
Dry Brushing क्या होता है? (Representative Image) Image Credit Magnific
Skin Exfoliation: स्किन केयर से जुड़े नए नए तरीके आए दिन सोशल मीडिया पर देखने को मिलते हैं। इन्हीं में से एक ड्राय ब्रशिंग (Dry Brushing) भी है। इसमें सूखी त्वचा पर ब्रश की मदद से एक्सफोलिएशन किया जाता है, जिससे त्वचा की ऊपरी परत पर मौजूद डेड स्किन सेल्स हटाने में मदद मिल सकती है। इससे त्वचा कुछ समय के लिए ज्यादा मुलायम और चमकदार दिखाई दे सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं ड्राय ब्रशिंग क्या है, इसे करने का सही तरीका क्या है और इसे करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ड्राय ब्रशिंग में सूखी त्वचा पर ब्रश का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक तरह का मैकेनिकल एक्सफोलिएशन है, जिसमें ब्रश की मदद से त्वचा की ऊपरी सतह से डेड स्किन सेल्स हटाए जाते हैं। इससे त्वचा ज्यादा मुलायम और स्मूद महसूस हो सकती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ड्राय ब्रशिंग से रूखी और डेड स्किन को हटाने में मदद मिल सकती है। इससे त्वचा कुछ समय के लिए ज्यादा मुलायम और चमकदार दिखाई दे सकती है। ब्रश करने से त्वचा में ब्लड फ्लो बढ़ने के कारण भी त्वचा थोड़ी देर के लिए ज्यादा निखरी हुई दिखाई दे सकती है।
ड्राय ब्रशिंग को लेकर अक्सर दावा किया जाता है कि इससे सेल्युलाइट कम हो सकता है, लेकिन क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार इससे जुड़े वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं। ब्रश करने के बाद त्वचा कुछ समय के लिए ज्यादा भरी हुई दिखाई दे सकती है, लेकिन इसे सेल्युलाइट कम होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ड्राय ब्रशिंग की शुरुआत पैरों या टखनों से की जा सकती है। हाथ और पैरों पर ब्रश को लंबे और हल्के स्ट्रोक में चलाएं। इसके बाद पेट और पीठ पर हल्के हाथों से गोलाकार तरीके से ब्रश किया जा सकता है। पेट, सीने और गर्दन जैसे संवेदनशील हिस्सों पर दबाव हल्का रखें। एक ही जगह पर बार बार या ज्यादा देर तक ब्रश करने से त्वचा में जलन या खून आने की समस्या हो सकती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ड्राय ब्रशिंग नहाने से ठीक पहले करना बेहतर होता है। इसके बाद नहाकर त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगाना चाहिए, ताकि एक्सफोलिएशन के बाद त्वचा में नमी बनी रहे।
अगर त्वचा बहुत संवेदनशील है तो ड्राय ब्रशिंग करते समय सावधानी रखनी चाहिए। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, कट, खरोंच, घाव, सनबर्न, संक्रमण, लाल या पहले से इरिटेटेड त्वचा पर ड्राय ब्रशिंग नहीं करनी चाहिए। तिल, मस्से या त्वचा पर उभरे हुए हिस्सों पर भी ब्रश नहीं करना चाहिए। चेहरे की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होती है, इसलिए वहां ड्राय ब्रशिंग से बचना बेहतर है। अगर ब्रश करने के दौरान त्वचा लाल हो जाए, सूजन आए या जलन होने लगे तो तुरंत रोक देना चाहिए।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (American Academy of Dermatology) के अनुसार, हर तरह की त्वचा के लिए एक्सफोलिएशन का तरीका एक जैसा नहीं होना चाहिए। रूखी, संवेदनशील या मुंहासों वाली त्वचा पर मैकेनिकल एक्सफोलिएशन ज्यादा जलन पैदा कर सकता है। इसलिए त्वचा के प्रकार के हिसाब से एक्सफोलिएशन का तरीका चुनना जरूरी है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (American Academy of Dermatology) के अनुसार, एक्सफोलिएशन के बाद त्वचा रूखी हो सकती है। इसलिए इसके बाद मॉइस्चराइजर लगाना चाहिए। एक्सफोलिएशन कितनी बार करना है, यह आपकी त्वचा के प्रकार और इस्तेमाल किए जा रहे तरीके पर निर्भर करता है। जरूरत से ज्यादा एक्सफोलिएशन करने से त्वचा लाल और इरिटेटेड हो सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
06 Oct 2026 12:56 pm
Published on:
06 Oct 2026 12:56 pm
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