
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के दौरान प्रदर्शित मेरठ की रंगीन शिमला मिर्च। (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
UP International Trade Show: इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में मेरठ की खेती और कृषि आधारित उद्यमिता ने खास पहचान बनाई है। उद्यान विभाग के आउटलेट पर मेरठ के किसानों की पॉलीहाउस में तैयार फसल, फूल और शहद के उत्पाद देश-विदेश से आए खरीदारों और आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जरबेरा और गुलाब की रंग-बिरंगी फूलों की किस्मों के साथ कमल ककड़ी, पीली-लाल-हरी शिमला मिर्च और बैंगन जैसी फसलों ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि ट्रेड शो किसानों के लिए सिर्फ उत्पादों को प्रदर्शित करने का मंच नहीं, बल्कि नए खरीदारों और कारोबारी संस्थानों से सीधे संपर्क का अवसर भी बन रहा है।
मेरठ के सरधना तहसील क्षेत्र के खेड़ा गांव निवासी रविन्द्र कुमार ने संरक्षित खेती को अपनाकर कृषि क्षेत्र में नई राह बनाई है। करीब पांच एकड़ क्षेत्र में पॉलीहाउस के माध्यम से फल और सब्जियों का उत्पादन करने वाले रविन्द्र कुमार ने बताया कि उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने आधुनिक तकनीक आधारित खेती शुरू की। इसके परिणामस्वरूप उनके कृषि कारोबार का सालाना आंकड़ा 29 लाख रुपये से अधिक पहुंच गया है।
पॉलीहाउस में नियंत्रित वातावरण में फसल तैयार करने का फायदा यह है कि मौसम में बदलाव का असर अपेक्षाकृत कम होता है और बाजार की मांग के अनुसार गुणवत्ता वाली फसल तैयार की जा सकती है। रविन्द्र कुमार के पॉलीहाउस में इस समय पीली, हरी और लाल शिमला मिर्च की पैदावार हो रही है। इनमें कई मिर्च का वजन 300 से 400 ग्राम तक बताया गया है। इस गुणवत्ता की शिमला मिर्च की दिल्ली की आजादपुर मंडी में मांग है, जिससे किसान को बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
ट्रेड शो में रविन्द्र कुमार की पॉलीहाउस में तैयार रंगीन शिमला मिर्च ने खास तौर पर आगंतुकों का ध्यान खींचा। सामान्य खेती के मुकाबले अलग तकनीक से तैयार की गई पीली, लाल और हरी शिमला मिर्च की गुणवत्ता और आकार को देखकर कई लोगों ने इसकी खेती और बाजार से जुड़ी जानकारी ली। किसान रविन्द्र कुमार का कहना है कि संरक्षित खेती में शुरुआती स्तर पर तकनीक और प्रबंधन की जानकारी जरूरी होती है, लेकिन बाजार से जुड़ाव होने पर इससे बेहतर अवसर मिल सकते हैं। उनके मुताबिक उद्यान विभाग की योजनाओं और मार्गदर्शन से उन्हें आधुनिक खेती को अपनाने में मदद मिली।
रविन्द्र कुमार के पॉलीहाउस में सिर्फ सब्जियां ही नहीं, बल्कि जरबेरा और गुलाब जैसे फूलों का भी उत्पादन होता है। ट्रेड शो में फूलों की प्रदर्शनी के बाद कई इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों ने उनसे संपर्क किया है। कंपनियों ने कार्यक्रमों में फूलों की आपूर्ति को लेकर बातचीत की और कुछ कंपनियों की ओर से समझौता ज्ञापन यानी एमओयू करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
किसान के मुताबिक पिछले वर्ष भी वह ट्रेड शो में शामिल हुए थे। प्रदर्शनी में उत्पादों को सीधे बाजार और संभावित खरीदारों के सामने रखने से उन्हें कारोबार के नए अवसर मिले। इस बार भी उन्हें उम्मीद है कि फूलों की मांग और नए कारोबारी संपर्क उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में मेरठ के कृषि उत्पादों की मौजूदगी यह दिखाती है कि आधुनिक खेती को केवल खेत और मंडी तक सीमित रखने के बजाय नए बाजारों से जोड़ा जा सकता है। उद्यान विभाग के आउटलेट पर किसानों को अपने उत्पाद सीधे खरीदारों और कारोबारी संस्थानों के सामने रखने का अवसर मिल रहा है।
किसानों के लिए ऐसे आयोजनों का एक फायदा यह भी है कि उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, मांग और संभावित बाजार के बारे में सीधे जानकारी मिलती है। इससे खेती को बाजार आधारित कारोबार में बदलने की संभावनाएं बढ़ती हैं। मेरठ के किसानों के उत्पादों को मिल रही प्रतिक्रिया इसी दिशा में एक उदाहरण के तौर पर सामने आ रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार के उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने भी ट्रेड शो में उद्यान विभाग के आउटलेट का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों और कृषि उद्यमियों के उत्पाद देखे और उनका उत्साहवर्धन किया। आउटलेट पर मेरठ की पॉलीहाउस फसलों और फूलों के अलावा कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं। मंत्री के निरीक्षण के दौरान किसानों ने आधुनिक खेती और बाजार से जुड़ी अपनी गतिविधियों की जानकारी दी। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक ऐसे आयोजनों के जरिए किसानों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने और नए बाजार तलाशने का अवसर मिल रहा है।
मेरठ की कृषि आधारित उद्यमिता का एक और प्रमुख उत्पाद शहद है। उद्यान विभाग के आउटलेट पर मेरठ की कंपनी रेनट्रॉव नैचुरल के शहद उत्पाद भी लोगों की रुचि का केंद्र बने हुए हैं। युवा उद्यमी राखी अघेरा और उनके भाई भारत अघेरा ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी कंपनी को इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम से कुल 46 टन शहद का ऑर्डर मिला था। विदेशी बाजार से मिले इस ऑर्डर ने मेरठ के शहद कारोबार के लिए नए अवसर खोले हैं। ट्रेड शो में कंपनी को इस बार भी नए कारोबारी संपर्क और बेहतर ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। विदेशी खरीदारों के बीच भारतीय शहद की मांग बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर उत्पादन और प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों को अपने कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिल रहा है।
मेरठ के किसानों की ट्रेड शो में मौजूदगी सिर्फ कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। पॉलीहाउस में तैयार सब्जियां, फूलों का कारोबार और शहद जैसे उत्पाद यह बताते हैं कि खेती के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, बाजार और निर्यात जैसी गतिविधियों को जोड़कर कृषि आधारित उद्यमिता को आगे बढ़ाया जा सकता है।
वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक संजय सिंह ने बताया कि मेरठ के किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए ट्रेड शो उत्पाद प्रदर्शन के साथ-साथ सीधे खरीदारों और कारोबारी संस्थानों से संपर्क का माध्यम बन रहा है। उनके मुताबिक पॉलीहाउस की सब्जियों और फूलों से लेकर शहद तक, अलग-अलग कृषि उत्पादों को यहां नए बाजार से जोड़ने की संभावनाएं बन रही हैं।
ट्रेड शो में मेरठ के कृषि उत्पादों को मिल रही प्रतिक्रिया किसानों के लिए बाजार की बदलती संभावनाओं को भी सामने ला रही है। जहां एक ओर पॉलीहाउस में तैयार रंगीन शिमला मिर्च और फूल खरीदारों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मेरठ का शहद विदेशी बाजार तक अपनी पहुंच बना चुका है।
रविन्द्र कुमार जैसे किसान के लिए प्रदर्शनी में इवेंट कंपनियों से संपर्क और संभावित एमओयू की बातचीत नए कारोबार की दिशा खोल सकती है। वहीं रेनट्रॉव नैचुरल को मिले अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर यह संकेत देते हैं कि कृषि आधारित स्थानीय उत्पादों के लिए देश के बाहर भी बाजार मौजूद है। ऐसे में तकनीक, गुणवत्ता और बाजार की मांग के बीच बेहतर तालमेल किसानों और कृषि उद्यमियों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Updated on:
27 Sept 2026 03:22 pm
Published on:
27 Sept 2026 03:22 pm
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