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दमोह में मां बनाती है बीड़ी, वेल्डिंग के काम के साथ बेटा करता रहा पढ़ाई, अब 10 साल बाद संभालेगा ट्रेन की कमान

Damoh Rajendra Vishwakarma Success Story: मां बीड़ी बनाकर बेटे की पढ़ाई का खर्च जुटाती रही। राजेंद्र ने भी हार नहीं मानी। 10 साल संघर्ष, कई असफलताओं और छोटे-बड़े कामों के बाद आखिरकार उनका सपना पूरा हुआ।
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दमोह

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Akash Dewani

•

Oct 06, 2026

mother made beedi son became loco pilot rajendra vishwakarma success story

Rajendra Vishwakarma Success Story: दमोह के राजेंद्र विश्वकर्मा का 10 साल बाद पूरा हुआ सपना (फोटो सोर्स- Patrika Enhanced by Chatgpt)

Rajendra Vishwakarma Success Story: मध्य प्रदेश के दमोह जिले के बटियागढ़ क्षेत्र में मंजिल पाने के लिए राजेंद्र विश्वकर्मा ने करीब 10 साल तक संघर्ष किया। रास्ते में कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2014 में बीई करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। पुलिस की चार लिखित परीक्षाएं पास कीं, लेकिन फिजिकल में चयन नहीं हो सका।

रेलवे एनटीपीसी सहित कई परीक्षाओं में भी कुछ अंकों से सफलता हाथ से निकलती रही। 2018 में असिस्टेंट लोको पायलट की अंतिम मेरिट में भी जगह नहीं बन सकी। अब लगातार प्रयास का परिणाम मिला है। राजेंद्र का पश्चिम मध्य रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर चयन हुआ और वर्तमान में वह प्रशिक्षण ले रहे है। बटियागढ़ से एएलपी बनने वाले पहले युवा है।

युवाओं के लिए संदेश

राजेंद्र कहते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में एक-दो असफलताओं के बाद तैयारी छोड़ना नहीं चाहिए। अपनी कमियों को पहचानकर रणनीति बदलें और फिर प्रयास करें। सफलता मिलने में समय लग सकता है, लेकिन लगातार मेहनत और धैर्य बनाए रखने से मंजिल हासिल की जा सकती है।

खुद असफल हुए, दूसरों को सफलता दिलाई

राजेंद्र ने 2015 से 2024 तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का काम भी किया। उनके पढ़ाए अभ्यर्थियों में चार का पुलिस, बार का सेना और कई का शिक्षक व एसएससी जीडी में बयन हुआ। खुद कई बार असफल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों को आगे बढ़ने में मदद की।

मां ने बीड़ी बनाकर पढ़ाया

राजेंद्र की सफलता के पीछे परिवार का संघर्ष भी जुड़ा है। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। मां ने बीड़ी बनाकर बच्चों की पढ़ाई में सहयोग किया। राजेंद्र ने पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ परिवार की जिम्मेदारियां भी संभालीं। 2016 से 2018 तक गेस्ट टीचर रहे। 2021 से 2025 तक वोकेशनल ट्रेनर के रूप में काम किया। पिता और बड़े भाई के साथ वेल्डिंग दुकान पर भी काम किया, लेकिन तैयारी नहीं छोड़ी।

ऐसा रहा राजेंद्र का संघर्ष

▶ 2014 - बीई के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू
▶ 4 बार पुलिस की लिखित परीक्षा पास, फिजिकल में रह गए
▶ 2015 व 2019 रेलवे एनटीपीसी प्रारंभिक परीक्षा पास, मुख्य परीक्षा में चूके
▶ 2018 एएलपी की अंतिम मेरिट में कुछ अंकों से पीछे
▶ 2015-2024 युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई
▶ अब पश्चिम मध्य रेलवे में एएलपी, प्रशिक्षण जारी