मां बेटे से बात करने के लिए तड़प रही थी। कई बार फोन लगाया, लेकिन हर बार घंटी गई मगर किसी ने फोन नहीं उठाया। मां को किसी अनहोनी की आशंका हुई तो उसने बेटे के हॉस्टल में रहने वाले दूसरे बच्चों को फोन कर उसे तलाशने के लिए भेजा। बच्चों ने जब उसके कमरे में झांक कर देखा तो चीख पड़े। मां जिस कलेजे के टुकड़े से बात करने के लिए तड़प रही थी, वह हॉस्टल के अपने कमरे में फांसी के फंदे पर झूल रहा था।