
लखनऊ समेत मध्य यूपी में मौसम प्रणाली पर लगातार नजर, अगले 12 घंटों में और कमजोर होने की संभावना (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
UP IMD Alert:उत्तर प्रदेश में बीते दिनों से सक्रिय मौसम प्रणाली अब कमजोर पड़ने लगी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से 27 सितंबर 2026 को सुबह 5:30 बजे जारी नेशनल बुलेटिन नंबर 29 के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना डिप्रेशन उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए कमजोर होकर मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों के ऊपर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया (अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र) में तब्दील हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक यह प्रणाली अगले कुछ घंटों में भी उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगी और धीरे-धीरे और कमजोर होने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, यह वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया अगले करीब 12 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से होकर उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके साथ ही इसकी तीव्रता में लगातार कमी आने की संभावना जताई गई है। विभाग ने संकेत दिया है कि अगले 12 घंटों में यह प्रणाली कमजोर होकर लो प्रेशर एरिया (निम्न दबाव क्षेत्र) में बदल सकती है। इसके बाद इसके प्रभाव का दायरा और तीव्रता पहले की तुलना में कम होने की संभावना है।
मौसम प्रणाली की गतिविधियों पर लखनऊ स्थित डॉप्लर वेदर रडार के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है। डॉप्लर रडार से बादलों की स्थिति, वर्षा से जुड़ी गतिविधियों और मौसम प्रणाली की दिशा एवं तीव्रता में हो रहे बदलावों का आकलन किया जाता है। उत्तर प्रदेश में मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह निगरानी खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कमजोर होती मौसम प्रणाली भी कुछ क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर बारिश और बादल गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, यह प्रणाली दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर डिप्रेशन के रूप में सक्रिय थी। इसके बाद इसने उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में अपनी गति बनाए रखी। आगे बढ़ने के साथ इसकी ताकत में कमी आई और 27 सितंबर की सुबह 5:30 बजे तक यह मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों के ऊपर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया के रूप में दर्ज किया गया। मौसम प्रणालियों में इस तरह का बदलाव उनकी तीव्रता कम होने का संकेत देता है। डिप्रेशन की तुलना में वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया कमजोर श्रेणी की प्रणाली होती है। इसके और कमजोर होकर लो प्रेशर एरिया में बदलने के बाद इसका प्रभाव भी धीरे-धीरे कम हो सकता है।
इस मौसम प्रणाली के कमजोर होने के साथ उत्तर प्रदेश में इसके कारण होने वाली व्यापक वर्षा गतिविधियों में भी धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। हालांकि किसी भी मौसम प्रणाली के प्रभाव का स्थानीय स्वरूप अलग-अलग हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में बादल छाए रहने और बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं, जबकि अन्य इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शांत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर होती प्रणाली के बावजूद स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषकर जहां नमी की उपलब्धता अधिक है, वहां बादल बनने और वर्षा की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और विभागीय चेतावनियों पर नजर रखना उपयोगी रहेगा।
आईएमडी के नेशनल बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि 27 सितंबर की सुबह 5:30 बजे की स्थिति के आधार पर जारी यह इस मौसम प्रणाली से संबंधित अंतिम विशेष अपडेट है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मौसम की निगरानी बंद कर दी जाएगी। मौसम विभाग के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के साथ-साथ क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र और मौसम विज्ञान केंद्र इस प्रणाली के अवशेष यानी कमजोर हो चुके वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया की गतिविधियों को लेकर नियमित बुलेटिन और संदेश जारी करते रहेंगे।
उत्तर प्रदेश में मानसून की गतिविधियों और बदलते मौसम के बीच इस प्रणाली के कमजोर होने को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। डॉप्लर रडार और अन्य मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर इसके आगे के प्रभाव का आकलन किया जाएगा। फिलहाल मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रणाली उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए अगले 12 घंटों में धीरे-धीरे कमजोर होगी।
लखनऊ मौसम वैज्ञानिक ए के सिंह ने कहा कि नजर अब इस बात पर रहेगी कि कमजोर होता सिस्टम किस गति से आगे बढ़ता है और इसके अवशेषों का स्थानीय मौसम पर कितना प्रभाव बना रहता है। खासकर उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में, जहां हाल के दिनों में इस प्रणाली से जुड़ी वर्षा गतिविधियां दर्ज हुई हैं, वहां मौसम के रुझान पर निगरानी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
मौसम विभाग ने इस सिस्टम के लिए विशेष राष्ट्रीय बुलेटिन जारी करने की प्रक्रिया समाप्त करने की जानकारी दी है। अब संबंधित केंद्रों की ओर से नियमित मौसम पूर्वानुमान, स्थानीय चेतावनी और आवश्यक संदेश जारी किए जाते रहेंगे। यानी मौसम प्रणाली भले ही कमजोर हो रही हो, लेकिन इसके अवशेषों से जुड़े स्थानीय प्रभावों को सामान्य मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था के तहत मॉनिटर किया जाता रहेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा बदलाव यही है कि दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय डिप्रेशन अब कमजोर होकर मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया बन चुका है। इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और अगले 12 घंटों में और कमजोर होने का अनुमान है। लखनऊ स्थित डॉप्लर वेदर रडार सहित मौसम विभाग की निगरानी व्यवस्था इसके अगले चरण की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
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Updated on:
27 Sept 2026 10:02 am
Published on:
27 Sept 2026 10:02 am
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