
बारिश के बीच दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करतीं जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राएं (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Jaiprakash Narayan Sarvodaya Student Protest: शिक्षकों की कमी और पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए जेन-अल्फा की छात्राएं सोमवार सुबह एक बार फिर सड़क पर उतर आईं। लखनऊ के मोहान रोड स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की करीब 250 छात्राएं सुबह सात बजे बारिश के बीच दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर पहुंचीं और सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। छात्राओं के अचानक प्रदर्शन से बाईपास के चारों तरफ यातायात व्यवस्था चरमरा गई और करीब दो से तीन किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। छात्राएं मौके पर जिलाधिकारी को बुलाने और अपनी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने की मांग पर अड़ी रहीं।
छात्राओं के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। चार थानों और पुलिस चौकियों से अतिरिक्त बल मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को समझाने और यातायात व्यवस्था सामान्य कराने का प्रयास किया, लेकिन करीब दो घंटे तक बातचीत के बावजूद छात्राएं अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हुईं। इसके बाद जब उन्हें मौके पर डीएम के आने का भरोसा नहीं मिला तो छात्राएं हजरतगंज स्थित जिलाधिकारी आवास की ओर जाने के लिए सड़क पर दौड़ पड़ीं।
सोमवार की सुबह जब अधिकांश लोग अपने रोजमर्रा के काम के लिए घरों से निकल रहे थे, उसी समय करीब 250 छात्राओं का समूह दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर पहुंच गया। बारिश के बीच छात्राओं ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते बाईपास के चारों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। व्यस्त मार्ग पर अचानक यातायात रुकने से वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना था कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विशेषकर बोर्ड कक्षाओं की छात्राओं को पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा की तैयारी को लेकर चिंता है। छात्राएं चाहती थीं कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुने और शिक्षकों की कमी समेत विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त करे।
जाम और छात्राओं के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में सक्रियता बढ़ गई। चार थानों और चौकियों से पुलिस बल मौके पर भेजा गया। पुलिसकर्मियों ने छात्राओं से बातचीत शुरू की और उन्हें सड़क से हटकर अपनी बात रखने के लिए समझाया। अधिकारियों ने छात्राओं को उनकी समस्याओं को संबंधित विभाग तक पहुंचाने का भरोसा भी दिलाया।
करीब दो घंटे तक पुलिस और छात्राओं के बीच बातचीत चलती रही, लेकिन छात्राएं जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ी रहीं। उनका कहना था कि इससे पहले भी उन्हें आश्वासन मिले हैं, लेकिन विद्यालय की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए इस बार वे किसी अधिकारी से सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई चाहती हैं।
जब छात्राओं की मांग पूरी नहीं हुई तो अचानक उन्होंने हजरतगंज स्थित डीएम आवास की ओर जाने का फैसला किया। बड़ी संख्या में छात्राएं सड़क पर दौड़ने लगीं। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और उनके पीछे-पीछे दौड़ते हुए यातायात को नियंत्रित करने की कोशिश की।
लखनऊ-हरदोई हाईवे पर छात्राओं के दौड़ने से पुलिस के सामने सुरक्षा और यातायात दोनों संभालने की चुनौती खड़ी हो गई। छात्राएं करीब आठ किलोमीटर दूर बालागंज चौराहे तक पहुंच गईं। इस दौरान पुलिस लगातार उनके साथ रही और उन्हें सुरक्षित तरीके से रोकने तथा समझाने का प्रयास करती रही।
बालागंज चौराहे पर पहुंचने के बाद एसीपी काकोरी शकील अहमद और एडीसीपी धनंजय ने छात्राओं को रोक लिया। दोनों अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए यह समझने का प्रयास किया कि आखिर वे किन समस्याओं को लेकर इतनी दूर तक सड़क पर निकल आईं। अधिकारियों ने छात्राओं के सामने ही समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से फोन पर बातचीत की और उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। छात्राओं को बताया गया कि विभागीय अधिकारी विद्यालय पहुंचकर उनसे सीधे बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे।
एसीपी काकोरी ने छात्राओं को बताया कि समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से बातचीत हो गई है। उन्होंने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान सोमवार को ही करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद छात्राओं का गुस्सा कुछ शांत हुआ और उन्होंने वापस विद्यालय लौटने पर सहमति जताई। इसके बाद छात्राओं को सुरक्षित तरीके से वापस विद्यालय ले जाया गया। स्कूल पहुंचने के बाद छात्राओं को परिसर के अंदर कर गेट बंद कर दिया गया। विद्यालय के बाहर भी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि दोबारा कोई अप्रिय स्थिति न बने और विद्यालय में व्यवस्था सामान्य रखी जा सके।
छात्राओं के आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी विद्यालय पहुंच गए। छात्राओं से बातचीत करने के लिए विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव, सचिव एवं निदेशक संजीव सिंह तथा सरोजनीनगर एसडीएम अभिषेक कुमार सिंह विद्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने छात्राओं की समस्याएं सीधे सुनने और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करने का प्रयास शुरू किया।
वरिष्ठ अधिकारियों के विद्यालय पहुंचने के बाद छात्राओं को उम्मीद जगी कि लंबे समय से बताई जा रही समस्याओं पर अब ठोस कार्रवाई हो सकती है। छात्राओं की ओर से शिक्षकों की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया गया है। इसके अलावा विद्यालय मेंपढ़ाई, भोजन, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।
जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय में छात्राओं की नाराजगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विद्यालय में शिक्षकों और सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध सामने आया था। छात्रों और छात्राओं की ओर से बार-बार उठाई जा रही समस्याओं के कारण विद्यालय की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हुए हैं। विद्यालय कक्षा छह से 12 तक की छात्राओं के लिए संचालित होता है और इसका संचालन समाज कल्याण विभाग करता है। ऐसे में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता और छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बोर्ड कक्षाओं में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता विशेष रूप से जरूरी है।
प्रदर्शन कर रही छात्राओं की सबसे बड़ी चिंता उनकी पढ़ाई को लेकर दिखाई दी। उनका कहना है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर कक्षाओं पर पड़ रहा है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही छात्राओं को डर है कि यदि समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ तो परीक्षा परिणाम प्रभावित हो सकता है।
छात्राओं का कहना है कि वे विद्यालय की समस्याओं को लेकर पहले भी अपनी बात रख चुकी हैं। जब अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। बारिश के बीच इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं का प्रदर्शन और फिर करीब आठ किलोमीटर तक अधिकारियों के पीछे-पीछे दौड़ना उनके आक्रोश की गंभीरता को दिखाता है।
करीब दो घंटे के सड़क प्रदर्शन, लंबा जाम और फिर छात्राओं के आठ किलोमीटर तक आगे बढ़ने के बाद आखिरकार प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी विद्यालय पहुंच गए हैं। अब छात्राओं की निगाह इस बात पर टिकी है कि अधिकारियों की ओर से किए गए आश्वासन कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं।
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Updated on:
17 Aug 2026 02:52 pm
Published on:
17 Aug 2026 02:51 pm
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