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हरियाणा से राजस्थान पहुंच रही सस्ती शराब, पंचायत चुनाव से पहले झुंझुनूं के सीमावर्ती गांवों में क्यों बढ़ा तस्करी का डर?

झुंझुनूं जिले में पंचायतीराज चुनाव से पहले हरियाणा सीमा से सटे गांवों में अवैध शराब की तस्करी की आशंका बढ़ गई है। दोनों राज्यों में कीमतों के अंतर से तस्करों को मुनाफा मिल सकता है। पुलिस ने विशेष नाके लगाकर वाहनों की जांच और निगरानी बढ़ाई है।
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jhunjhunu haryana border illegal liquor

हरियाणा व राजस्थान की सीमा पर शराब ठेका (पत्रिका फोटो)

बुहाना (झुंझुनूं): पंचायतीराज चुनाव की सरगर्मियों के बीच हरियाणा सीमा से सटे झुंझुनूं जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब की तस्करी की आशंका बढ़ गई है। राजस्थान और हरियाणा में आबकारी शुल्क तथा शराब की कीमतों में अंतर का फायदा तस्कर उठा सकते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में हरियाणा से सस्ती शराब लाकर राजस्थान के गांवों तक पहुंचाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। वहीं, पुलिस और आबकारी विभाग अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी और कार्रवाई का दावा कर रहे हैं।

सीमावर्ती गांव-ढाणियां संवेदनशील

झुंझुनूं जिले का हरियाणा सीमा से सटा करीब 70 किलोमीटर का क्षेत्र तस्करी की आशंका के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। मुख्य मार्गों पर पुलिस चौकियों और नाकों के बावजूद कच्चे रास्तों पर निगरानी रखना चुनौतीपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर पुरानी पिकअप, वैन और अन्य छोटे वाहनों के जरिए शराब की खेप गांवों तक पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है।

कीमतों का अंतर तस्करों के लिए मुनाफे का जरिया

राजस्थान और हरियाणा की आबकारी नीतियों में अंतर के कारण शराब की कीमतों में भी फर्क रहता है। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, कुछ ब्रांड की अंग्रेजी शराब हरियाणा में राजस्थान के मुकाबले 200 से 500 रुपए तक सस्ती मिल सकती है। देसी शराब की कीमतों में भी अंतर बताया जा रहा है। इस अंतर का फायदा उठाकर अवैध रूप से शराब लाने और बेचने पर तस्करों को मुनाफा मिल सकता है। चुनाव के दौरान शराब की मांग बढ़ने की आशंका के चलते सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सख्त करने की जरूरत है।

वैध ठेकेदारों और राजस्व पर असर

अवैध शराब की बिक्री से राजस्थान के लाइसेंसधारी ठेका संचालकों को नुकसान होने की आशंका रहती है। साथ ही, राज्य सरकार को आबकारी राजस्व की हानि हो सकती है। अवैध शराब की आपूर्ति पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय जरूरी है। सीमावर्ती रास्तों पर निगरानी, संदिग्ध वाहनों की जांच और अवैध बिक्री के ठिकानों पर कार्रवाई से इस पर अंकुश लगाया जा सकता है।

विशेष नाके लगाकर की जा रही जांच

चुनाव के मद्देनजर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस चौकियों के अलावा विशेष नाके स्थापित किए गए हैं। अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और वाहनों की सघन जांच की जा रही है। पुलिस चौकसी को लेकर पूरी तरह सख्त है।
-लक्ष्मीनारायण, थाना प्रभारी, पचेरीकलां

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