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सीने से बेटी की लाश को चिपकाकर भटकते रहे माता-पिता, पैसे नहीं देने पर एंबुलेंस ने रास्ते में उतारा

सरकारी दावों और हेल्थ सिस्टम की पोल खोलती तस्वीर...एंबुलेंस ड्राइवर ने मांगे 1100 रुपए..नहीं दिए तो शव के साथ माता-पिता को रास्ते में उतारा...
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पन्ना

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Shailendra Sharma

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Updated: 16 Sep 2022, 8:51 PM IST

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पन्ना. मध्यप्रदेश के पन्ना में मानवता को शर्मसार कर देने वाली ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर किसी का दिल पसीज जाए। ये तस्वीर सरकार के दावों और हेल्थ सिस्टम की पोल खोलने वाली है कि किस तरह से लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी गरीब लोगों तक सुविधाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। मामला पन्ना का है जहां 4 साल की बच्ची की लाश कंधे पर लिए उसके माता-पिता यहां वहां भटकते हुए नजर आए। जानकर हैरानी होगी कि बच्ची का शव एंबुलेंस से गांव ले जाया जा रहा था लेकिन रास्ते में एंबुलेंस ड्राइवर ने बच्ची के पिता से 1100 रुपए की मांग की और जब वो पैसे नहीं दे पाए तो अस्पताल से करीब 2 किलोमीटर दूरी पर हगी माता-पिता को बेटी के शव के साथ एंबुलेंस से उतार दिया।

पैसे नहीं दिए तो एंबुलेंस से उतारा
पन्ना जिले के लोहरहाई गांव के रहने वाले मुनाई आदिवासी ने बतायया कि गांव में 7 सितंबर को दूषित पानी पीने से लोग बीमार हो गए थे। उल्टी-दस्त होने के कारण दो साल की बच्ची की मौत गई थी। करीब 60 लोगों का गांव में ही इलाज किया था। उनकी चार साल की बेटी संजना भी बीमार हुई थी जिसे गांव के ही 12 लोगों के साथ जिला अस्पताल रेफर किया गया था। अस्पताल में चल रहे इलाज के दौरान बेटी संजना की मौत हो गई। जिसके बाद उन्होंने बेटी के शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल से शव वाहन की मांग की। करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद एंबुलेंस से शव गांव के लिए रवाना किया गया लेकिन रास्ते में एंबुलेंस के ड्राइवर ने उनसे 1100 रुपए की मांग की। बेबस पिता मुनाई ने बताया कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे तो एंबुलेंस के ड्राइवर ने उन्हें बेटी की लाश के साथ अस्पताल से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर उतार दिया। वो एंबुलेंस ड्राइवर के सामने गुहार लगाते रहे लेकिन उसने एक न सुनी और गाड़ी लेकर वहां से चला गया। जिसके बाद वो बेटी की लाश को सीने से लगाए यहां वहां भटकते रहे।

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लोगों ने की मदद, पहुंचाया घर
बेटी की लाश कंधे पर लेकर यहां वहां भटक रहे माता-पिता ने कुछ लोगों को अपनी पीड़ा बताई जिसके बाद कुछ जिम्मेदार लोग मदद के लिए आगे आए और शहर के समाजसेवियों को सूचना दी। माता-पिता की आपबीती सुनकर समाजसेवी व कांग्रेस नेता शशिकांत दीक्षित ने तुरंत अस्पताल प्रबंधन से बात की और फिर आनन-फानन में शव वाहन की व्यवस्था कर उन्हें उनके गांव रवाना किया।

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