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जीआईएस मैप से लिंक होगी आपकी संपत्ति, छतरपुर में पक्के और कच्चे निर्माण की भी होगी जांच

Geographic Information Systems: खाली जमीनों का जीआईएस आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे प्रॉपर्टी आईडी डालते ही संपत्ति की पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी, अवैध निर्माण और कर वसूली आसान बनेगी।
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संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Chhatarpur news: एमपी में छतरपुर शहर के नगरीय ढांचे को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में नगर पालिका परिषद ने एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। नगरीय प्रशासन संचालनालय के निर्देशों के तहत शहर के सभी वार्डों में स्थित आवासीय, व्यावसायिक एवं खाली जमीनों का जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इस योजना के लागू होने से आने वाले समय में केवल भवन नंबर या प्रॉपर्टी आईडी डालते ही किसी भी संपत्ति की पूरी जानकारी एक क्लिक पर कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी।

नगर पालिका द्वारा यह जिम्मेदारी गुरुग्राम की एक कंपनी को दी गई है, जिसकी 10 अलग-अलग सर्वे टीमें शहर के विभिन्न वार्डों में तैनात रहकर कार्य कर रही हैं। दो चरणों में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक 25 वार्डों का सर्वे कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इसमें से 10 वार्डों के फाइनल डिजिटल नक्शे तैयार कर नगर पालिका के राजस्व विभाग को सौप दिए गए है, जबकि 15 अन्य वार्डों के नक्शे बनाने का काम अंतिम चरण में है। शेष बचे 15 वार्डों में सर्वे प्रक्रिया जारी है और आगामी एक माह के भीतर पूरे शहर का डिजिटल डेटाबेस तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह कार्य हो जाएंगे आसान

  • बाढ़, आगजनी या अन्य किसी आपदा के समय प्रभावित क्षेत्रों की सटीक स्थिति डिजिटल नक्शे पर तुरंत देखी जा सकेगी, जिससे राहत कार्य तेजी से चलाए जा सकेंगे।
  • उपग्रह, ड्रोन और जीपीएस तकनीक के उपयोग से बिना अनुमति किए गए अवैध निर्माणों और भूमि सीमा विवादों का तुरंत पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा शहर में पानी की पाइपलाइन, बिजली के तार, ड्रेनेज और सीवरेज नेटवर्क के बेहतर प्रबंधन व नई योजनाओं के निर्माण में यह जीआईएस रिकॉर्ड बेहद उपयोगी रहेगा।

घर-घर जाकर फोटो और दस्तावेजों का सत्यापन

सर्वे के दौरान मकान का कुल क्षेत्रफल, निर्माण की स्थिति जैसे आरसीसी छत, टीनशेड, पक्का या कच्चा निर्माण तथा प्लाट का सटीक नक्शा दर्ज किया जा रहा है। मकान मालिक की जानकारी के साथ-साथ समग्र आईडी, आधार कार्ड का ब्योरा, पहचान पत्र तथा प्रॉपर्टी टैक्स रसीदों को डिजिटल फॉर्म में अपलोड किया जा रहा है। इसके साथ ही हर भवन की डिजिटल फोटो भी ली जा रही है। इसके अलावा नगर पालिका के रिकॉर्ड से संपत्तियों का मिलान किया जा रहा है और जिन मकानों या जमीनों का रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, उनकी जांच कर वास्तविक मालिक की पहचान तय की जा रही है।

प्रॉपर्टी आईडी से लिंक होंगी संपत्तियां

सर्वे पूर्ण होने के बाद शहर का एक वार्डवार जीआईएस आधारित डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा। इसके तहत हर भवन को एक विशिष्ट डिजिटल नंबर दिया जाएगा, जिसे संपत्ति मालिक की प्रॉपर्टी आईडी से लिंक किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से नगर पालिका के अधिकारी व नागरिक सिर्फ भवन नंबर या प्रॉपर्टी आईडी डालकर मकान की नाप-जोख, मालिकाना हक और बकाया कर की स्थिति देख सकेंगे। साथ ही राजस्व विभाग के लिए टैक्स का सही निर्धारण करना और बकाया करों की वसूली करना आसान हो जाएगा, जिससे नगर पालिका के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और गड़बडियों पर रोक लगेगी।