
Koria News, छात्रावास के छत और किचन की हालत (Photo- Patrika)
बचरापोंड़ी। एमसीबी जिले के ग्राम पोंड़ी स्थित प्री मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास (Girls Hostel) भवन जर्जर हो गया है। इससे यहां रह रही 6वीं से 10वीं तक की 67 छात्राओं पर हर पल जान का खतरा मंडरा रहा है। किचन के छत का प्लास्टर आए दिन गिरता रहता है, ऐसे में बरामदे में खाना बनाना पड़ता है। बिजली व्यवस्था भी चौपट हालत में है। छात्राओं का कहना है कि जब वे पंखा चालू करती हैं तो तारों से चिंगारियां निकलती हैं। इस वजह से उन्हें पंखे बंद रखने पड़ते हैं। इधर छात्रावास अधीक्षिका कहना है कि वह विभाग को कई बार पत्र लिख चुकी है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पोड़ी स्थित प्री मैट्रिक कन्या छात्रावास की हालत जर्जर है। बारिश का पानी छत से टपक रहा है। किचन की छत का प्लास्टर आए दिन गिरते रहता है। वहीं शॉर्ट सर्किट से हादसे का खतरा (Danger of incident) बना हुआ है। बावजूद आदिवासी विकास विभाग उदासीन रवैया अपनाया हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अमला भले ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
यहां रह रही छात्राओं की जान हर पल जोखिम में है। छात्रावास के किचन रूम की छत से लगातार पानी टपक रहा है। दीवारों और छत का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ कर गिर रहा है। स्थिति यह है कि रसोई में खाना बनाना संभव नहीं है, जिससे छात्राओं के लिए बरामदे में अस्थायी चूल्हे पर भोजन बनाया जा रहा है।
बारिश में बरामदे में भी पानी भर जाता है। छात्रावास के कमरों में लगे पंखे और लाइट में शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) हो रहा है। छात्राओं ने बताया कि पंखा चालू करते ही चिंगारी निकलती है। रात में डर के कारण पंखे बंद रखने पड़ते हैं। उमस गर्मी में बिना पंखे के छात्राओं का बुरा हाल है।
छात्रावास अधीक्षिका ने बताया कि आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर भवन की मरम्मत और बिजली सुधार की मांग कर चुकी हं। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं पीने के पानी की भी समस्या (Drinking water problem) है। जिस बोर से पानी आता रहा है, वह बोर खराब गया है। एक बोर आवासीय परिसर में है, जो बमुश्किल 10 मिनट ही चलता है, फिर बंद हो जाता है। बच्चों के नित्य क्रिया के लिए टैंकर से पानी मंगवा कर काम चलाते हैं।
फिलहाल पीने के पानी के लिए परिसर के बाहर लगे हैण्डपम्प से पानी लाना पड़ता है। जबकि परिसर के बगल में ओवरहेड टंकी लगभग 15 साल पहले से बनकर खड़ी है। लेकिन ओवरहेड टंकी में आज तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा है। फिलहाल ओवरहेड टंकी भी जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों-अभिभावकों ने जिला प्रशासन, आदिम जाति कल्याण विभाग से छात्रावास का निरीक्षण करा मरम्मत कराने गुहार लगाई है।
Updated on:
29 Sept 2026 04:01 pm
Published on:
29 Sept 2026 04:01 pm
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