कर्मचारियों के आंदोलन को बल व छल पूर्वक कुचलना, समय-समय पर केंद्र के समान महंगाई भत्ता के लिए तरसाना, लाखों का लंबित डीए एरियर्स खा जाना, संविदा कर्मचारियों, अनियमित कर्मचारी का नियमितीकरण, स्वास्थ्य कर्मचारियों की सेवा समाप्ति, सातवें वेतनमान की अंतिम किश्त जारी न करना, कर्मचारियों अधिकारियों की मांगों की लगातार अनदेखी जैसे अव्यवहारिक व अदूरदर्शी निर्णयों ने सरकार को इस बार भी बदलने में अपनी महती भूमिका अदा की है।