
कानपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र में करोड़ों की सरकारी नजूल जमीन को नियमों को दरकिनार कर निजी बिल्डर को बेचने का मामला सामने आया है। जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सख्त कार्रवाई करते हुए जमीन पर सरकारी पुनर्प्रवेश (री-एंट्री) का आदेश जारी कर दिया। करीब 24 करोड़ 77 लाख रुपये कीमत वाली यह जमीन अब दोबारा सरकारी खाते में दर्ज कर ली जाएगी।
बेशकीमती जमीन का अवैध सौदा उजागर -
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि सिविल लाइंस स्थित नजूल ब्लॉक 14 के प्लॉट संख्या 3 (भूखंड संख्या 14/59ए) को नियमों के विपरीत निजी बिल्डर के पक्ष में बेच दिया गया था। यह जमीन मूल रूप से वर्ष 1982 में के.सी. बेरी, तरंग बेरी, नीरज बेरी और विकास बेरी के नाम भवन निर्माण प्रयोजन के लिए पट्टे पर आवंटित की गई थी। नजूल मैनुअल के अनुसार ऐसे पट्टों की अवधि सीमित होती है और समय-समय पर उसका नवीनीकरण कराना जरूरी होता है। लेकिन जांच में पाया गया कि संबंधित पट्टाधारकों ने वर्षों तक न तो लीज रेंट जमा किया और न ही पट्टे का नवीनीकरण कराया।
बिना अनुमति बिल्डर को बेच दी जमीन -
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सीता बेरी के उत्तराधिकारियों ने वर्ष 2012 में एसए बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में विक्रय पत्र निष्पादित कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि विक्रय पत्र में जमीन को फ्रीहोल्ड बताया गया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में इसे फ्रीहोल्ड करने का कोई प्रमाण नहीं मिला। सबसे अहम बात यह रही कि जमीन की बिक्री से पहले कलेक्टर की अनुमति भी नहीं ली गई, जो नजूल संपत्तियों के हस्तांतरण के लिए अनिवार्य होती है।
डीएम ने दिया सरकारी पुनर्प्रवेश का आदेश -
मामले का खुलासा उपजिलाधिकारी सदर, सहायक प्रभारी अधिकारी नजूल और तहसीलदार सदर की संयुक्त जांच में हुआ। रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने नजूल मैनुअल के प्रावधानों के तहत भूखंड पर सरकारी पुनर्प्रवेश का आदेश जारी कर दिया। आदेश के अनुसार लगभग 24.77 करोड़ रुपये कीमत वाली यह जमीन अब फिर से अनावंटित सरकारी भूमि के रूप में दर्ज होगी। इसके रखरखाव और नियंत्रण की जिम्मेदारी सहायक प्रभारी अधिकारी नजूल और तहसीलदार सदर को संयुक्त रूप से सौंपी गई है।
Published on:
06 Mar 2026 08:06 pm
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