
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (फोटो-IANS)
Suvendu Adhikari on Congress: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर कांग्रेस व विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने निशाना साधा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 'द हाइट ऑफ हिपोक्रेसी: कांग्रेस एंड इट्स पॉलिटिक्स ऑफ कन्वीनियंस' टाइटल से एक पोस्ट शेयर करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कभी कांग्रेस नेताओं ने खुद अलग-अलग राज्यों में लाखों फर्जी वोटर होने की बात कही थी, लेकिन अब जब चुनाव आयोग वैज्ञानिक तरीके से उन फर्जी नामों को हटा रहा है, तो कांग्रेस इसे राजनीतिक हमला बताकर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने में जुट गई है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि केरल में जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे ने वाम मोर्चे को शिकस्त दी, तब पार्टी के नेता इसी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की जमकर तारीफ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस ने फर्जी एंट्रीज को हटाने का स्वागत किया और इसे जमीनी स्तर की लोकतंत्र की जीत बताया। लेकिन जैसे ही वही SIR प्रक्रिया उन राज्यों में शुरू होती है, जहां कांग्रेस और उसके सहयोगियों को अपनी हार साफ दिखती है, तो उनका नजरिया रातों-रात बदल जाता है। जीतने पर सिस्टम मजबूत और पारदर्शी हो जाता है और हार सामने दिखने पर उसी संस्थागत तंत्र को पक्षपाती बताया जाने लगता है। संवैधानिक संस्थाओं पर यह सुविधा की राजनीति अब नहीं चलेगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस का पूरा राजनीतिक इतिहास ऐसे दोहरे रवैये से भरा पड़ा है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2018 में कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने खुद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 50 से 70 लाख डुप्लीकेट वोटर होने का दावा किया था, लेकिन जब आयोग ने दोनों राज्यों में बड़े पैमाने पर जांच और छंटनी शुरू की, तो कांग्रेस विरोध प्रदर्शन करने लगी। ठीक इसी तरह राजस्थान में 2018 में कांग्रेस ने 42 लाख फर्जी वोटरों की शिकायत की थी, मगर जब आयोग ने 41.85 लाख नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए, तो इस पर सवाल खड़े किए जाने लगे।
शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि केरल में साल 2021 में कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने खुद 4.34 लाख फर्जी वोटरों की पहचान कर आयोग से कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अब अंतिम सूची से 8.57 लाख संदिग्ध नाम हटने पर कांग्रेस विरोध जता रही है। वहीं महाराष्ट्र में राहुल गांधी ने पांच महीने में 39 लाख फर्जी वोटर जुड़ने का आरोप लगाया और जब प्रक्रिया के तहत सफाई हो रही है तो पूरी संस्था पर सवाल दाग रहे हैं। पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी नेता जवाहर सरकार ने 90 लाख से ज्यादा फर्जी वोटर होने की बात कही थी, लेकिन जब आयोग अपात्र नामों को हटाता है तो 'गला काट दो लेकिन वोटर मत काटो' का नैरेटिव गढ़ा जाने लगता है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जब मतदाता सूची में गलतियां होती हैं, तब विपक्ष चिल्लाता है कि फर्जी वोटरों के दम पर धांधली हो रही है। और जब चुनाव आयोग सूचियों की सफाई कर फर्जी नामों को हटाता है, तो विपक्ष इसे अपने ऊपर राजनीतिक हमला बताने लगता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और पूरे देश की जनता विपक्ष के इस सियासी पाखंड को अच्छी तरह समझ चुकी है। जो राजनीतिक दल जनता के जनादेश और अपनी हार को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं रखते, वे नियमित चुनावी प्रक्रियाओं पर निराधार आरोप लगाकर अपनी नाकामी नहीं छिपा सकते।
Updated on:
29 Sept 2026 06:29 pm
Published on:
29 Sept 2026 06:29 pm
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