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महाराष्ट्र में 4 साल में 13,900 किसानों ने दी जान, सूखे से कई इलाके बेहाल; देवेंद्र फडणवीस को क्यों दी गई नसीहत?

Farmers Suicide in Maharashtra: महाराष्ट्र में पिछले चार साल में 13,900 से ज्यादा किसानों की खुदकुशी और कई इलाकों में पानी की कमी का मुद्दा उठाते हुए अभिजीत दीपके ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से किसानों की समस्याओं पर पहले ध्यान देने की अपील की है।
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मुंबई

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Imran Sheikh

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Updated: 29 Oct 2026, 9:33 AM IST

Devendra Fadnavis

महाराष्ट्र में किसानों की खुदकुशी को लेकर अभिजीत दीपके ने मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना साधा। (फोटो सोर्स-ANI)

Maharashtra Farmer News:महाराष्ट्र में एक तरफ किसान खुदकुशी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई इलाकों में पानी की कमी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। पिछले चार साल में राज्य में 13,900 से ज्यादा किसानों की जान जा चुकी है। ऐसे हालात के बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नसीहत देते हुए कहा है कि उन्हें पहले किसानों और पानी की समस्या पर ध्यान देना चाहिए। सीजेपी को लेकर अपनी बात बाद में भी रखी जा सकती है।

किसानों की मौत का आंकड़ा उठाकर सरकार से सवाल

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए महाराष्ट्र के हालात की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि बीते चार साल में राज्य में 13,900 से ज्यादा किसान खुदकुशी कर चुके हैं। वहीं, कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं और लोगों को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

दीपके ने अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर कहा कि उन्हें फिलहाल इन समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। सीजेपी को लेकर बयानबाजी बाद में की जा सकती है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया और किसानों से जुड़े मुद्दों को पहले देखने की बात कही।

सूखे की मार से बढ़ सकती हैं किसानों की मुश्किलें

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में पानी की कमी का असर खेती और आम जनजीवन पर पड़ सकता है। खेती के लिए समय पर पानी नहीं मिलने से फसलें प्रभावित होती हैं। इसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ सकता है। वहीं, पानी की कमी होने पर पीने के पानी और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता है।

बहरहाल, किसानों की खुदकुशी का मामला भी लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। हालांकि, दीपके की पोस्ट में इन मौतों की अलग-अलग वजहों का ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए सभी मामलों को सूखे या किसी एक कारण से जोड़ना ठीक नहीं होगा। फिर भी, चार साल में 13,900 से ज्यादा किसानों की मौत का आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता की ओर ध्यान खींचता है।

राजनीतिक बहस से पहले जरूरी मुद्दों पर ध्यान देने की बात

दीपके की टिप्पणी का जोर इस बात पर है कि राजनीतिक विवादों के बीच किसानों की परेशानी और पानी की कमी जैसे मुद्दे पीछे नहीं छूटने चाहिए। किसानों को समय पर मदद मिले और प्रभावित इलाकों में पानी की व्यवस्था हो, यह सरकार के सामने अहम चुनौती है।

अब सवाल यह है कि किसानों की खुदकुशी रोकने और पानी की कमी से जूझ रहे इलाकों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल दीपके की पोस्ट ने इन दोनों मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।

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