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SIR विवाद पर पूर्व CEC एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग को घेरा, बोले- आगे सुधारेंगे तो पीछे जो हुआ उसका हिसाब कौन देगा?

SY Quraishi on Election Commission: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त SY कुरैशी ने 26 सितंबर के चुनाव आयोग के प्रेस नोट पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर एजेंडा, मीटिंग के मिनट्स और अधिकारियों द्वारा मामलों की सुनवाई से जुड़े प्रावधान अब लागू किए जा रहे हैं, तो पहले क्या प्रक्रिया थी। उन्होंने SIR के तहत फॉर्म 6 के लिए अलग-अलग प्रावधानों और मानक प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई।
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former CEC SY Quraishi on SIR controversy

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी (फोटो- idea.int)

SY Quraishi on ECI Press Note: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) डॉ. एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग द्वारा हाल में जारी किये गए प्रेस नोट पर सवाल उठाए हैं। डॉ. कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण असल में आयोग के ही खिलाफ जाता है, क्योंकि अनजाने में ही यह उनकी अपनी प्रशासनिक कमियों और चूक को औपचारिक रूप से स्वीकार करने जैसा है। इसके अलावा फॉर्म 6 के लिए अलग-अलग फॉर्मेट होने पर आपत्ति जताते हुए एसवाई कुरैशी ने पूछा कि क्या एक ही देश में नागरिकों के लिए नियमों के दो अलग-अलग सेट लागू हो सकते हैं।

आयोग का प्रेस नोट सफाई नहीं, गलतियों का कन्फेशन है : डॉ. एसवाई कुरैशी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि आयोग का जारी किया गया प्रेस नोट असल में उसके खिलाफ ही जाता है। ऐसा करके आयोग ने खुद माना है कि अब तक उसके कामकाज में गलतियां रही हैं। एसवाई कुरैशी ने कहा कि आयोग का कहना है कि वह भविष्य में एजेंडा मीटिंग करेंगे इसका मतलब है कि पहले बैठकें किसी तय एजेंडा के साथ नहीं होती थीं।

एसवाई कुरैशी ने कहा कि आगे से एजेंडा जारी करने की बात कही गई है, जिसका मतलब है कि पहले एजेंडा जारी नहीं किए जाते थे। इसमें बैठक का ब्यौरा जारी करने की बात है, जिसका मतलब है कि पहले बैठक का ब्यौरा रिकॉर्ड नहीं किया जाता था। इसमें कहा गया है कि अधिकारी अब शिकायतों को सुनेंगे, जिसका मतलब है कि पहले सुनवाई नहीं होती थी।

पूर्व CEC ने कहा- पीछे जो हुआ उसका हिसाब कौन देगा?

जवाबदेही की मांग करते हुए डॉ. कुरैशी ने कहा कि मान लेते हैं कि चुनाव आयोग भविष्य में बहुत अच्छा काम करेगा, लेकिन जो गलतियां और नुकसान पहले ही हो चुके हैं, उन्हें कौन ठीक करेगा? उसका हिसाब कौन देगा? उनके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा?

फॉर्म-6 को लेकर उठाए सवाल

फॉर्म 6 को लेकर डॉ. कुरैशी ने कहा कि आयोग ने इस फॉर्म के लिए नियमों के दो सेट बनाए हैं। एक वह फॉर्म-6 जो SIR में इस्तेमाल हुआ और दूसरा सामान्य मामलों के लिए पुराना फॉर्म-6 जारी रहेगा। यह पूरी तरह से बेतुका और हास्यास्पद है। क्या भारत में एक ही प्रक्रिया के लिए नियमों के दो सेट हो सकते हैं? क्या यह मुमकिन है कि एक तरह का फॉर्म 6 आप पर लागू हो और दूसरा मुझ पर? एक ही प्रक्रिया के लिए दो अलग-अलग फॉर्म का इस्तेमाल चुनाव आयोग के तथाकथित सामूहिक निर्णय लेने वाले सिस्टम की बेतुकी बात को दर्शाता है।

SIR को लेकर पहले से ही उठाए जा रहे सवाल

चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेदों की खबरों के बाद SIR को लेकर विवाद और बढ़ गया। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग द्वारा लिए गए कई फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई थी।

इसके बाद, 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग की बैठक की। बैठक के बाद ECI ने फिर से कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने पहले भी फॉर्म 6 के बारे में स्पष्ट किया है कि मूल फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा एक अलग एनेक्सर के रूप में मौजूद है।