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बच्चे के होंठ पर जन्म से हैं छोटे गड्ढे? जानें कब हो सकते हैं orofacial clefting बीमारी के संकेत

बच्चे के होंठ पर छोटे गड्ढे (Lip Pits) किस बीमारी का संकेत हो सकते हैं? जानिए सीडीसी, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन और नेचर रिसर्च से जानिए ऑरोफेशियल क्लेफ्टिंग और वैन डेर वोड सिंड्रोम (VWS) के लक्षण, कारण और इलाज।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Oct 05, 2026

Close-up of a newborn baby showing lower lip pits associated

होंठ के गड्ढे और क्लेफ्टिंग का क्या है आपस में संबंध- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Orofacial Clefting: अक्सर माता-पिता नवजात शिशु के शरीर, चेहरे और त्वचा की बारीकी से जांच करते हैं। कई बार बच्चे के निचले होंठ (Lower Lip) पर छोटे-छोटे गड्ढे या डिंपल जैसी आकृतियां दिखाई देती हैं। देखने में भले ही ये मामूली निशान लगें, लेकिन डॉक्टरी भाषा में इन्हें लिप पिट्स (Lip Pits) कहा जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, बच्चे के होंठ पर जन्म से मौजूद ये गड्ढे किसी सामान्य स्थिति का हिस्सा नहीं होते, बल्कि यह ऑरोफेशियल क्लेफ्टिंग (Orofacial Clefting) जैसी जन्मजात स्थितियों की ओर इशारा कर सकते हैं।

होंठ के गड्ढे और क्लेफ्टिंग का क्या संबंध है?

सीडीसी के मुताबिक, ऑरोफेशियल क्लेफ्टिंग उस स्थिति को कहा जाता है जब गर्भावस्था के दौरान शिशु के चेहरे और मुंह की बनावट पूरी तरह आपस में जुड़ नहीं पाती। इसके कारण शिशु के ऊपरी होंठ (Cleft Lip) या तालु (Cleft Palate) में कटाव रह जाता है। जब किसी बच्चे में होंठ के गड्ढे (Lip Pits) के साथ-साथ कटा हुआ होंठ या तालु जैसी समस्या भी देखी जाती है, तो इसे 'वैन डेर वोड सिंड्रोम' (Van der Woude Syndrome - VWS) कहा जाता है। यह सिंड्रोम ऑरोफेशियल क्लेफ्टिंग से जुड़ी सबसे आम अनुवांशिक स्थितियों में से एक माना जाता है।

वैन डेर वोड सिंड्रोम (VWS) के मुख्य लक्षण

नेचर रिसर्च के मुताबिक, इस स्थिति में बच्चों में मुख्य रूप से निम्नलिखित लक्षण देखने को मिल सकते हैं;

यह बीमारी क्यों होती है?

  • अनुवांशिक कारण (Genetic Factors)- यह स्थिति मुख्य रूप से जीन म्यूटेशन (विशेषकर IRF6 जीन में बदलाव) के कारण होती है। यदि माता-पिता में से किसी एक को यह जीन म्यूटेशन है, तो बच्चे में इसके पहुंचने की 50 प्रतिशत संभावना होती है।
  • पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी कारक- गर्भावस्था के दौरान मां का धूम्रपान करना, शराब का सेवन, कुछ खास दवाइयों का प्रभाव, शरीर में फोलिक एसिड की कमी, मोटापा या तेज बुखार होना भी क्लेफ्टिंग के जोखिम को बढ़ा सकता है।

बच्चे के स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ता है?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, यदि बच्चे के तालु या होंठ में कटाव है, तो उसे शुरुआती दिनों में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है;

  • दूध पीने में परेशानी।
  • बोलने में रुकावट।
  • कान में इन्फेक्शन।

इलाज और देखभाल कैसे संभव है?

डॉक्टरों के अनुसार, सही समय पर पहचान और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों से इस बीमारी का पूरी तरह सफल इलाज संभव है। डॉक्टर बच्चे की उम्र के हिसाब से होंठ के गड्ढों और कटे हुए होंठ या तालु को जोड़ने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करते हैं। बच्चे की स्थिति के आधार पर प्लास्टिक सर्जन, दंत चिकित्सक (Dentist), स्पीच थेरेपिस्ट और जेनेटिक काउंसलर मिलकर बच्चे का इलाज करते हैं। अगर परिवार में पहले भी किसी को यह समस्या रही है, तो माता-पिता को अनुवांशिक परामर्श (Genetic Counseling) लेने की सलाह दी जाती है।

माता-पिता के लिए जरूरी सलाह

यदि आप अपने नवजात शिशु के निचले होंठ पर किसी भी तरह के छोटे गड्ढे या असामान्य निशान देखें, तो इसे केवल सौंदर्य या सामान्य निशान मानकर अनदेखा न करें। बच्चे के मुंह और तालु की अंदरूनी जांच किसी बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या सर्जन से जरूर करवाएं, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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