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Drishyam 3: ‘दृश्यम’ और ‘दृश्यम 2’ से कितनी अलग है इस बार की ‘दृश्यम 3’, इन तीन पहलुओं में छिपी पूरी कहानी

Drishyam 3 The Conclusion: भारतीय सिनेमा की हिट फ्रेंचाइजी 'दृश्यम' एक बार फिर से सिनेमाघरों में लौट चुकी है। इस बार कहानी पिछली दो कहानियों से अलग है। चलिए जानते हैं इस बार की कहानी के वो पहलु जो इसे अलग बनाते हैं।
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Drishyam 3 The Conclusion

दृश्यम 3 (फोटो सोर्स- IMDb)

Drishyam 3 The Conclusion: अजय देवगन और तब्बू की फिल्म 'दृश्यम 3' ने आज सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है। फिल्म की कहानी इस बार भी विजय सलगांवकर के परिवार को बचाने की कोशिश के ही ईर्द-गिर्द घूमती है। विजय पर कानून एक बार फिर अपना शिकंजा कसना चाहता है जिसके लिए पुराना समीर देशमुख का केस एक बार फिर ओपन होता है। हालांकि पिछली 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी से इस बार की कहानी थोड़ी अलग है। चलिए जानते हैं उन प्वाइंट्स के बारे में जो इस बार की दृश्यम को थोड़ा अलग बनाते हैं।

2 अक्टूबर की जगह 23 जुलाई की कहानी

पिछली दो 'दृश्यम' में जहां फिल्म की कहानी 2 अक्टूबर के उस दिन के ईर्द-गिर्द घूमती है, जिस दिन से समीर देशमुख गायब होता है। वहीं इस बार मामला 23 जुलाई का है जिस दिन विजय सलगांवकर उस मेडिकल कॉलेज में नजर आता है जहां बॉडी का कंकाल कोर्ट के सामने पेश होने से पहले जाता है। अब शक की सुई पूरी तरह से इसी तारीफ पर है जिसके ऊपर फिल्म की कहानी टिकी हुई है।

मर्डर के बाद हुई जांच की कहानी

इस बार की कहानी उस मर्डर पर आधारित नहीं है जिसका विजय और उसके परिवार पर आरोप है, बल्कि इस बार की कहानी जांच में विजय की तरफ से दिए गए सबूतों की तह तक जाना है। क्राइम ब्रांच इस बार कोशिश करती है कि जैसे-तैसे विजय का नाम दिए गए सबूतों से छेड़छाड़ में नाम आ जाए।

जयदीप अहलावत की एंट्री

इस बार की फिल्म में सबसे बड़ा बदलाव ही यही है कि इस बार जयदीप अहलावत का नाम इस फ्रेंचाइजी से जुड़ गया है। इस फिल्म की कहानी में जयदीप एसपी क्राइम ब्रांच के तौर पर एंट्री करते हैं। इससे पहले फिल्म के दूसरे पार्ट में अक्षय खन्ना ने अपने अभिनय का दम-खम दिखाया था।

फिल्म की कहानी

अब फिल्म की कहानी आ पहुंची है वहां, जहां केस को 6 महीने बाद एक बार फिर ओपन करने की गुहार लगाई जाती है। समीर देशमुख के माता-पिता चाहते हैं कि उनके मरे हुए बेटे को इंसाफ मिले, इसलिए अब वो जा पहुंचे हैं, एसपी क्राइम ब्रांच राजवीर सिंह तोमर के पास। राजवीर अब इस केस को अपने हाथों में लेता है और फिर से इस पुराने केस को स्टडी करने के बाद सबूत जुटाने की कोशिशों में लग जाता है।

सबसे पहले वो विजय और मेडिकल कॉलेज में चौकीदारी करने वाले शख्स पर 24 घंटे नजर रखना शुरू कर देता है। इसके बाद उसे दोनों की मुलाकात की तस्वीरें भी मिल जाती है। इसके बाद पिछले 2 सालों से पुलिस ने विजय और उसके परिवार की कॉल रिकॉर्डिंग करना शुरू किया होता है, वो भी अदालत में पेश होती है, जिससे विजय और उसका पूरा पूरी तरह से फंस जाता है। इसके बाद क्या विजय अपने परिवार को बचाने की इस कोशिश में सफल हो पाया या फिर नहीं, इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।