
राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप (Photo: IANS Video Grab)
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज है। राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर परिवारवाद, पीडीए की राजनीति और सहयोगी दलों को लेकर निशाना साधा है। कश्यप ने अखिलेश यादव को ‘घमंडी’ और ‘खुदगर्ज’ बताते हुए दावा किया कि सपा को अगले विधानसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने आरएलडी को लेकर अखिलेश की टिप्पणी का भी जिक्र किया और कहा कि इसका असर पार्टी के कार्यकर्ताओं और जाट समाज के बीच पड़ सकता है।
नरेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति को लेकर कहा कि समाजवादी पार्टी समय के साथ इसकी राजनीतिक व्याख्या बदलती रही है। उन्होंने कहा कि अब ‘पी’ को पंडित से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कश्यप के मुताबिक, सपा अलग-अलग सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने के लिए पीडीए के स्वरूप को बदल रही है।
भाजपा नेता ने दावा किया कि ब्राह्मण, पिछड़ा और दलित समाज सपा की इस रणनीति को समझ चुका है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक समीकरण के हिसाब से अलग-अलग वर्गों को जोड़ने की कोशिश का असर चुनाव में दिखाई देगा। कश्यप ने इसे 2027 के चुनाव में सपा के लिए नुकसान की वजह बताया।
कश्यप ने अखिलेश यादव पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर समाजवादी पार्टी 2027 में सरकार बनाने का दावा कर रही है तो मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करती।
उन्होंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर भी सवाल किया। कश्यप ने कहा कि एक तरफ पार्टी पीडीए और सामाजिक प्रतिनिधित्व की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ महत्वपूर्ण पदों पर परिवार की भूमिका को लेकर सवाल उठते हैं। भाजपा नेता ने दावा किया कि जनता इन राजनीतिक विरोधाभासों को देख रही है।
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ईडी की कार्रवाई को लेकर नरेंद्र कश्यप ने कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान यूनिवर्सिटी से जुड़े कई मामलों में नियमों की अनदेखी हुई।
कश्यप ने कहा कि यदि जांच में किसी जमीन या संपत्ति का इस्तेमाल अवैध तरीके से किए जाने की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी संपत्ति का उपयोग जनहित में किया जाना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि देश में आक्रांताओं के नाम पर विश्वविद्यालय बनवाकर आखिर समाजवादी पार्टी क्या संदेश देना चाहती थी। उन्होंने कहा कि देश में अनेक स्वतंत्रता सेनानी, ऋषि और महापुरुष हुए हैं, जिनके नाम पर संस्थानों का निर्माण किया जा सकता था। गलत तरीके से जमीन और धन का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में जनता के हित में नहीं हो सकता। ईडी और सीबीआई अपने स्तर पर कार्रवाई करेंगी और यदि कोई संपत्ति अवैध पाई जाती है तो उसे जनउपयोगी बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।
2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के अखिलेश यादव के दावे पर कश्यप ने कहा कि चुनाव से पहले कोई भी राजनीतिक दल ऐसा दावा कर सकता है। उन्होंने बिहार समेत कई राज्यों के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं के चुनावी दावे कई बार नतीजों में तब्दील नहीं हुए।
कश्यप ने बिहार चुनाव में अखिलेश यादव के प्रचार का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश ने वहां 16 सभाएं की थीं और जिन सीटों पर उन्होंने प्रचार किया, वहां सपा को जीत नहीं मिली। इसी आधार पर उन्होंने 2027 में सपा के प्रदर्शन पर सवाल उठाया।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकार बनाने का दावा करके अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। यह कश्यप का राजनीतिक आकलन है। चुनावी परिणाम आने तक इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी।
राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भी नरेंद्र कश्यप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का बयान उनके अंदर आए अहंकार और घमंड को दर्शाता है। जिस आरएलडी को अखिलेश यादव कथित तौर पर 'चवन्नी' कहकर संबोधित कर रहे हैं, उस पार्टी की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने की थी। चौधरी चरण सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में देश और प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएलडी को इस तरह संबोधित कर अखिलेश यादव ने पार्टी के कार्यकर्ताओं और जाट समाज का अपमान किया है। आने वाले समय में अखिलेश यादव को इस राजनीतिक बयान का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कश्यप ने कहा कि 2024 के चुनाव में हुई कथित राजनीतिक गलतियों और कमियों को जनता अब समझ चुकी है। कश्यप ने अखिलेश यादव, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें 'आउट ऑफ डेट लीडर' बताया और दावा किया कि इन नेताओं की विश्वसनीयता कम हुई है।
Updated on:
20 Aug 2026 08:10 am
Published on:
20 Aug 2026 08:02 am
