बाबा के जन्मस्थान की मिट्टी लेने आती थी सेविकाएं
ग्रामीणों ने बताया कि वीरेंद्र देव की प्राथमिक शिक्षा उनकी मां के द्वारा दी गई थी, क्योंकि उस समय गांव में कोई स्कूल नहीं था। बाबा पीपल के पेड़ के नीचे बैठ कर शिक्षा लिया करता था, जहां अब जानवर बांधे जा रहे हैं। बचपन में बाबा जिस झोपड़ी में रहता था, उसे 50 साल पहले ही गांव वालों को बेच दिया गया था। खेती भी बेचकर वीरेंद्र देव गांव से बाहर चला गया, फिर कभी लौटकर वापस नहीं आया। लेकिन कई बार बाबा की सेविकाएं बाबा की जन्मभूमि की मिट्टी लेने आती थीं, जो बाबा को अपना भगवान बताती थीं।