
कोटा प्रसूता कांड। फोटो: पत्रिका
कोटा। गंभीर और संवेदनशील प्रकरणों में एक बार तत्काल सख्त कार्रवाई कर सब 'शांत' करो, फिर मामला रफा-दफा कर दो…। जानलेवा लापरवाही के मामलों में सरकारी रवैये को समझना हो तो कोटा का प्रसूता प्रकरण बेहतर उदाहरण है। कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में प्रसव के बाद पांच महिलाओं की मौत और सात महिलाओं की किडनी फेल्योर के मामले में निलंबित तीन वरिष्ठ चिकित्सकों की बहाली के बाद यह प्रकरण फिर सुर्खियों में है।
इसी साल मई में प्रसूताओं की मौत के बाद राजस्थान सरकार ने तीन वरिष्ठ चिकित्सक-गायनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खुशबू मीणा और सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार को निलंबित किया था। अब पांच महीने बाद कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली की चार जांच कमेटियों की रिपोर्ट पर तीनों डॉक्टरों को चिकित्सकीय लापरवाही से मुक्त करते हुए बहाल किया गया है। उस समय जांच में उपचार और मेडिकल प्रोटोकॉल के पालन में गंभीर चूक सामने आई थी। अब कमेटियों की रिपोर्ट के बाद इन्हें क्लीन चिट मिलने से मई में हुई कार्रवाई के आधार और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे है।
10 मई को प्रदेश कांग्रेस की ओर से पूर्व चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा के नेतृत्व में टीम कोटा पहुंची थी। टीम ने डॉक्टरों की गंभीर और जानलेवा लापरवाही की बात कही थी।
-प्रसूताओं को अधिक मात्रा में फ्लूड और एंटीबायोटिक दिए गए।
-पोस्ट गायनी वार्ड और ओटी की दीवारों पर सीलन-फंगस मिली।
-कल्चर सैंपल लेने से पहले ही फ्यूमिगेशन करने का आरोप लगा।
-वार्ड-ओटी के कल्चर सैपल दो बार फेल। 11 मई को प्रसूता पिंकी की तबीयत बिगड़ने पर वेंटिलेटर एंबूलेंस नहीं मिली।
-17 मई को गायनी वार्ड में गंदगी और फंगस मिली।
-26 मई को ड्रग विभाग की जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन अमानक पाया गया।
नए अस्पताल से नौ मेडिकल डिवाइस के सैंपल जांच के लिए एयर कार्गो के जरिए कोलकाता स्थित प्रयोगशाला भेजे गए थे। इनकी रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
बहाली के पीछे एक कारण मेडिकल कॉलेज में बन रहे मदर एंड चाइल्ड अस्पताल को भी बताया जा रहा है। इस परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ. बीएल पाटीदार है। उनके निलंबन के चलते निर्माण कार्य, उपकरणों की खरीद और अन्य प्रक्रियाओं में दिक्कतें आ रही थीं।
8 मईः महिला चिकित्सक बर्खास्त:— सर्जरी विभाग के डॉ. नवनीत कुमार सहित नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया। वार्ड प्रभारी डॉ. बीएल पाटीदार और डॉ. नेहा सिहरा को नोटिस जारी। यूटीबी पर कार्यरत डॉ. श्रद्धा को सेवा से हटा दिया।
9 मईः जांच में मिली गैरमौजूदगी:— चिकित्सा आयुक्त बीएल गोयल के मेडिकल कॉलेज कोटा दौरे के बाद प्रारंभिक जांच में पोस्ट गायनी वार्ड में सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति और रेजीडेंट डॉक्टरों के भरोसे उपचार चलने की बात सामने आई थी।
11 मईः मानी प्रोटोकॉल में चूक:— चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने माना था कि प्रारंभिक जांच में ऑपरेशन थिएटर में प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन नहीं होने की बात सामने आई है। इलाज और पर्यवेक्षण में लापरवाही पर डॉ. बीएल पाटीदार और डॉ. खुशबू मीणा को निलंबित किया गया। नर्सिंग अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई। जिम्मेदारी को लेकर नए अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा और जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा को नोटिस जारी किए गए।
मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में किडनी फेलियर के बाद उपचार करा रहीं पांच प्रसूताओं ने सरकार से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जल्द किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मांग की है। रागिनी मीना, आरती, धन्नी, पिंकी और सुशीला ने सवाल उठाया कि जब दवाओं और इलाज में लापरवाही नहीं मानी गई तो उनकी किडनी फेल होने का कारण क्या है? प्रसूताओं ने कहा कि लगातार डायलिसिस के कारण शारीरिक और मानसिक पीड़ा बढ़ रही है। किसी को मानसिक परेशानी है तो किसी की आंखों की रोशनी कुछ घंटों के लिए चली जाती है। उन्होंने एफएसएल और जांच कमेटियों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा ट्रांसप्लांट की तारीख जल्द बताने की मांग की।
Updated on:
05 Oct 2026 08:10 am
Published on:
05 Oct 2026 08:10 am
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