जानकारों का मानना है कि इस गठबंधन से दोनों पार्टियों को फायदा होगा, क्योंकि राज्य के शहरी क्षेत्रों में भाजपा का आधार है, जबकि ग्रामीण पंजाब में अकाली दल का प्रभाव है। हालांकि, भाजपा अब राज्य में बराबर की हैसियत से गठबंधन चाहती है, जबकि पहले वह 'छोटे भाई' की भूमिका में रहती थी। भाजपा नेता लंबे समय से 2027 का पंजाब चुनाव अकेले लड़ने का दावा कर रहे थे, लेकिन पीएम मोदी और सुखबीर बादल की इस मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।