8 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

AI Use In Cyber Fraud : अपनों की आवाज़ और चेहरे से धोखा न खाएं, खाली हो सकता है बैंक खाता

Gorakhpur news: AI के आने से जहां एक ओर विज्ञान, मेडिकल आदि क्षेत्र में मदद मिल रही है वहीं यह साइबर ठगों के लिए वरदान है। सबसे ज्यादा दिक्कत साइबर फ्रॉड से हो रही है जहाँ ये ठग AI का इस्तेमाल कर चेहरे और आवाज की क्लोनिंग कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।
2 min read
Google source verification
Up news, gorakhpur

Cyber thana ( सोर्स: अनूप शुक्ला)

How To Save With Cyber Fraud: आधुनिकता की दौर में जहां विज्ञान और तकनीक सहूलियत देने में अहम भूमिका रही है तो इसका दुरुपयोग भी घातक बनता जा रहा है। बढ़ते साइबर अपराध इसकी बानगी है, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर साइवर अपराधी लोगों के जेबे खाली करने में लगे हैं। तकनीक का इस्तेमाल कर नए- नए तरीकों से लोगों को बेवकूफ बनाकर उनके बैंक खाते खाली कर रहे हैं।

सजगता और सावधानी ही बचाव

देश, प्रदेशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेस आधारित डोप फेक गिरोह सक्रिय हो चुका है। ये साइबर अपराधी किसी का हुबहू चेहरा व आवाज का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। इसको लेकर साइबर विभाग ने साइड लाइन जारी किया है। साइबर पुलिस का मानना है कि लोगों को सजगता और सावधानी सावधानी ही फेंक डिप गैंग से बचा सकती है। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश में डिप फेंक गैंग उसकी ही आवाज में बात करते हुए ठगी करता है।

AI का उपयोग कर इकठ्ठा करते हैं डाटा

एआई के जरिये किया जा रहा है साइबर अपराधी एआई के इस्तेमाल से किसी को शिकार बनाने से पहले उसका पुरा डाटा इकट्ठा करते हैं। शिकार को चिन्हित कर ये गैंग उसके बेटे - बेटी या बेहद करीबी सगे सम्वन्धियों का चेहरा, आवाज का इस्तेमाल कर और काल किये जाने वाले नम्बर पर फोटो की डीपी लगाता है और फिर अपने जाल में फसाने की साजिश रचता है।

शिकार पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालते हैं

यह गैंग जब काल करता है तो शिकार होने वाला व्यक्ति जैसे ही काल रिसीव करता है उसके मोबाइल के कालर पर हुबहू उसके परिचित के आवाज में बात करता है। ज्यादातर मामलों में यह गैंग बेटा- बेटी या सगे रिश्तेदार बताकर खुद को बड़ी मुसीबत में होने का सूचना देते हैं और मदद के तौर पर मोटी रकम की मांग करते हैं। गैंग इतना शातिर है कि यह शिकार होने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर अपना इतना प्रभाव डाल देता है कि सामने वाला उसके सामने असहज हो जाता है।

ठगी होने पर साइबर थाना से सहयोग लें

साइबर पुलिस का कहना है जो भी अपना बन बात फोन करके करता है तो सबसे पहले उसके बारे में धर्य से पता कर लें। अगर परिवार का कोई सदस्य बाहर रह यह है तो उसके आसपास वाले को फोन करके पता करें य फिर खुद वहां जाकर उसकी पुष्टि करें या किसी को भेजकर कराएं। इससे भी ठगी हो जाती है तत्काल साइबर थाने से सहयोग लें।

एडीजी गोरखपुर जोन रामकुमार ने कहा

धैर्य का परिचय देते हुए कालर की वास्तविक पुष्टि और रकम मांगने के कारणों को जानने की कोशिश करें।दरअसल डिप फेंक गैंग काल करके मोबाइल बंद कर देता है।सजगता और धैर्य से ही ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है। अगर इस तरह की कोई घटना होती है तो साइबर के हेल्प लाइन नम्बर 1930 और हेल्पलाइन नंबर 7839676674 पर मैसेज करें ताकि 24 घंटे के अंदर निकासी होने वाली धनराशि को वापस कराया जा सके।