता है।
सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम रहता है और सऊदी अरब सहित खाड़ी देशों से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ती है, तो आगे भी क्रूड की कीमतों में कमी देखी जा सकती है।
बाजार में तेजी की एक और बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs की एक्टिविटीज हैं। हालिया गिरावट के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में शॉर्ट पोजिशन बनाई थी। अब बाजार के ओवरसोल्ड जोन में पहुंचने के बाद इन निवेशकों की ओर से शॉर्ट पोजिशन बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसे ही शॉर्ट कवरिंग कहा जाता है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में आई बाजार की तेजी में इसका भी बड़ा योगदान है।
भारतीय बाजार को अमेरिका से भी राहत मिली है। अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड में मंगलवार को 0.50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। वअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमी से दुनियाभर के बाजारों पर ब्याज दरों का दबाव कुछ कम होता है। इसका फायदा उभरते बाजारों को मिल सकता है और भारत भी उनमें शामिल है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
06 Oct 2026 03:41 pm
Published on:
06 Oct 2026 03:39 pm
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