
हवामहल के सामने जयपुर की यादें कैमरे में कैद करते पर्यटक (फोटो- अनुग्रह सोलोमन)
जयपुर. दिल्ली-एनसीआर में सैलानियों का नया ट्रेंड सामने आया है। जयपुर घूमने के लिए अब लंबी छुट्टी नहीं, दो दिन ही काफी है। शुक्रवार शाम दिल्ली से निकलो, शनिवार-रविवार जयपुर में बिताओ और रविवार रात वापसी। ये बदलता वीकेंड टूरिज्म शहर के पर्यटन कारोबार को नई रफ्तार दे रहा है। जयपुर की दिल्ली से नजदीकी, सड़क-रेल कनेक्टिविटी, विरासत, खान-पान, बाजार और एक ही यात्रा में कई तरह के अनुभव मिलने की सुविधा इसे छोटे ब्रेक के लिए अनुकूल बनाती है।
होटल-रिसोर्ट: शनिवार-रविवार को मांग बढ़ने से कमरे और वीकेंड पैकेज का बाजार मजबूत।
रेस्टोरेंट-फूड: पर्यटक स्थानीय व्यंजनों से लेकर प्रीमियम डाइनिंग तक खर्च करते हैं।
परकोटे के बाजार: कपड़े, आभूषण, हस्तशिल्प, ब्लॉक प्रिंट और स्मृति चिह्न की बिक्री को बढ़ावा मिलता है।
स्थानीय परिवहन: कैब, टैक्सी, ऑटो, ई-रिक्शा और टूर ऑपरेटरों को अतिरिक्त कारोबार।
गाइड व स्थानीय कलाकार: कम अवधि के पर्यटक भी गाइडेड टूर और स्थानीय अनुभवों पर खर्च करते हैं।
| प्रमुख स्थल | 2024 | 2025 |
|---|---|---|
| हवामहल | 14.67 लाख | 18.24 लाख |
| आमेर किला | 16.04 लाख | 18.15 लाख |
| नाहरगढ़ किला | 10.21 लाख | 12.22 लाख |
| जंतर-मंतर | 9.81 लाख | 11.63 लाख |
(राजस्थान सरकार के इकोनॉमिक रिव्यू 2025-26 के आधार पर)
इस नए ट्रेंड का सबसे बड़ा असर यह है कि जयपुर का पर्यटन अब केवल देश-विदेश से आने वाले पारंपरिक सैलानियों तक सीमित नहीं रह गया। दिल्ली-एनसीआर का परिवार, युवा कपल, दोस्तों का ग्रुप और कॉरपोरेट कर्मचारी-सभी के लिए जयपुर दो दिन में पूरा किया जा सकने वाला डेस्टिनेशन बन रहा है।
"दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग दो-तीन दिन के लिए जयपुर आ रहे हैं। पहले पर्यटक लंबी छुट्टियों के हिसाब से यात्रा की योजना बनाते थे, अब वीकेंड को ही घूमने के मौके के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में शहर के गाइड के साथ होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट और स्थानीय बाजारों को भी फायदा मिल रहा है।"
— अरुण त्यागी, अध्यक्ष, राजस्थान टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन
Updated on:
27 Sept 2026 12:19 pm
Published on:
27 Sept 2026 12:19 pm
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