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SIR विवाद: राज ठाकरे-उद्धव ठाकरे ने 4 अक्टूबर को मुंबई में मार्च का किया ऐलान, विपक्षी दलों को भी साथ आने की अपील

SIR Controversy: SIR विवाद के बीच राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने 4 अक्टूबर को मुंबई में जन मार्च निकालने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं ने अन्य राजनीतिक दलों और जनता से मार्च में शामिल होने की अपील की है। चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है।
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मुंबई

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Imran Ansari

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Sep 26, 2026

SIR Controversy

राज ठाकरे-उद्धव ठाकरे ने 4 अक्टूबर को मुंबई में मार्च का किया ऐलान, फोटो सोर्स- ANI

Raj Uddhav Thackeray March: महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने SIR के मुद्दे पर 4 अक्टूबर को मुंबई में जन मार्च निकालने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं ने इस मार्च में राज्य के अन्य राजनीतिक दलों और आम लोगों से भी शामिल होने की अपील की है।

राज ठाकरे ने 26 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि MNS और शिवसेना 4 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की ओर से SIR के नाम पर किए जा रहे कथित 'धोखे' के खिलाफ मार्च करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी की शाखा की तरह काम कर रहा है। यह राज ठाकरे का राजनीतिक आरोप है, जिसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं कहा जा सकता।

लोकतंत्र और संविधान के नाम पर मार्च की अपील

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की जनता से बड़ी संख्या में मार्च में शामिल होने की अपील की है। दोनों नेताओं का कहना है कि यह मार्च केवल MNS और शिवसेना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक जन आंदोलन का रूप लेगा। मार्च के आयोजन में अन्य राजनीतिक दलों को भी शामिल करने के लिए उनसे संपर्क किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, मार्च का सटीक समय और स्थान बाद में घोषित किया जाएगा।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर भी विवाद

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों तथा प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार आपत्तियां उठाईं। हालांकि, चुनाव आयोग ने संस्थागत मतभेद की इस व्याख्या को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि आंतरिक स्तर पर सवाल, सुझाव और प्रशासनिक टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इस बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर किए जाने की भी बात सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है।

मतदाता सूची में कथित बदलाव और SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते हुए SIR से जुड़े फैसलों को प्रक्रिया के तहत और सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कह रहा है। अब 4 अक्टूबर को प्रस्तावित राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के मार्च से महाराष्ट्र में SIR का मुद्दा और राजनीतिक रूप से गरमाने की संभावना है।

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