
RCA President Election Inside Story AI PIC
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के आगामी चुनावों ने राज्य के खेल और राजनीतिक गलियारों में अचानक जबरदस्त हलचल मचा दी है। नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन प्रदेश सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) संगठन से जुड़े कई प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों और नेताओं के बेटों की अप्रत्याशित एंट्री ने पूरे चुनावी समीकरण को पूरी तरह से उलझा कर रख दिया है। स्थिति यह बन गई है कि आरसीए की इस प्रतिष्ठित जंग में अब तीन अलग-अलग मजबूत गुट आमने-सामने आ गए हैं, जिससे मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे का हो गया है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली नाम वापसी के दिन पर टिकी हैं, जिसके बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी कि मैदान में अंतिम तौर पर कौन-कौन ताल ठोक रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ राजनेताओं के सुपुत्र हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पुत्र धनंजय सिंह खींवसर, पूर्व चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम सिंह राठौड़, तथा बृजकिशोर उपाध्याय के गुट ने अपने-अपने पैनल के साथ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष पदों के लिए नामांकन दाखिल किए हैं।
इसके अलावा नेता पुत्रों की इस फेहरिस्त में मोहित यादव, पवन दिलावर, आशीष तिवाड़ी और अरिष्ठ सिंघवी जैसे नाम भी जोर-शोर से शामिल हैं। सियासी परिवारों की इस सीधी और अप्रत्यक्ष जोर-आमाइश के बीच सबसे बड़ा और पेचीदा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इनमें से किस पैनल को पर्दे के पीछे सरकार और सत्ता का आधिकारिक समर्थन प्राप्त है।
आरसीए चुनाव की मौजूदा तस्वीर को देखने पर ऐसा लग सकता है कि सब कुछ अचानक हुआ, लेकिन इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प और राजनीतिक उठापटक से भरी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव की घोषणा से पहले विभिन्न दावेदारों और दिग्गजों के बीच आपसी तालमेल बिठाने और एक साझा 'सर्वेसर्वा पैनल' तैयार करने की गंभीर कोशिशें की गई थीं। इस पूरी कवायद में सत्ता और भाजपा संगठन से जुड़े कुछ बड़े नेता भी सक्रिय रूप से शामिल रहे थे। शुरुआत में पराक्रम सिंह राठौड़ के नाम पर एक खेमा पूरी तरह सक्रिय था और एक साझा रणनीति बनाई जा रही थी।
समर्थक सदस्यों को एकजुट करने से लेकर बाड़ाबंदी तक की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई थीं। पराक्रम सिंह और उनके समर्थकों को पूरा भरोसा था कि अध्यक्ष पद पर उन्हें सत्ता का सीधा आशीर्वाद और सहमति हासिल है। लेकिन नामांकन की अंतिम तारीख से ठीक पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले। बृजकिशोर उपाध्याय के पैनल को हरी झंडी मिलने की चर्चाओं ने हवा पकड़ी, जिससे नेता पुत्रों के खेमे में असमंजस फैल गया।
नामांकन दाखिल करने पहुंचे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण चतुर्वेदी ने जब बृजकिशोर उपाध्याय का पैनल पेश किया और खुद मीडिया के सामने यह बयान दिया कि उनके पैनल को सरकार का समर्थन प्राप्त है, तो मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। इसी दौरान मैदान में मौजूद पराक्रम सिंह को फोन कर वापस बुलाया गया, जिससे यह संदेश गया कि वे भी उसी मुख्य धारा के साथ जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं जिसे संगठन का समर्थन हासिल है।
नामांकन प्रक्रिया के बाद अब आरसीए चुनाव में मुख्य रूप से तीन अलग-अलग गुट मैदान में डटे हुए हैं, जिनके बीच टक्कर होनी तय मानी जा रही है:
खींवसर गुट: इस गुट की ओर से अध्यक्ष पद के लिए धनंजय सिंह खींवसर और दीनदयाल कुमावत ने ताल ठोकी है। इनके पैनल में उपाध्यक्ष पद पर मोहित यादव और पवन दिलावर, सचिव पद पर मनोज कुमार शर्मा, तथा सह-सचिव व कोषाध्यक्ष पदों पर अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
राठौड़ गुट: पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम सिंह राठौड़ इस गुट की तरफ से अध्यक्ष पद के मुख्य उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं। इस पैनल में उपाध्यक्ष पद पर रतन सिंह और सचिव पद पर मोहित यादव व आशीष तिवाड़ी को रखा गया है।
बृजकिशोर गुट: सत्ता-संगठन के समर्थन का दावा करने वाले इस गुट से बृजकिशोर उपाध्याय और राजेश सारस्वत अध्यक्ष पद के दावेदार हैं। इस पैनल में सचिव पद की जिम्मेदारी पिंकेश पोरवाल संभाल रहे हैं, जबकि कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी के अन्य पदों पर कई जाने-माने चेहरे शामिल हैं।
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव हमेशा से ही प्रशासनिक और राजनीतिक रसूख का केंद्र रहे हैं। इस बार जिस प्रकार दिग्गजों के बेटे और परिवार के लोग सीधे तौर पर मैदान में उतरे हैं, उससे यह साफ हो गया है कि खेल संघों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए राजनीतिक दल किस हद तक सक्रिय रहते हैं।
सोमवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि मैदान में कितने उम्मीदवार शेष बचते हैं और क्या कोई आपसी सहमति बनती है या फिर मुकाबला अंतिम समय तक रोमांचक बना रहता है। फिलहाल, इन हाई-प्रोफाइल नामांकनों और सियासी जोड़तोड़ ने राजस्थान के खेल प्रेमियों और प्रशासनिक हलकों में पूरी गरमी ला दी है।
Updated on:
27 Sept 2026 11:16 am
Published on:
27 Sept 2026 11:16 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
