रीप के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 13 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में तो एक भी प्रवेश नहीं लिया है। इन कॉलेजों की करीब 4 हजार सीटें खाली है। वहीं 6 एेसे कॉलेज हैं, जिनमें प्रवेश का आंकड़ा दहाई तक भी नहीं पहुंचा है। जबकि पिछले दो सालों में खुले 4 इंजीनियरिंग बारां, बांसवाड़ा, धौलपुर और करौली की ओर तो 5 फीसदी स्टूडेंट्स का ही रुझान दिखा है। इन कॉलेजों की 1134 सीटों में से केवल 56 पर ही दाखिले हुए हैं। इन हालातों में 60 कॉलेजों पर बंदी की तलवार लटकने लगी है।