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महासमुंद में ‘भट्ठा सरदार’ के नाम से चर्चित जगत गुप्ता के घर छापा, श्रमिक दलाली मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Mahasamund Police Raid: महासमुंद में ‘भट्ठा सरदार’ जगत गुप्ता के घर पुलिस की दबिश दी गई। श्रमिक शत्रुघन खड़िया की आत्महत्या के मामले में पहले भी गिरफ्तारी हो चुकी है। जानें पूरा मामला क्या है?
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Bhattha Sardar Jagat Gupta

'भट्ठा सरदार' जगत गुप्ता के घर पुलिस की दबिश (Photo Source- Patrika Create)

Bhattha Sardar Jagat Gupta: महासमुंद जिले में श्रमिकों को दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों पर भेजने से जुड़े मामले में चर्चित अजगर उर्फ जगत कुमार गुप्ता के ग्राम बाम्हनडीह स्थित घर पर गुरुवार सुबह पुलिस ने दबिश दी। ग्रामीणों के अनुसार स्कॉर्पियो से पहुंची पुलिस टीम ने घर पर कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि यह टीम बसना पुलिस की थी। इसी दौरान महासमुंद पुलिस की एक अन्य टीम के खरियाररोड में श्रमिक दलाली से जुड़े लता कुमार के घर पहुंचने की जानकारी भी सामने आई। हालांकि, गुरुवार देर तक पुलिस की ओर से दोनों कार्रवाइयों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई थी। ऐसे में पुलिस ने किस मामले में और किन बिंदुओं पर कार्रवाई की, इसकी पूरी स्थिति आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

Shatrughan Khadia Suicide Case: श्रमिकों को दूसरे राज्यों में भेजने को लेकर रहा है नाम

जगत गुप्ता को क्षेत्र में ‘भट्ठा सरदार’ के नाम से भी जाना जाता है। उसके खिलाफ श्रमिकों को ईंट भट्ठों पर काम के लिए दूसरे राज्यों में भेजने, दबाव बनाने और धमकी देने से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। पिछले वर्ष श्रमिकों को बंधक बनाए जाने से जुड़े मामले में भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था और वह जेल जा चुका है। अब उसके घर पर पुलिस की ताजा दबिश ने एक बार फिर श्रमिकों के दूसरे राज्यों में पलायन और उन्हें भट्ठों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क को चर्चा में ला दिया है।

श्रमिक की आत्महत्या के बाद दर्ज हुआ था अपराध

जगत कुमार गुप्ता के खिलाफ सबसे गंभीर मामलों में से एक श्रमिक शत्रुघन खड़िया की आत्महत्या से जुड़ा है। 11 अक्टूबर 2025 को पटेवा थाना क्षेत्र के ग्राम बनपचरी निवासी 40 वर्षीय शत्रुघन खड़िया ने जहर का सेवन कर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के अनुसार, आत्महत्या से पहले शत्रुघन ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर जगत गुप्ता पर ईंट भट्ठे में काम करने और दूसरे राज्य जाने के लिए लगातार दबाव बनाने की शिकायत की थी। आवेदन में जान से मारने की धमकी देने की बात भी सामने आई थी।

मर्ग जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के स्वजन और स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस के मुताबिक मृतक की पूर्व शिकायत, परिजनों के बयान और स्वतंत्र गवाहों से मिली जानकारी को जांच में शामिल किया गया। जांच के बाद पुलिस ने निष्कर्ष के आधार पर जगत कुमार गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। इसी मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी।

खेती के बाद रोजगार के लिए होता है मौसमी पलायन

महासमुंद जिले में खेती-किसानी का काम खत्म होने के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। यह पलायन मुख्य रूप से मौसमी होता है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण श्रमिक ठेकेदारों के माध्यम से ईंट भट्ठों, निर्माण कार्य, कृषि और अन्य असंगठित क्षेत्रों में काम करने के लिए बाहर जाते हैं। ऐसे पलायन में श्रमिकों और ठेकेदारों के बीच होने वाली व्यवस्था कई बार अनौपचारिक रहती है। यही वजह है कि पंजीकृत श्रमिकों की संख्या और वास्तविक पलायन के आंकड़ों में अंतर हो सकता है।

927 श्रमिकों का पलायन पंजीकृत

श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार महासमुंद जिले से 927 श्रमिकों का पलायन पंजीकृत है। वहीं भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिकों के प्रवासी पंजीयन में 4531 श्रमिक पंजीकृत हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को जिले से होने वाले वास्तविक पलायन की पूरी तस्वीर नहीं माना जा सकता। अधिकारियों और श्रमिक संगठनों के स्तर पर लंबे समय से यह बात सामने आती रही है कि बड़ी संख्या में श्रमिक बिना औपचारिक पंजीयन के ठेकेदारों के माध्यम से दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसे में श्रमिकों को बाहर ले जाने वाले लोगों की भूमिका, काम की शर्तें, भुगतान और सुरक्षा जैसे पहलुओं की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

Chhattisgarh crime news: पुलिस की कार्रवाई से फिर उठे कई सवाल

बाम्हनडीह में जगत गुप्ता के घर और खरियाररोड में लता कुमार के घर पुलिस टीम के पहुंचने की जानकारी के बाद श्रमिकों के पलायन से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दोनों स्थानों पर पुलिस की कार्रवाई किस मामले में हुई और इसका आपस में कोई संबंध है या नहीं, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। जिले में खेती के बाद होने वाले मौसमी पलायन को देखते हुए यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। श्रमिकों को दूसरे राज्यों में भेजने की पूरी प्रक्रिया, ठेकेदारों की भूमिका, पंजीयन और वहां काम करने की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण सवाल हैं। पुलिस की ताजा कार्रवाई के बाद इन पहलुओं पर भी नजर बनी हुई है।

फिलहाल पुलिस की आधिकारिक जानकारी का इंतजार

गुरुवार देर तक पुलिस की ओर से दबिश के संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। इसलिए कार्रवाई का उद्देश्य, बरामदगी या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया के संबंध में फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पुलिस की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बाम्हनडीह और खरियाररोड में हुई कार्रवाई किन मामलों से संबंधित थी और जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है।