
Exclusive- शहीद इंस्पेक्टर की पत्नी ने कहा- इस देश में इंस्पेक्टर की हत्या हो जाती है और पुलिस आरोपी को पकड़ नहीं पाती है
नोएडा। बीते दिनों बुलंदशहर में गौकशी की अफवाह पर भड़की हिंसा में स्याना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और युवक सुमित की मौत हो गई थी। इस मामले में बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया गया है। योगेश राज अभी तक फरार है। इसको लेकर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का परिवार काफी आहत है। राजस्थान पत्रिका के साथ बातचीत में सुबोध कुमार सिंह की पत्नी रजनी और बेटे अभिषक ने कहा, दुख होता है... जानकर कि इस देश के एक इंस्पेक्टर की हत्या करके मार दिया जाता है। उसके बाद आरोपी को पुलिस क्यों अभी तक अरेस्ट नहीं कर पाई है।
अब तक मुख्य आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है, इसके बारे में आपका क्या कहना?
रजनी: बहुत दुख होता है जानकर कि आरोपी ना तो पकड़ा गया है और न ही आरोपी का नाम ही घोषित हुआ है। ना ही कोई आरोपी अरेस्ट हुआ है। जो लोग पकड़े गए, उनको आप यह मत कहिए कि कोई अरेस्ट हुए हैं। एक-एक कर खुद ही ये लोग आकर सरेंडर हुए हैं ताकि उन पर किसी प्रकार का कोई भी प्रेशर डालकर कुछ भी पूछताछ न की जा सके। वे अपनी मर्जी से अपने तरीके से सरेंडर कर रहे हैं। कोई भी अरेस्ट नहीं हुआ है। दुख होता है जानकर कि इस देश के एक इंस्पेक्टर की हत्या करके मार दिया जाता है। उसके बाद आरोपी को पुलिस क्यों अभी तक अरेस्ट नहीं कर पाई है।
आपको क्या लगता है। कोई आरोपी को बचा रहा है?
रजनी: अगर कोई उन्हें बचा नहीं रहा होता तो वे अब तक कैसे बचे हुए हैं। मेरे पति की सर्विस के दौरान क्राइम होते ही समाचार पत्र को छापना पड़ता था, कि यह घटना हुई इसका खुलासा किया गया, इतने आरोपी पकड़े गए, इतना सामान बरामद किया गया है। मैं उस इस्पेक्टर की पत्नी हूं, जिसको न्याय दिलाने के लिए एक भी अफसर नहीं खड़ा है। यह जानकर बड़ा दुख होता है। अगर घटना किसी और इनके साथी के साथ होती, तो अब तक ना सिर्फ आरोपी पकड़ा गया होता, उसे सजा दिलाने के लिए मेरे पति दुनिया से लड़ जाते। लेकिन आज उनके लिए लड़ने वाला कोई नहीं है, उनके बराबरी का एक भी इंस्पेक्टर मुझे खड़ा हुआ नजर नहीं दिखाई दे रहा है। यह जानकर बड़ा दुख होता है।
आपके पिताजी नहीं रहे। अब आगे जीवन में कैसा संघर्ष चल रहा है?
अभिषेक : मेरा अब संघर्ष है कि न्याय इस सोसायटी में बना रहे। जो जितना नीचे गिरता जा रहा है, उससे इंसानियत उतनी ही दब रही है। मुझे इस बात का डर है कि किसी दिन ऐसा ना हो कि हमें छोटे बच्चों को देखकर उस पर भी दया ना आए। इंसान की भी एक वैल्यू होती है। वह बनी रहे। इंसान और जानवर की वैल्यू अलग संदर्भ में होती है, लोग यह भूल जाते हैं, उनको बताना पड़ता है। आज जो चीज हो रही है, उस बात पर किसी का फोकस ना जाए, इसलिए उस चीज पर फोकस करना, जिससे वह चीज बनी रहे, जिससे किसी को बचाया जा सके। किसी और के साथ भी यह घटना ना हो, जो मेरे पापा के साथ हुई है।
आगे की लड़ाई लड़ने के लिए आप क्या करना चाहते हैं?
अभिषेक: मेरे पापा ने यह सिखाया था कि कुछ भी करो, काबिल बनो लेकिन उससे पहले एक अच्छे इंसान बनो। मैं पॉलीटिकल साइंस का स्टूडेंट हूं। मैं जानता हूं कि हमारे संविधान के अंदर एक आत्मा है। ये लोग जो कर रहे हैं, जो हो रहा है, उसके लिए यह शब्द तो मैं कहना नहीं चाहता, लेकिन फिर भी बोलता हूं कि यह लोग हमारे कॉन्स्टिट्यूशन के साथ रेप कर रहे हैं। मैं अपनी जान झोक दूंगा पर संविधान को नीचे नहीं आने दूंगा। जो सच है। जो लड़ाई है। वह मैं लड़के रहूंगा।
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Published on:
19 Dec 2018, 11:02 AM IST
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