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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अनिल शास्त्री बोले- आज कोई लाल बहादुर शास्त्री नहीं, जो नैतिक आधार पर पद छोड़ दे

Gyanesh Kumar: पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके बेटे अनिल शास्त्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों ने 14 मुद्दों पर असहमति जताई थी, इसलिए जनता को इन आपत्तियों की जानकारी मिलनी चाहिए।
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Gyanesh Kumar

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अनिल शास्त्री। फाइल फोटो- पत्रिका

Anil Shastri: पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके बेटे अनिल शास्त्री ने उनके नेतृत्व और आज की सरकार की कार्यशैली के बीच समानता पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर लाल बहादुर शास्त्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच में समानता दिखाई देती है।

अनिल शास्त्री ने कहा कि जब पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके छंब सेक्टर में हमला किया तो लाल बहादुर शास्त्री ने भी सेना को जवाबी हमला करने और उस हमले में लाहौर को भी शामिल करने का निर्देश दिया था। हमारी सेना ने भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की और लाहौर की ओर बढ़ी थी। इसी तरह मौजूदा दौर में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने सीमा पार आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हमारी सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की और वहां हमला किया तथा काफी चोट पहुंचाई। इस मामले में मेरा मानना है कि दोनों की सोच एक जैसी रही है।

लाल बहादुर शास्त्री की सादगी का जिक्र किया

लाल बहादुर शास्त्री की सादगी का जिक्र करते हुए अनिल शास्त्री ने कहा कि उनका जीवन बेहद सादा था, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां और सोच बदलती हैं। शास्त्री जी का जीवन काफी सादा था, लेकिन समय बदलता है और समय के साथ सोच भी बदलती है। वे खादी की धोती और कुर्ता पहनते थे। आज ऐसा नहीं है और आज के नेताओं के मामले में ऐसा हो भी नहीं सकता, क्योंकि जैसा कि मैंने कहा, समय बदलता है और समय के साथ सोच भी बदलती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र करते हैं और उनके नारे ‘जय जवान, जय किसान’ को याद करते हैं। सभी सरकारें शास्त्री जी का सम्मान सम्मान करती हैं।

ऑपरेशन सिंदूर को सही बताया

पहलगाम की आतंकी घटना के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'ऑपरेशन सिंदूर' को सही बताते हुए अनिल शास्त्री ने कहा कि यह बिल्कुल सही फैसला था और पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि हम ईंट का जवाब पत्थर से और हथियारों का जवाब हथियारों से देंगे। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक है। अगर उन्हें लगता है कि वे जम्मू-कश्मीर पर कब्जा कर सकते हैं, तो उनके इरादे हमेशा नाकाम रहेंगे। चाहे वे चीन की मदद लें, किसी और की या अमेरिका की, पाकिस्तान कश्मीर को भारत से अलग नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को वह इलाका भारत को लौटा देना चाहिए जिस पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

लाल कृष्ण आडवाणी का लिया नाम

विपक्षी पार्टियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर उन्होंने कहा कि हमने जो सुना और पढ़ा है, उससे लगता है कि कुछ गलतियां हुई हैं, क्योंकि दूसरे चुनाव आयुक्तों ने 14 आपत्तियां उठाई हैं और कई बार ऐसा हुआ है जब वे सीईसी ज्ञानेश कुमार से सहमत नहीं थे और उन्होंने उनका विरोध किया। इसलिए जनता को यह जानने का हक है कि वे 14 मुद्दे क्या थे जिन पर ज्ञानेश कुमार सहमत नहीं थे। उन्होंने एसआईआर का जिक्र करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी का नाम लिया। उन्होंने कहा कि वह वर्षों से वोट कर रहे हैं और दिल्ली में रहते हैं, उन्हें भी नोटिस दिया गया। सोनिया गांधी के अलावा कई लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या न दें, आज कोई ऐसा लाल बहादुर शास्त्री नहीं है जो नैतिक आधार पर इस्तीफा दे, जैसा उन्होंने एक रेल दुर्घटना के तुरंत बाद दिया था।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्होंने कहा कि बहुत खुशी की बात है कि मेरे पिता लाल बहादुर शास्त्री को न सिर्फ दिल्ली में, बल्कि पूरे देश में याद किया जा रहा है और यह उनकी 122वीं जयंती है। दिल्ली में कई कार्यक्रम हुए, जिनमें से एक आज सुबह विजय घाट पर हुआ, जहां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, अन्य वरिष्ठ नेता और समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। इन सभी कार्यक्रमों का एक ही मकसद है। आज उनकी जयंती पर हम लाल बहादुर शास्त्री को सिर्फ एक व्यक्ति के तौर पर ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, उनकी सोच, उनकी विचारधारा, उनकी ईमानदारी और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करें और इस बात पर विचार करें कि इन मूल्यों को आज की पीढ़ी में कैसे उतारा जा सकता है। उनका नारा 'जय जवान, जय किसान' आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस समय था।

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