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Public Ka Panna: कहीं फाटक पर रेंगते पहिये तो कहीं अवैध कब्जों व आवारा जानवरों का आतंक, समाधान की आस में जनता

Public Ka Panna : 'पत्रिका' की नई पहल, 'पब्लिक का पन्ना' से जुड़ कर जयपुर की जनता ने अपनी परेशानियां हमसे साझा की हैं। जनता ने सिस्टम से कई बार गुहार लगाई, पर समाधान नहीं मिला। कुछ समस्याएं तो जानलेवा हो गईं है। जानिए अपने शहर की जनता का दर्द।
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Public ka panna

Public Ka Panna : फोटो पत्रिका। सड़क, पानी, सफाई, ट्रैफिक, पार्किंग, अतिक्रमण, स्कूल, अस्पताल, बिजली, स्ट्रीट लाइट और सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याएं हमें भेजें। आपके मोहल्ले की अच्छी पहल, किसी व्यक्ति या संस्था की उपलब्धि, बच्चों-युवाओं की सफलता और कोई भी प्रेरक सकारात्मक खबर भी हमें भेजें। ऊपर दिया QR Code स्कैन करें।

जयपुर. जयपुर शहर के विभिन्न इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के चलते आमजन का जीना मुहाल हो गया है। जगतपुरा स्थित सीबीआइ फाटक पर रोज लगने वाले भीषण जाम से जहां जिंदगी की रफ्तार थम रही है, वहीं मानसरोवर, निर्माण नगर और प्रतापनगर जैसी प्रमुख कॉलोनियों में टूटी सड़कें, सीवरेज की समस्या, खुलेआम अतिक्रमण, गंदगी के ढेर और आवारा मवेशियों व बंदरों का आतंक लोगों के लिए सिरदर्द बन चुका है।

सीबीआइ फाटक जगतपुरा : रेंगते पहियों के बीच हर दिन अटक रहे लोग

सुरेंद्र कुमार शर्मा @ पत्रिका
सीबीआइ फाटक पर हर दिन लगने वाला जाम हजारों लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। सुबह-शाम पीक ऑवर्स में वाहनों की लंबी कतारें लगने से इधर से गुजरने वाले लोगों और आस-पास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का मूल्यवान समय बर्बाद हो रहा है। दुर्घटनाओं की आशंका भी है। क्षेत्र में तेजी से बढ़ते आवासीय और व्यावसायिक विस्तार के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इधर से गुजरने वाली स्कूली बसों, नौकरीपेशा लोगों व व्यापारियों के साथ आपातकालीन वाहनों को भी जाम का सामना करना पड़ता है। पीक ऑवर्स में यातायात पुलिस की तैनाती से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए फाटक क्षेत्र का उच्चस्तरीय यातायात सर्वे कराकर अंडरपास या ओवरब्रिज की संभावनाओं का तकनीकी अध्ययन कराया जाना चाहिए। वैकल्पिक मार्ग विकसित हो।

फाटक बार-बार बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग लग जाती हैं। फाटक खुलने के बाद आगे निकलने की होड़ में अक्सर जाम भी लग जाता है। इस कारण ग्राहकों को कैफे तक पहुंचने में परेशानी होती है।
-रवि शर्मा, कैफे संचालक, सीबीआइ फाटक

फाटक पर लगने वाले जाम का असर व्यापार पर भी पड़ रहा है। दुकानों के सामने वाहन खड़े होने से पर ग्राहकी प्रभावित होती है। पीक ऑवर्स में जाम की समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
-धर्मेंद्र सिंह राजपूत, दुकानदार, सीबीआइ फाटक

हाईटेंशन लाइन के नीचे 4-5 साल से रोड़ी, बजरी-ईंट का अवैध कारोबार

तन्मय गुप्ता, क्षीर सागर, शिव विहार गोल्यावास, मानसरोवर

हाईटेंशन लाइन के नीचे गत 4-5 साल से रोड़ी, बजरी और ईंट का अवैध कारोबार चल रहा है। भवन निर्माण सामग्री के कारोबारी ने इस जगह को अवैध डिपो बना रखा है। ट्रकों से सामग्री खुले में ही डाल दी जाती है।

तारबंदी, पौधे भी लगवाए, नहीं निकला हल

क्षेत्र की विकास समिति की ओर से इस पर रोक लगाने के लिए तार बंदी कराकर पेड़-पौधे व बेंचे भी लगवाईं। भवन निर्माण सामग्री के कारोबार से जुड़े लोगों ने तार बंदी तोड़ दी। पेड़-पौधों को नष्ट कर बेंचे भी हटवा दीं। साथ ही ईंट-बजरी का स्टॉक और ज्यादा बढ़ा दिया। इसकी शिकायत जेडीए में भी की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। हाई टेंशन लाइन के नीचे चल रहे इस अवैध कारोबार पर रोक लगे और इसे ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए।

हाईटेंशन लाइन के नीचे सड़क ही नहीं

कॉलोनी के जेडीए अप्रूव्ड होने के बावजूद इसके एक हिस्से में अतिक्रमण हो रखा है। बजरी और रोड़ी के कारण धूल-मिट्टी उड़ने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- अवधेश शर्मा, क्षीर सागर, शिव विहार कॉलोनी

कॉलोनी के अतिक्रमण वाले हिस्से में असामाजिक तत्वों तथा नशाखोरी करने वाले लोगों का जमावड़ा रहता है। महिलाओं और बेटियों का इधर से गुजरना सुरक्षित नहीं रह गया है।
- शिव कांत व्यास, क्षीर सागर कॉलोनी, शिव विहार

घाटगेट चौराहा... पुलिस की नजर से दूर

मैं घाटगेट चौराहे से रोज गुजरता हूं। यहां की यातायात व्यवस्था देखकर एक सवाल बार-बार मन में आता है—क्या यह चौराहा यातायात पुलिस के नक्शे से गायब हो चुका है? चौराहे पर नियमित रूप से कोई यातायात पुलिसकर्मी नजर नहीं आता। कभी कोई पुलिसकर्मी खड़ा दिख भी जाए तो नियम तोड़कर निकलने वाले वाहन चालकों को रोकने की बजाय मूकदर्शक बना रहता है। चारों दिशाओं से आने वाले वाहन चालक सुविधा के हिसाब से रास्ता काटते हैं और नियम से चलने वाला बीच चौराहे पर फंस जाता है।
- अमित बड़ाया

हादसे का इंतजार ?

यह शहर के उन चौराहों में से एक है जहां यातायात के नियम मानने वाले ही परेशानी झेलते हैं। क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही पुलिस की नजर इस चौराहे पर पड़ेगी? जिम्मेदार अधिकारी बताएं कि शहर के इतने व्यस्त चौराहे पर नियमित यातायात व्यवस्था क्यों नहीं है?

जिम्मेदारों की लापरवाही से कूड़े का पहाड़

कुछ गैर-जिम्मेदार लोगों द्वारा कॉलोनी में लगातार मलबा डाले जाने से क्षेत्र में कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है। निगम, क्षेत्रीय थाने और हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पब्लिक स्पीक

चिकित्सकों की प्रेक्टिस पर लगे रोक

सरकार से वेतन-भत्तों सहित अन्य सुविधाएं लेने वाले सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगनी चाहिए। सीनियर्स डॉक्टर्स की मौजूदगी में रेजीडेंट डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं। इस प्रथा पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
- मुंशी लाल यादव, कल्याण कॉलोनी, टोंक फाटक

रिंग रोड के कारण मुख्य मार्ग बंद

बगराना में रिंग रोड बनने के बाद पूर्व में उपयोग में लिए जा रहे मुख्य रास्ते को बंद कर दिया गया है। गैस गोदाम एवं जगतपुरा के लिए प्रमुख मार्ग होने के बावजूद इसे बंद करने से स्थानीय निवासियों को आवागमन के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
-अनिल गुप्ता, माली की कोठी, बगराना

तय समय पर नहीं आती कचरे की गाड़ी

कॉलोनी में कचरे की गाड़ी (हूपर) के आने का समय तय नहीं है। अक्सर यह 12 बजे बाद और कभी-कभी दोपहर में 2 से 3 के बीच में भी आती है। हूपर चालक को इसके लिए कई बार टोका भी, मगर वह हर बार कोई न कोई बहाना बना देता है।
- वीरेंद्र उप्रेती, तिरुपति विहार, मान्यावास

पत्रिका इम्पैक्ट : हूपर पहुंचने लगा, श्वानों से मिली राहत

राजस्थान पत्रिका के 5 अक्टूबर के अंक में 'पब्लिक का पन्ना' में प्रकाशित जनसमस्याओं का समाधान संबंधित विभागों की ओर से किया जा रहा है। सिविल लाइन्स स्थित पार्क में श्वानों को निगम की पशु प्रबंधन शाखा ने पकड़ा। यहां पिछले कई दिनों से स्थानीय लोग श्वानों की आवाजाही से परेशान थे।

वहीं, सिरसी रोड स्थित मीनावाला की कॉलोनियों में कचरा संग्रहण वाहन (हूपर) भी नियमित रूप से पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों को इससे राहत मिली है। गुर्जर की थड़ी स्थित प्रेम नगर-द्वितीय कॉलोनी में सीवर लाइन को भी निगम ने दुरुस्त करवाया है।

उधर, अजमेर रोड पर धावास और आस-पास की कॉलोनियों की सड़कों को दुरुस्त करने का काम भी जेडीए जल्द शुरू करेगा।

जनता की नजर में

चालान भरने के बाद भी रिमाइंडर, गलत वेबसाइट बताकर फिर वसूली

मेरी गाड़ी का चालान गत तीन जनवरी को हुआ था। 28 जनवरी को ऑनलाइन चालान जमा कराने के बाद भी भुगतान के रिमाइंडर आते रहे। संबंधित विभाग ने बताया कि भुगतान गलत वेबसाइट पर हो हुआ है, जबकि मोबाइल पर चालान के संबंध में आए मैसेज में दिए लिंक से वेबसाइट खोलकर भुगतान किया था। फिर भी उस भुगतान को नहीं माना और दोबारा चालान जमा कराना पड़ा।
- मुकेश शर्मा, बॉम्बे वालों का बाग, मदरामपुरा, अजमेर रोड

जेडीए अप्रूव्ड कॉलोनी में 25 साल से सड़क, रोड लाइट का इंतजार

कॉलोनी जेडीए अप्रूव्ड होने के बावजूद करीब 25 साल से मूलभूत सुविधाओं का इंतजार है। पूरी कॉलोनी में सड़कें बन चुकी हैं और रोड लाइट भी लग गई है, लेकिन मुख्य सड़क से जुड़े करीब 10 मकानों के सामने अब तक न सड़क बनी है और न ही रोड लाइट लगी है। सड़क निर्माण के लिए कई बार ठेकेदार से संपर्क भी किया, उसका कहना है कि इस हिस्से की सड़क का टेंडर उसे नहीं मिला है।
-मेहुल जाजू, पंचशील कॉलोनी, पुरानी चुंगी, अजमेर रोड

हाईराइज सोसाइटीज की फायर फाइटिंग प्रणाली की हो जांच

झोटवाड़ा, खातीपुरा, सिरसी रोड व भांकरोटा सहित शहर के विभिन्न उपनगरीय क्षेत्रों में स्थित मल्टीस्टोरी रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स की फायर फाइटिंग प्रणाली की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। कई आवासीय सोसाइटीज में आग से बचाव के लिए लगाए गए उपकरण और व्यवस्थाएं लंबे समय से निष्क्रिय हैं। कमियां मिलने पर उन्हें तत्काल दूर कराया जाए।
- सुरेंद्र पारीक, उन्नति निलय, सिरसी रोड

टूटी सड़क की शिकायत की, फिर भी नहीं हुई मरम्मत

पीएचईडी की ओर से करीब एक साल पहले पाइपलाइन के काम के लिए सड़क खोदी गई थी, अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई है। सड़क टूटने से आवागमन में परेशानी हो रही है। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से कई बार पानी की लाइन टूटने से सड़क पर पानी भर जाता है। बार-बार शिकायत के बावजूद सड़क क्यों नहीं ठीक कराई जा रही?
- राजीव खंडेलवाल, त्रिवेणी नगर

पट्टियां रखकर सड़क पर अतिक्रमण

सेक्टर-3 में घर के मुख्य दरवाजे के आगे सरकारी रोड पर कुछ लोगों ने पत्थर की पट्टियां पटक कर अतिक्रमण कर रखा है। इससे घर आने-जाने का रास्ता बंद हो गया है। इसकी शिकायत जेडीए, निगम, मुख्यमंत्री पोर्टल, आवासन मंडल, जनसुनवाई केंद्र, मुख्यमंत्री, कलेक्टर व पुलिस कमिश्नर से कई बार की, फिर भी आज तक अतिक्रमण नहीं हटा।
- त्रिलोक वर्मा, नारायण विहार, प्रताप नगर

रोड पर निर्माण सामग्री डालने से लगता है जाम

क्षेत्र में बन रही बिल्डिंगों के कारण सड़कों पर ही सरिया, रोड़ी व बजरी सहित अन्य निर्माण सामग्री डाल दी जाती है। सड़क की चौड़ाई कम होने से बार-बार जाम लगता है। दोपहिया वाहनों के फिसलने की आशंका के साथ ही एम्बुलेंस एवं अग्निशमन वाहनों के आवागमन में भी बाधा होती है। बुजुर्गों और बच्चों को चलने में भी परेशानी होती है।
- नीरज मित्तल, बापू नगर

11 साल बाद भी सड़क और सीवर लाइन नहीं

वर्ष 2015 में यह कॉलोनी जेडीए अप्रूव्ड हो गई थी। करीब 11 वर्ष बाद भी कॉलोनी में सड़क नहीं बनी है, न ही सीवर लाइन डली है। इस कारण आवागमन में भारी दिक्कत होती है। वहीं सीवर लाइन न होने के कारण गंदगी और जल निकासी की समस्या रहती है। महीने में कई दिनों तक गंदा पानी भी सड़क पर भरा रहता है।
- नरपत सिंह शेखावत, तारानगर ई

पत्रिका मोहल्ला मीटिंग

मूलभूत सुविधाओं की कमी, थाने के पास शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन

शिप्रा पथ स्थित पॉश इलाके में आयोजित मोहल्ला मीटिंग में स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में सीवरेज, दूषित पेयजल, बंद स्ट्रीट लाइट और नशे की समस्या को प्रमुखता से उठाया। सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि इलाके में मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं के साथ-साथ पुलिस स्टेशन के पास शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी चिंता का विषय है। लोगों ने बताया कि क्षेत्र में सीवरेज की समस्या से कई बार दिनचर्या प्रभावित हो जाती है। वहीं, कई बार पीने के पानी में गंदगी आने पर पेयजल की भी परेशानी उठानी पड़ती है। कई जगह स्ट्रीट लाइट बंद होने से रात के समय आवागमन में दिक्कत होती है।

गंदे पानी के लिए जाएं सैंपल

लोगों ने कहा कि मूलभूत सुविधाएं मिलना हमारा हक है। पेयजल में गंदगी आने पर जलदाय विभाग की ओर से लाइनों की जांच कराई जाए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी गंदे पानी के सैंपल लिए जाएं। संबंधित विभागों को इलाके में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए।

घरों में धमाचौकड़ी मचा रहे बंदर, आवारा श्वानों के काटने से बच्चों में दहशत

निर्माण नगर के पार्श्वनाथ नगर क्षेत्र में कॉलोनी में बंदरों और आवारा कुत्तों ने जीना मुहाल कर रखा है। कई बार बंदर घरों में घुस कर सामान ले जाते हैं। आवारा श्वानों के कारण बच्चों-बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। पत्रिका मोहल्ला मीटिंग में कॉलोनी के लोगों ने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान न होने पर निगम और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर रोष जताया। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार बच्चों को कुत्ते काट भी चुके हैं, लेकिन निगम ने इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की है।

महिलाओं ने कहा कि बंदर अक्सर घरों में घुस जाते हैं और तोड़-फोड़ कर देते हैं। उनके हमला करने का भी डर रहता है।

दूसरी ओर, आवारा श्वान झुंड में गलियों में घूमते रहते हैं, जिससे बच्चों को अकेले बाहर भेजने में डर लगता है। इस कारण बच्चे घर के भीतर ही खेलते हैं। वहीं, सुबह-शाम सैर पर जाने वाले बुजुर्गों को भी सावधानी बरतनी पड़ती है।