
राऊ विधानसभा के गांवों में 11 करोड़ के विकास कार्य मंजूर (फोटो सोर्स: Chatgpt)
Indore News : मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के अंतर्गत आने वाले पंचायत क्षेत्रों में विकसित होने वाली कॉलोनियों से ली जाने वाली आश्रय निधि से अब विकास की गंगा बहेगी। विधायक मधु वर्मा के लंबे प्रयास के बाद सरकार के पंचायत विभाग ने 11 करोड़ की राशि स्वीकृत कर दी है जिसमें 14 गांवों में काम होंगे। बड़ी बात ये है कि इंदौर जिला पंचायत के पास 150 करोड़ से अधिक का फंड जमा है, जिसको लेकर कोई पॉलिसी तय नहीं थी। पत्रिका के मुद्दा उठाने पर सरकार ने फैसला किया।
ग्रामीण क्षेत्र में विकास के लिए सरकार ने एक मॉडल तैयार किया था। पंचायत क्षेत्र में विकसित होने वाली कॉलोनियों से आश्रय निधि जमा कराने का फैसला किया गया। सरकार ने नियम तो बना दिया, लेकिन विकास पर खर्च या उपयोग कैसे किया जाए ये नियम बनाना भूल गए। प्रदेश में शहरी क्षेत्र से लगी हुई सभी जिला पंचायतों में करोड़ों रुपए जमा थे तो इंदौर में अकेले 150 करोड़ रुपए से अधिक की राशि थी।
इस विसंगती को लेकर पत्रिका ने 12 सितंबर 2025 को पंचायतों में निधि खूब, पर विकास को आश्रय नहीं शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। असर ये हुआ कि, ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने समीक्षा कर दिशा निर्देश जारी किए थे। तय हुआ था कि, जहां से निधि मिली वहां पर विकास किया जाएगा। उसके बाद विधायक मधु वर्मा लगातार प्रयास कर रहे थे कि, उनकी विधानसभा में निधि से काम हो।
आखिरकार विभाग ने 14 गांव में 11 करोड़ के काम को मंजूरी दे दी। जल्द ही, सभी काम शुरू होंगे। देखा जाए तो दीपावली से पहले ही धमाका हो गया और ये भी कहा जा सकता है कि, राऊ के गांव में विकास की दीपावली मनाई जाएगी। काम की शुरुआत में मंत्री पटेल को भी बुलाने की तैयारी है।
ग्रामीण क्षेत्र में नई कॉलोनियों की बसाहट हो रहा है। उनके विकास से पहले मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (कॉलोनियों का विकास) नियम 2014 के तहत अनुमति लेना होता है। उस दौरान कॉलोनाइजर से दो प्रकार का टैक्स जमा कराया जाता है। एक आश्रय निधि तो दूसरा अतिरिक्त आश्रय निधि है ताकि भविष्य में ग्रामीण क्षेत्र का विकास कराया जा सके, लेकिन दोनों के खर्च करने का 11 साल बाद भी अब तक कोई नियम नहीं है। 2014 से ये राशि जिला पंचायत के खाते में जमा हो रही है जिसे खर्च नहीं किया गया। ये राशि जमीन की गाइड लाइन का 6 फीसदी हिस्सा होती है। विकास की लागत का 5 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर लिया जाता है तो रो हाउस बनाए जाने पर 10 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर लिया जाता है।
बड़िया कीमा:
-ड्रेनेज कार्य पावर हाउस
-ड्रेनेज कार्य कांकड़
-ड्रेनेज कार्य बड़िया कीमा
बिहाड़िया:
-शमशान घाट पर श्रद्धांजलि सामुदायिक भवन निर्माण (अधोसंरचना)
देवगुराड़िया:
-स्वयं सहायता समूह के लिए आजीविका मवन सह प्रशिक्षण केंद्र गुटकेश्वर महादेव मंदिर के पास देवगुराड़या
दूधिया:
-स्वयं सहायता समूह के लिए आजीविका भवन एवं व्यवसायिक परिसर
नैनोद:
-आजीविका के लिए व्यावसायिक परिसर
-स्वयं सहायता समूह के लिए आजीविका भवन
-सह प्रशिक्षण केंद्र
-आजीविका हेतु व्यावसायिक परिसर मत्स्य परिसर के लिए
सिंहासा:
-स्वयं सहायता समूह के लिए आजीविका भवन सह प्रशिक्षण केंद्र
नावदा पंथ:
-आजीविका भवन सह प्रशिक्षण केंद्र
बाक:
-आजीविका भवन सह प्रशिक्षण केंद्र
सनावदिया:
आजीविका भवन सह प्रशिक्षण केंद्र
रंगवासा:
-आजीविका भवन सह प्रशिक्षण केंद्र
-व्यायामशाला निर्माण
-पेयजल हेतु पाइपलाइन डालना
तिल्लौर खुर्द:
प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन शेड
सिंदोड़ा:
-व्यायामशाला निर्माण
बिसनावदा:
-नल जल योजना निर्माण मोरोद
-खेल मैदान निर्माण
Updated on:
11 Oct 2026 05:00 pm
Published on:
11 Oct 2026 05:00 pm
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