
राजस्व, पंचायती राज, रक्षा सेवाओं और अन्य विभागों का अनुभव रखने वाले नवनियुक्त मंडी सचिवों से बेहतर प्रबंधन की उम्मीद। (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Uttar Pradesh Mandi Parishad: उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों में प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और किसान केंद्रित बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है। प्रदेश की मंडियों को अब ऐसे अधिकारी मिलेंगे, जिनमें राजस्व, वित्त, पंचायती राज, पुलिस, रेलवे, बैंकिंग और रक्षा सेवाओं का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की ओर से नवनियुक्त मंडी सचिवों का 45 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को लखनऊ स्थित आईआईसीएमआरटी में शुरू हुआ। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य नवचयनित सचिवों को मंडी प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, कृषि विपणन और डिजिटल व्यवस्थाओं की व्यावहारिक जानकारी देकर किसानों के हितों के अनुरूप कार्य करने के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षण के दौरान सचिवों को देश के विभिन्न राज्यों की प्रमुख मंडियों और आधुनिक कृषि विपणन केंद्रों का अध्ययन भ्रमण भी कराया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रमुख सचिव कृषि डॉ. एम.के.एस. सुंदरम ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। इन प्रयासों को जमीनी स्तर पर लागू करने में मंडी सचिवों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करें।
उन्होंने कहा कि कृषि मंडियां किसानों और व्यापारियों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मंडियों की व्यवस्था बेहतर होने से कृषि उपज की खरीद-बिक्री, मूल्य निर्धारण, भंडारण और परिवहन जैसी गतिविधियों को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलती है। ऐसे में मंडी सचिवों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों को मंडियों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ मिले और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की ओर से आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में नवनियुक्त सचिवों को मंडी प्रशासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। भारत सरकार के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (डीएमआई) के विशेषज्ञों के सहयोग से संचालित प्रशिक्षण में मंडी अधिनियम, वित्तीय प्रबंधन, ई-नाम और अन्य डिजिटल व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी देने के साथ व्यावहारिक परिस्थितियों से निपटने के तरीके भी सिखाए जाएंगे। केस स्टडी और कार्ययोजनाओं के माध्यम से उन्हें मंडियों में आने वाली प्रशासनिक चुनौतियों को समझने का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना और उन्हें आधुनिक कृषि विपणन की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अखिल भारतीय अध्ययन भ्रमण होगा। इसके अंतर्गत नवनियुक्त मंडी सचिव देश के विभिन्न राज्यों की प्रमुख मंडियों और आधुनिक कृषि विपणन केंद्रों का दौरा करेंगे। वहां वे कृषि उपज की आवक, नीलामी और मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया का अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही किसानों और व्यापारियों को उपलब्ध सुविधाओं, उपज की ग्रेडिंग, भंडारण, परिवहन और डिजिटल विपणन की व्यवस्थाओं को भी समझेंगे।
अलग-अलग राज्यों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का अध्ययन करने से अधिकारियों को कृषि विपणन के विभिन्न मॉडलों की जानकारी मिलेगी। इसके आधार पर प्रदेश की मंडियों में उपयोगी प्रक्रियाओं को लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकेगा। मंडी परिषद का मानना है कि व्यावहारिक अनुभव और आधुनिक तकनीक की समझ से मंडियों के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
नवनियुक्त मंडी सचिवों के कैडर में विभिन्न विभागों का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों की अच्छी भागीदारी है। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कार्यभार ग्रहण कर चुके 116 मंडी सचिवों में 59 को पहले अन्य विभागों में काम करने का अनुभव है। यह संख्या कुल कार्यभार ग्रहण करने वालों की लगभग 51 प्रतिशत है।
विभागवार विवरण के अनुसार, सर्वाधिक 23 सचिव राजस्व विभाग में सेवाएं दे चुके हैं। वित्त, लेखा, कर और सहकारिता क्षेत्र से सात सचिव आए हैं, जबकि पंचायती राज और जिला न्यायालय से छह-छह अभ्यर्थियों को पूर्व सेवा का अनुभव है। रक्षा सेवाओं से पांच, रेलवे और पुलिस से तीन-तीन तथा बैंकिंग और वन विभाग से दो-दो सचिव शामिल हैं। शेष दो सचिव अन्य विभागों से संबंधित हैं। विभिन्न विभागों में कार्य करने के दौरान प्राप्त प्रशासनिक अनुभव, नियमों की समझ और जनता से जुड़े मामलों के निस्तारण की जानकारी मंडी प्रबंधन में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, मंडियों की आवश्यकताओं के अनुरूप इन अधिकारियों को प्रशिक्षित करना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि वे कृषि विपणन से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
नवनियुक्त मंडी सचिवों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी विविध है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कुल 126 चयनित अभ्यर्थियों में 84 विज्ञान स्नातक हैं, जबकि 42 अभ्यर्थियों ने अन्य विषयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। चयनितों में परास्नातक, बीएड, डीएलएड और अन्य अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यताएं रखने वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं। इसके अलावा रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस में पीजी डिप्लोमा और सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा जैसी तकनीकी योग्यताएं रखने वाले युवा भी इस कैडर का हिस्सा हैं। कुल 126 चयनित अभ्यर्थियों में से अब तक 116 मंडी सचिवों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इस तरह नए कैडर में शैक्षणिक विविधता के साथ अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव भी देखने को मिल रहा है।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
मंडी परिषद में भर्ती प्रक्रिया में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए विभागीय जानकारी में बताया गया है कि पहले मंडी परिषद एवं मंडी समितियों में भर्ती परिषद स्तर पर सेवा विनियमावली के तहत की जाती थी। वर्तमान व्यवस्था में उच्च श्रेणी के मंडी सचिवों की भर्ती उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है, जबकि इस बार चयनित मंडी सचिवों का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की प्रतिस्पर्धी परीक्षा के जरिए किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को निर्धारित नियमों और योग्यता के आधार पर संचालित करना है, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। चयन के बाद शुरू किया गया 45 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नए अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों से परिचित कराने और प्रशासनिक दक्षता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रदेश की कृषि मंडियों में पारदर्शिता, डिजिटल प्रबंधन और बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नवनियुक्त मंडी सचिवों के सामने मंडी प्रशासन को सुचारू रखने, नियमों का पालन कराने और किसानों तथा व्यापारियों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी होगी। प्रशिक्षण के दौरान हासिल ज्ञान और अध्ययन भ्रमण से प्राप्त अनुभव का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा, जब उसे मंडियों के दैनिक संचालन में प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए अधिकारी अपने अनुभव और प्रशिक्षण के आधार पर मंडियों की कार्यप्रणाली में किस तरह सुधार लाते हैं और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में कितनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं।
Updated on:
12 Oct 2026 02:10 pm
Published on:
12 Oct 2026 02:10 pm
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