
रकारी विद्यालय का प्रतीकात्मक दृश्य, स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर सख्ती की तैयारी (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Government Schools: सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और उनकी निजता को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग की ओर से जारी बताए जा रहे नए निर्देशों के मुताबिक अब सरकारी विद्यालयों में बिना अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश आसान नहीं होगा। अभिभावक, मीडिया प्रतिनिधि या अन्य बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश से पहले संबंधित स्तर से अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही बच्चों की फोटो और वीडियो बनाए जाने को लेकर भी सख्त नियम लागू किए जाने की बात सामने आई है। इन कदमों के पीछे विभाग का तर्क बच्चों की सुरक्षा, उनकी पहचान और निजता की रक्षा करना बताया जा रहा है।
सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। इन वीडियो में स्कूलों की साफ-सफाई, मिड-डे मील और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति को लेकर दावे किए गए। वीडियो सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल बढ़ी और स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों की आवाजाही तथा बच्चों की तस्वीरें और वीडियो बनाए जाने को लेकर सख्ती की जरूरत महसूस की गई।
विभाग का मानना है कि विद्यालय परिसर में बच्चों की फोटो या वीडियो बिना अनुमति बनाए जाने से उनकी निजता प्रभावित हो सकती है। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो के प्रसार से बच्चों की पहचान सार्वजनिक होने का खतरा भी रहता है। इसी आधार पर स्कूल परिसरों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
नई व्यवस्था के तहत अभिभावकों और अन्य बाहरी लोगों के लिए स्कूल में प्रवेश को लेकर नियम सख्त किए जाने की बात सामने आई है। सामान्य तौर पर विद्यालय में किसी काम से आने वाले व्यक्ति को भी पहले अनुमति लेनी होगी। स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है कि बिना वैध कारण और अनुमति के कोई बाहरी व्यक्ति परिसर में प्रवेश न करे।
हालांकि इस व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षा बताया जा रहा है, लेकिन इससे अभिभावकों के लिए भी स्कूल से जुड़ी अपनी समस्याओं को लेकर सीधे परिसर में पहुंचना पहले की तुलना में अधिक औपचारिक हो सकता है। वहीं मीडिया के लिए भी स्कूलों की जमीनी स्थिति की रिपोर्टिंग करने से पहले अनुमति लेना आवश्यक होगा।
विद्यालयों में बच्चों की फोटो और वीडियो बनाने को लेकर भी सख्ती की जा रही है। विभाग का तर्क है कि बच्चों की पहचान, चेहरा और निजी जानकारी सार्वजनिक होने से उनकी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सोशल मीडिया के दौर में किसी बच्चे की तस्वीर या वीडियो कुछ ही समय में बड़े स्तर पर प्रसारित हो सकता है। ऐसे में स्कूल परिसर में कैमरे के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की आवश्यकता बताई गई है।
हालांकि किसी भी प्रतिबंध के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पत्रकारिता, विभागीय निरीक्षण, शैक्षणिक गतिविधियों और अभिभावकों की वास्तविक शिकायतों के दस्तावेजीकरण के लिए स्पष्ट और पारदर्शी अनुमति व्यवस्था हो। इससे सुरक्षा और जवाबदेही दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा।
शिक्षा विभाग की ओर से इस पूरी कवायद का मुख्य आधार बाल सुरक्षा और प्राइवेसी बताया जा रहा है। विद्यालय बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान हों और उनकी व्यक्तिगत जानकारी अनधिकृत लोगों तक न पहुंचे, इसके लिए नियमों को कड़ा किया जाना स्वाभाविक है। लेकिन इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्कूल प्रशासन और अभिभावकों के बीच स्पष्ट संवाद भी जरूरी होगा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि किस तरह की स्थिति में प्रवेश की अनुमति मिलेगी और शिकायत या जरूरी काम के लिए किस अधिकारी से संपर्क किया जा सकेगा।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ विद्यालयों की व्यवस्थाओं की निगरानी और जवाबदेही भी बनी रहनी जरूरी है। यदि स्कूल में भोजन, साफ-सफाई, शिक्षकों की उपलब्धता या किसी अन्य सुविधा को लेकर शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच के लिए अभिभावकों और संबंधित अधिकारियों के बीच प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
जरूरी सूचना : अभी तक शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग की तरफ से लिखित सूचना नहीं प्राप्त हुई है। लगातार खबर अपडेट हो रही हैं।
Updated on:
17 Aug 2026 02:58 pm
Published on:
17 Aug 2026 02:53 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
