
केपी त्रिपाठी, मेरठ। खाकी के खौफ से सभी भय खाते हैं। भय हो भी क्यों न, थाने और कोतवाली के चक्कर में जो पड़ा, वह अपना सब कुछ ही गंवा बैठता है। ऐसा ही कुछ हाल मेरठ के बुजुर्ग हाजी हारून मियां का है। करीब 10 साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित 66 साल के हाजी हारून मियां पर धारा 307 का केस लगा दिया है, जो अब पुलिस से छिपते फिर रहे हैं। डॉक्टर ने उनको प्रतिदिन डायलिसिस करवाने की सलाह दी हुई है।
यह है मामला
निकाय चुनाव खत्म होने के बाद मेरठ नगर निगम के वार्ड 70 के क्षेत्र शाहनत्थन गुजरी बाजार में चुनाव लड़ रहे दो पक्षों में आपसी मारपीट हो गई थी। इस दौरान दोनों तरफ से फायरिंग और ईंट-पत्थर चले। हारून ने बताया कि वह उस समय डॉक्टर के पास गए हुए थे। उन्हें वहीं पर लड़ाई का पता चला और वह शाहनत्थन वापस आ गए। बुजुर्ग होने के नाते वह दोनों पक्षों के साथ व्हीलचेयर पर बैठकर थाने गए और वहां पर दोनों को समझा कर समझौता कराने का प्रयास किया। हालांकि, दूसरे पक्ष इकराम और जुबैर ने समझौता मानने से इंकार कर दिया।
पुलिस ने रात में दी दबिश
उन्होंने बताया कि इसके बाद वह वापस अपने घर आ गए और रात में करीब एक बजे पुलिस ने उनके घर पर दबिश दी और कहा कि हाजी हारून के खिलाफ फायरिंग करने और जान से मारने के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। उस समय तो वह पुलिस के डर से घर में छुप गए और तब से छिपते फिर रहे हैं। उनके पुत्रों ने थाने में चिकित्सक का सर्टिफिकेट और डायलिसिस की पर्ची भी दिखाई लेकिन फिर भी पुलिस अधिकारी कुछ मानने को तैयार नहीं हैं।
पत्रिका टीम से लगाई इंसाफ की गुहार
हाजी हारून का कहना है कि दूसरी पार्टी बसपा नेताओं के दबाव में काम कर रही है। हाजी हारून जहां पर छिपे हुए हैं वहां से उन्होंने पत्रिका टीम को फोन कर बुलाया और इंसाफ की गुहार लगाई। हाजी हारून की हालत ऐसी है कि वह एक गिलास पानी भी अपने हाथ से नहीं पी सकते। उनके हाथ कांपते हैं।
एसपी बोले- इसकी जांच कराई जाएगी
इस मामले के जब एसपी सिटी मान सिंह चौहान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी है। अगर किसी बीमार व्यक्ति को साजिश के तहत फंसाया गया है तो वह गलत है। इसकी जांच करवाई जाएगी। जांच में सही पाए जाने पर मुकदमे से उनका नाम निकलवाया जाएगा।
Published on:
07 Dec 2017 12:51 pm
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