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खेतों में बाढ़ का कहर! दफ्तरों में काम ठप, जगदलपुर में मुआवजे के लिए भटक रहे किसान

Farmers Compensation: जगदलपुर में बाढ़ और भारी बारिश से फसल बर्बाद होने के बाद किसान मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से फसल नुकसान का सर्वे, पंचनामा और भूमि संबंधी जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं।
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Patwari Strike

पटवारियों की हड़ताल से राहत प्रभावित (Photo Source- Patrika)

Patwari Strike: जगदलपुर जिले में इन दिनों अन्नदाता दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। हाल ही में आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण जिन किसानों की सालभर की मेहनत पानी में बह गई थी, उनके जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि अब प्रशासनिक मोर्चे पर शुरू हुई पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बाढ़ से तबाह फसलों के मुआवजे और सरकारी मदद के बीच पटवारियों की हड़ताल बड़ा रोड़ा बन गई है, जिससे किसानों में भारी नाराजगी और मायूसी छाई हुई है।

Patwari Strike Impact: सर्वे का काम ठप

बाढ़ प्रभावित खेतों और फसलों के नुकसान का आधिकारिक आकलन या कहे पंचनामा पटवारियों के जरिए ही होना था, जो अब रुक गया है। इससे मुआवजे की फाइलें अटक गई हैं।

पंजीयन पर संकट

रकबा संशोधन, फसल सत्यापन मतलब गिरदावरी और भूमि से जुड़े रिकॉर्ड अपडेट न होने से किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने में बड़ी तकनीकी अड़चनें आ सकती हैं।

दस्तावेजी कार्य बंद

नामांतरण, बंटवारा, आय-जाति और भूमि से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए किसान तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन काम बंद होने से उन्हें निराशा हाथ लग रही है।

जिला प्रशासन ने सर्वे की वैकल्पिक व्यवस्था बनाई

पटवारियों के हड़ताल पर जाने से उपजे गतिरोध को तोडऩे के लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था की रूपरेखा तैयार की है। इस संबंध में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि फसल नुकसान के सर्वे का काम प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। इसके तहत कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कोटवार, ग्राम पंचायत सचिव और स्थानीय निकाय के कर्मचारी मिलकर फसलों का नजरिया आंकलन करेंगे।

वहीं एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी ने यह भी बताया कि यह व्यवस्था केवल शुरुआती रिपोर्ट के लिए है, क्योंकि जमीन, पंचनामा और मुआवजे से जुड़ा मुख्य एवं वैधानिक अधिकार राजस्व विभाग के पास ही रहता है। जब तक पटवारी काम पर नहीं लौटते, तब तक किसानों को वास्तविक मुआवजा मिलने की प्रक्रिया अधर में ही लटकी रह सकती है। कुल मिलाकर, एक तरफ कुदरत की मार से बस्तर का किसान बेहाल है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक हड़ताल के कारण उसकी फाइलें बंडल में कैद होकर रह गई हैं।

बाढ़ ने तबाह किए कई एकड़ खेत

जिले के संभावित आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल पंजीकृत किसानों की संख्या करीब 1.30 लाख से 1.40 लाख के आसपास है। सितंबर के अंतिम और अक्टूबर की शुरुआत में इंद्रावती नदी और स्थानीय जलाशयों के उफान पर आने से जिले के निचले और नदी तटीय इलाकों में भयंकर बाढ़ आ गई थी। विशेष तौर पर जगदलपुर, बस्तर, तोकापाल, लोहंडीगुड़ा और बकावंड ब्लॉक के तटीय गांवों में किसानों की धान की फसल, मिर्च और मौसमी सब्जियां पूरी तरह जलमग्न हो गईं। खेतों में मोटी रेत और कीचड़ जमने से उपजाऊ जमीन बंजर जैसी हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, इस आपदा से जिले के हजारों किसान परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जो अब सरकार से राहत राशि की आस लगाए बैठे हैं।

मंगलवार से पटवारियों की हड़ताल

छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर मंगलवार से जिलेभर के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। पीवी ऐप की तकनीकी पेचीदगियों, काम के अत्यधिक दबाव और हालिया दंडात्मक कार्यवाही के विरोध में शुरू हुई इस हड़ताल का सीधा और सबसे बड़ा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।