
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह परगट सिंह को बनाया प्रदेश अध्यक्ष (Photo-IANS)
Punjab Congress Leadership Change: पंजाब कांग्रेस में अचानक से हालात बदल गए, जज़्बात बदल गए और जो अमरिंदर सिंह वड़िंग कुर्सी के साथ चिपके नजर आ रहे थे, उन्हें एक झटके में कुर्सी से हटा दिया गया। अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि कांग्रेस को अपनी पंजाब इकाई अध्यक्ष बदलना पड़ गया। जबकि कुछ समय पहले तक खबरें आ रही थीं कि आलाकमान राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के मूड में नहीं है और बागी सुर अपना रहे चरणजीत सिंह चन्नी को भी सीधे शब्दों में समझा दिया गया है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्यक्ष अजय माकन की अगुवाई वाले पैनल ने पंजाब के 66 वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी की। इस दौरान, यह सामने आया कि अगर अध्यक्ष बदला जाता है, तो बिखराव संभव है। तब यह भी कहा गया था कि वड़िंग को नवंबर 2025 में नियुक्त अधिकांश जिला कांग्रेस अध्यक्षों का समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, सीनियर जट्ट सिख नेता प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी चन्नी के साथ एकजुट हैं।
कांग्रेस ने परगट सिंह को पंजाब यूनिट का अध्यक्ष नियुक्त किया है। परगट को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का करीबी माना जाता है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को चन्नी गुट की एक बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है। चन्नी लगातार पंजाब अध्यक्ष की कुर्सी हासिल करने की कोशिश में लगे थे। उनके समर्थकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर दलित सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले चन्नी को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का अध्यक्ष बनाने की मांग भी की थी।
हालांकि, आलाकमान ने बदलाव की लगभग सभी संभावनाओं को खारिज कर दिया था। अमरिंदर सिंह वड़िंग भी अपनी कुर्सी को लेकर निश्चिंत हो गए थे। लेकिन गेम ऐसा पलटा कि हारे हुए नजर आ रहे चन्नी जीत गए और वड़िंग की हार हो गई। बताया जा रहा है कि पार्टी अमरिंदर सिंह वड़िंग के कामकाज से खुश थी और उनकी कुर्सी छीनने की कोई वजह भी नहीं थी। लेकिन चन्नी गुट के विरोध से होने वाले संभावित नुकसान और पूर्व सीएम चन्नी की लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए उसे मजबूरन ये फैसला लेना पड़ा।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार से जनता संतुष्ट नहीं है। वहीं, भाजपा के खिलाफ लोगों में गुस्सा है और जन-आंदोलनों ने इस गुस्से को भड़काने का काम किया है। ऐसे में कांग्रेस के लिए पंजाब में अच्छी संभावना बन सकती है। लेकिन अगर पार्टी आंतरिक मतभेद-मनभेद के साथ चुनाव में उतरती है, तो विरोधियों को फायदा मिल सकता है। दो धड़ों में विभाजित कार्यकर्ता मौके का पूरा लाभ उठाने से चूक सकते हैं। इसलिए पार्टी ने बीच का रास्ता निकालने वाला काम किया है। उसने अमरिंदर सिंह वड़िंग को तो पद से हटाया, लेकिन चन्नी को नहीं बैठाया।
पंजाब की सियासत पर नजर रखने वालों का कहना है कि चरणजीत सिंह चन्नी गुट लगातार अपनी ताकत दिखा रहा था। पूर्व सीएम चन्नी तो सीधे राहुल गांधी को चुनौती देने लगे थे। दरअसल, कुछ समय पहले सभी वरिष्ठ नेताओं को हाई कमान से यह हिदायत मिली थी कि राहुल गांधी के हर कार्यक्रम के वीडियो आदि सोशल मीडिया पर शेयर किए जाएं, लेकिन चन्नी इसका लगातार उल्लंघन कर रहे हैं। उनके सोशल मीडिया हैंडल्स केवल खुद को प्रमोट करने वाली पोस्ट से भरा हुआ है। इससे यह पता चलता है कि ‘मन’ की न होने पर वो किसी ही हद तक जा सकते हैं।
चरणजीत सिंह चन्नी दलित सिख समुदाय से आते हैं और पंजाब में कुल दलित आबादी लगभग 32% है। यह आंकड़ा दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। ऐसे में चन्नी की नाराजगी से कांग्रेस को दलित वोटों के दरकने का खतरा हो सकता है। इसके अलावा, कुछ वक्त पहले की एक सर्वे रिपोर्ट ने भी शायद कांग्रेस आलाकमान को पंजाब इकाई में बदलाव के लिए प्रेरित किया हो। वोट वाइब के स्टेट वाइब सर्वे के अनुसार, भले ही पंजाब में मुख्यमंत्री के तौर पर जनता की पहली पसंद AAP के भगवंत मान हैं, लेकिन दूसरे नंबर पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी हैं। यानी जनता के बीच चन्नी की लोकप्रियता कायम है। ऐसे में लोकप्रिय नेता को नाराज करने से चुनाव में नुकसान की आशंका बनी रहती।
परगट सिंह की नियुक्ति को चरणजीत अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं, ऐसे में उनके बगावती तेवर अब मंद पड़ सकते हैं। हालांकि, इस फैसले से अमरिंदर सिंह वड़िंग समर्थकों में नाराजगी है और यह साफ तौर पर नजर भी आ रहा है। लेकिन चन्नी की तुलना में वड़िंग को मनाना कांग्रेस के लिए ज्यादा आसान होगा। अमरिंदर सिंह वड़िंग कह चुके हैं कि उनके नेता केवल राहुल गांधी हैं, इसका मतलब है कि वह राहुल की बातों को अनसुना नहीं कर पाएंगे। राजनीति के जानकारों का यह भी मानना है कि अमरिंदर सिंह वड़िंग को भविष्य में इस कुर्बानी का इनाम मिल सकता है। अगर पंजाब चुनाव में कांग्रेस जीतती है, तो उन्हें सरकार या फिर संगठन में कोई बड़ा पद मिल दिया जा सकता है। वहीं, चरणजीत सिंह चन्नी को इस बार शायद पार्टी सीएम न बनाए।
Updated on:
03 Oct 2026 02:48 pm
Published on:
03 Oct 2026 02:48 pm
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