
पायर फिल्म के एक सीन की फोटो। (फोटो सोर्स: IMDb)
Pyre Film: कुछ फिल्में सिर्फ कहानी सुनाने के लिए नहीं बनतीं, बल्कि दर्शक को कुछ महसूस कराने के लिए बनाई जाती हैं। ‘पायर’ भी ऐसी ही फिल्म है। उत्तराखंड के कुमाऊं हिमालय की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म एक बुजुर्ग दंपती के जरिए प्रेम, अकेलेपन, पलायन और बदलते रिश्तों की कहानी कहती है। फिल्म का निर्देशन नेशनल अवॉर्ड जीत चुके विनोद कापड़ी ने किया है। इसके मुख्य कलाकार पदम सिंह कापड़ी और हीरा देवी हैं।
फिल्म की कहानी कुमाऊं के एक दूरदराज पहाड़ी गांव में रहने वाले बुजुर्ग दंपती पदम और तुलसी के इर्द-गिर्द घूमती है। उनकी दुनिया अब उनके छोटे से घर, पुरानी यादों और एक-दूसरे तक सिमट गई है। उनके बच्चे बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में पहाड़ छोड़कर शहरों की तरफ जा चुके हैं। ऐसे में दोनों अपने बच्चों के लौटने का इंतजार करते हुए अपनी जिंदगी आगे बढ़ाते हैं।
फिल्म में पहाड़ों की खामोशी, खाली होते घर और दो लोगों के बीच का साथ ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। यह उस पीढ़ी की कहानी भी है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी एक जगह गुजार दी, लेकिन अब उनके आसपास की दुनिया धीरे-धीरे बदल रही है।
‘पायर’ में पदम सिंह कापड़ी और हीरा देवी मुख्य भूमिकाओं में हैं। इन कलाकारों की खासियत ये है कि दोनों की ये डेब्यू फिल्म है। दोनों का कोई फिल्मीं बैकग्राउंड नहीं रहा है। 80 वर्षीय पदम सिंह कापड़ी उत्तराखंड के रहने वाले हैं और रिटायर्ड आर्मी मैन हैं, जबकि 70 वर्षीय हीरा देवी गृहिणी, विधवा और क्लासिकल डांसर हैं। हैरानी की बात ये हैं कि इससे पहले दोनों ने कभी भी कैमरे के सामने एक्टिंग नहीं की है।
यही वजह है कि विनोद कापड़ी ने दोनों को अपनी फिल्म के लिए चुना। उनके मुताबिक, दोनों के अपने जीवन के अनुभव और उनके बीच की सहज केमिस्ट्री ने कहानी में ऐसी सच्चाई ला दी, जिसे किसी स्थापित कलाकार के जरिए दोहराना मुश्किल होता।
‘पायर’ का निर्देशन विनोद कापड़ी ने किया है। फिल्म को उन्होंने सिर्फ एक बुजुर्ग कपल की प्रेम कहानी के तौर पर नहीं, बल्कि बढ़ती उम्र, पलायन और परिवार से दूर होती नई पीढ़ी के बीच बची हुई उम्मीद की कहानी के रूप में पेश किया है। बता दें कि पूरी फिल्म उत्तराखंड के पहाड़ों में शूट की गई है। फिल्म में हिमालय सिर्फ कहानी की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि फिल्म का एक अहम हिस्सा है। पहाड़ों की खूबसूरती के साथ वहां की खाली होती बस्तियां और बदलती जिंदगी फिल्म के भाव को और गहरा करती हैं।
‘पायर’ का संगीत ‘Life of Pi’, ‘Little Miss Sunshine’, ‘Monsoon Wedding’ और ‘Moneyball’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले और ऑस्कर विजेता संगीतकार माइकेल डाना ने दिया है। वहीं, फिल्म के गीतों के बोल गुलजार साहब ने लिखे हैं।
‘पायर’ की अंतरराष्ट्रीय यात्रा भारत में रिलीज से काफी पहले शुरू हो चुकी थी। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 28वें Tallinn Black Nights Film Festival में हुआ, जहां इसे PÖFF Best Film Audience Award मिला। इसके बाद फिल्म São Paulo, Cambridge, Bath, Fajr International Film Festival और International Film Festival of Kerala समेत कई फिल्म महोत्सव में दिखाई गई। मेकर्स के मुताबिक, 'पायर' अब तक 18 इंटरनेशनल अवॉर्ड्स जीत चुकी है, जिनमें 15 सर्वश्रेष्ठ फिल्म अवार्ड्स शामिल हैं। वहीं, सर्बिया और बोस्टन में फिल्म के लिए विनोद कापड़ी को बेस्ट डायरेक्टर के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा फिल्म के संगीत, सिनेमैटोग्राफी और साउंड को भी अलग-अलग फिल्म फेस्टिवल्स में सम्मान मिला है।
‘पायर’ का मतलब चिता होता है, लेकिन फिल्म का भाव सिर्फ अंत से जुड़ा नहीं है। यह उस रिश्ते की कहानी है जो उम्र, दूरी और अकेलेपन के बावजूद बना रहता है। यह उन लोगों की कहानी है, जिनके बच्चे दूर चले गए हैं, लेकिन उनका इंतजार खत्म नहीं हुआ। शायद इसी वजह से ‘पायर’ को सिर्फ एक फिल्म कहना इसकी भावना को छोटा करना होगा। यह पहाड़ों के एकांत में जलती उस छोटी-सी आग की तरह है, जिसमें प्रेम भी है, यादें भी हैं और साथ बने रहने की उम्मीद भी। पर्दा गिरने के बाद भी इसकी कहानी शायद कुछ देर तक दर्शक के भीतर चलती रहे।
अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपनी पहचान बनाने के बाद अब ‘पायर’ भारतीय दर्शकों तक पहुंचने जा रही है। फिल्म 23 अक्टूबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी और इसका डिस्ट्रीब्यूशन Cinépolis करेगा।
Updated on:
01 Oct 2026 10:10 am
Published on:
01 Oct 2026 12:34 am
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