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मलबे से जिंदा निकला 20 साल का नीरज, अब ICU में जिंदगी की जंग; 6 सर्जरी के बाद भी बेटे के ठीक होने का इंतजार कर रहा पिता

Satya Niketan building collapse Latest Update: सत्य निकेतन PG हादसे में मलबे से जिंदा निकला 20 साल का नीरज बावा करीब एक महीने से AIIMS के ICU में भर्ती है। छह सर्जरी के बाद भी इलाज जारी है, जबकि पिता बेटे के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं।
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AIIMS ICU

दिल्ली स्थित AIIMS अस्पताल, जहां सत्य निकेतन हादसे में घायल 20 वर्षीय नीरज बावा का इलाज चल रहा है। (फाइल फोटो-ANI)

DU Student Accident: दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए PG हादसे को करीब एक महीना हो गया है। लेकिन 20 साल के नीरज बावा के परिवार के लिए उस दिन की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। जम्मू-कश्मीर के कठुआ का रहने वाला नीरज दिल्ली यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स की पढ़ाई करने आया था। हादसे के बाद उसे मलबे से जिंदा बाहर निकाल लिया गया था। लेकिन तब से वह AIIMS के ICU में भर्ती है। उसके पिता रोज अस्पताल के बाहर बेटे के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं।

मलबे से जिंदा निकला था नीरज

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सत्य निकेतन हादसे में पांच DU छात्रों की मौत हो गई थी। नीरज उन छात्रों में था, जिन्हें मलबे से जिंदा बाहर निकाला गया था। नीरज के साथ दो और छात्रों को भी बचाया गया था। लेकिन नीरज को काफी चोटें आई थीं। इसके बाद उसका लगातार इलाज चल रहा है।

6 बार हो चुकी है सर्जरी

हादसे में नीरज के पेट, पीठ और कमर के पास काफी चोट आई। उसके कूल्हे में भी फ्रैक्चर हुआ। अब तक उसकी 6 सर्जरी हो चुकी हैं। शरीर के घायल हिस्सों पर कई बार स्किन ग्राफ्टिंग भी की गई है। इसके बावजूद नीरज अभी ICU में है।

फिलहाल डॉक्टर यह नहीं बता पा रहे हैं कि नीरज को पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगेगा। यही बात उसके परिवार की चिंता बढ़ा रही है। पिता की बस यही उम्मीद है कि बेटा जल्द ठीक हो जाए और फिर अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

टीवी पर बेटे को मलबे से निकलते देखा

हादसे की खबर मिलने के बाद नीरज के 67 साल के पिता दर्शन दास काफी परेशान हो गए थे। वह टीवी पर हादसे की खबर देख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने राहत और बचाव के दौरान एक युवक को मलबे से बाहर निकलते देखा।

उन्हें लगा कि शायद वह उनका बेटा नीरज है। बाद में यह बात साफ हो गई कि मलबे से निकाला गया युवक नीरज ही था। यह जानकर परिवार को बड़ी राहत मिली कि उनका बेटा जिंदा है। लेकिन इसके बाद अस्पताल के बाहर इंतजार शुरू हो गया। करीब एक महीने बाद भी यह इंतजार खत्म नहीं हुआ है।

पढ़ाई का एक साल खराब होने की चिंता

नीरज पढ़ाई के लिए दिल्ली आया था। वह इकोनॉमिक्स की पढ़ाई कर रहा है। हादसे के बाद अब उसे इस बात की भी चिंता है कि कहीं उसकी पढ़ाई का एक साल खराब न हो जाए।

लेकिन उसके पिता के लिए अभी पढ़ाई से ज्यादा जरूरी बेटे की जिंदगी है। उनका कहना है कि पढ़ाई बाद में भी पूरी की जा सकती है। अभी उनकी सबसे बड़ी चिंता यही है कि नीरज ठीक हो जाए और दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

सत्य निकेतन हादसे ने कई परिवारों को गहरा दुख दिया। वहीं नीरज का परिवार आज भी AIIMS के ICU के बाहर इस उम्मीद में है कि उनका बेटा जल्द ठीक होकर वापस उनके पास आएगा।

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