
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)
Delhi Police: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा हाल ही में यौन अपराधों के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस से अपराधियों के मन में डर और खौफ पैदा करने के लिए कहा गया था। इस पर जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) की प्रवक्ता इफरा जान ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम बिल्कुल भी डर पैदा करना नहीं है। पुलिस का काम जांच करना है।
दिल्ली में यौन मामलों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने 28 सितंबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में हालिया रेप और यौन अपराधों की श्रृंखला पर संज्ञान लिया था। प्रमुख घटनाओं में दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना शामिल है। इसके अलावा स्लीपर बस में नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न हुआ, जिसमें बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक करीब 47km तक चलती रही और पुलिस उसे रोक नहीं पाई, वाली घटना शामिल है।
इस मामले में अदालत ने जोर देकर कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों का ध्यान अपराध होने के बाद नुकसान की भरपाई करने के बजाय, सबसे पहले अपराध रोकने पर होना चाहिए। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस से कहा कि 'ऐसे अपराध करने की प्रवृत्ति रखने वाले पुरुषों के मन में आपको डर और खौफ पैदा करने की जरूरत है। जब तक आप अपराधियों के मन में यह खौफ पैदा नहीं करेंगे कि अगर अब कुछ किया तो मारे जाएंगे, तब तक आप ऐसे अपराधों को नहीं रोक पाएंगे।'
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए इफरा जान कहती हैं कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जज कह रहे हैं कि पुलिस को डर पैदा करना चाहिए। पुलिस का काम बिल्कुल भी डर पैदा करना नहीं है। पुलिस का काम जांच करना है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के तहत पुलिस का काम एक स्पष्ट, निर्णायक और पुख्ता जांच करके उस जांच के आधार पर चार्जशीट तैयार करना है। जिसे न्यायपालिका के सामने पेश करके आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है और उसे सजा दिलाई जा सकती है।
Updated on:
05 Oct 2026 06:40 pm
Published on:
05 Oct 2026 06:40 pm
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