
छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाला (Photo Source- Patrika Create)
Coal Levy Scam: छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी मामले की जांच अब कोयला परिवहन से आगे बढ़कर आयरन पैलेट और लौह अयस्क के परिवहन तक पहुंच गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी EOW की ओर से दाखिल छठे पूरक चालान में तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म और IAS अधिकारी जयप्रकाश मौर्य की भूमिका को लेकर कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त की गई डायरी में जयप्रकाश मौर्य को करीब एक करोड़ रुपये दिए जाने से जुड़ी प्रविष्टियां मिली हैं। मौर्य निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू के पति हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत में होने वाली सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
EOW की जांच में आयरन पैलेट परिवहन में 100 रुपये प्रति टन और कोयला परिवहन में 25 रुपये प्रति टन कथित वसूली का जिक्र सामने आया है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह व्यवस्था कथित अवैध वसूली के नेटवर्क का हिस्सा थी। जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 2018 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में करीब 19.05 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन हुआ था। यदि पूरे उत्पादन पर 100 रुपये प्रति टन की दर से गणना की जाए तो यह राशि करीब 1,905 करोड़ रुपये बैठती है।
वहीं इसी अवधि में करीब 81 करोड़ टन कोयले के उत्पादन का आंकड़ा बताया गया है। 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से इसकी गणना करीब 2,025 करोड़ रुपये होती है। हालांकि, ये आंकड़े केवल गणितीय आकलन हैं। इनका यह मतलब नहीं है कि EOW ने पूरे उत्पादन पर कथित वसूली साबित कर दी है। वर्तमान में जांच एजेंसी की ओर से इस घोटाले का कुल आकलन करीब 500 करोड़ रुपये बताया गया है।
EOW के अनुसार, 14 दिसंबर 2021 को लौह अयस्क और आयरन पैलेट के परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके बाद 5 जनवरी 2022 के आदेश के माध्यम से सड़क और रेल मार्ग से परिवहन की व्यवस्था लागू हुई। आरोप पत्र में दावा किया गया है कि इसी दौरान जयप्रकाश मौर्य ने पैलेट उद्योगपतियों की बैठक ली थी। EOW के अनुसार, इस बैठक में सूर्यकांत तिवारी या उसके लोगों को 100 रुपये प्रति टन देने के निर्देश दिए जाने का आरोप है।
छठे पूरक चालान में मौर्य से जुड़ी दो डायरी प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है। EOW का दावा है कि इन प्रविष्टियों और जांच से मिले अन्य साक्ष्यों के आधार पर नकद लेनदेन की कड़ी सामने आई। जांच एजेंसी के मुताबिक, मौर्य के सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग से जुड़े मामलों में उसके संपर्क में रहने और कथित वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने से संबंधित तथ्य जांच में सामने आए हैं।
EOW ने आरोप पत्र में डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन खनिज अधिकारी अनुराग दीवान के मोबाइल फोन से आदेश से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों, डायरी प्रविष्टियों और डिजिटल साक्ष्यों को कथित लेवी नेटवर्क की कड़ियों से जोड़कर देख रही है। इससे जांच का दायरा केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आई है।
कोल लेवी मामले में EOW की ओर से करीब 500 करोड़ रुपये के घोटाले का आकलन किया गया है। अब छठे पूरक चालान में आयरन पैलेट और लौह अयस्क परिवहन से जुड़े आरोपों के शामिल होने से मामले की जांच का दायरा और बढ़ गया है। फिलहाल जांच एजेंसी के आरोपों और दस्तावेजों का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है। आने वाले समय में अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट होगा कि कथित लेवी नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी और आरोपों की पुष्टि किस स्तर तक होती है।
Updated on:
07 Oct 2026 07:00 pm
Published on:
07 Oct 2026 07:00 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
