
12 नवंबर से देशभर में ड्राइवरों की हड़ताल (Photo Source- AI Generate)
Chhattisgarh Driver Strike: छत्तीसगढ़ में ड्राइवरों के कल्याण के लिए वेलफेयर बोर्ड बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय ड्राइवर आयोग के गठन और राज्यों में ड्राइवर वेलफेयर बोर्ड बनाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय ड्राइवर संगठन ने 12 नवंबर से देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि महाराष्ट्र समेत चार राज्यों में वेलफेयर बोर्ड का गठन किया जा चुका है, लेकिन छत्तीसगढ़ में एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
संगठन के मुताबिक, इस बार आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक बनाने की तैयारी है। हड़ताल में बड़ी संख्या में ड्राइवरों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। यदि परिवहन सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो ट्रक और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के साथ रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, हड़ताल के वास्तविक प्रभाव की स्थिति आंदोलन में भागीदारी और परिवहन सेवाओं पर निर्भर करेगी।
अखिल भारतीय ड्राइवर संगठन ने राष्ट्रीय ड्राइवर आयोग बनाने और राज्यों में वेलफेयर बोर्ड गठित करने की मांग को लेकर 12 नवंबर से हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि ड्राइवरों की समस्याओं के समाधान और उनके कल्याण के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है। आंदोलन से पहले विभिन्न राज्यों में जनसंपर्क अभियान चलाने और बैठकें करने की तैयारी की जा रही है।
संगठन का दावा है कि इस बार ड्राइवर अपनी मांगों को लेकर व्यापक स्तर पर एकजुट होंगे। छत्तीसगढ़ में भी संगठन के पदाधिकारी आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने के कारण देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया जा रहा है।
ड्राइवर संगठन का आरोप है कि महाराष्ट्र समेत चार राज्यों में ड्राइवरों के लिए वेलफेयर बोर्ड गठित किए गए हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में अब तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन का कहना है कि राज्य में भी ड्राइवरों के हितों की रक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। वेलफेयर बोर्ड की मांग को ड्राइवरों के कल्याण और उनकी समस्याओं के समाधान से जोड़कर देखा जा रहा है।
संगठन चाहता है कि ड्राइवरों के हितों से जुड़े मुद्दों पर संस्थागत व्यवस्था बनाई जाए, ताकि उनकी मांगों को सुनने और उन पर कार्रवाई करने के लिए एक स्पष्ट तंत्र मौजूद हो। हालांकि, छत्तीसगढ़ में वेलफेयर बोर्ड के गठन की मौजूदा सरकारी स्थिति और इस संबंध में किसी आधिकारिक निर्णय की जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
अखिल भारतीय ड्राइवर संगठन की कोऑर्डिनेशन कमेटी से जुड़े और छत्तीसगढ़ ड्राइवर संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतेन सेन के मुताबिक, देशभर में करीब पांच करोड़ ड्राइवर हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। संगठन का दावा है कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए विभिन्न राज्यों में संपर्क और समन्वय बढ़ाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ ड्राइवर संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सेन ने भी कहा है कि आंदोलन पहले दिन से पूरी ताकत के साथ शुरू किया जाएगा। संगठन की ओर से किए गए पांच करोड़ ड्राइवरों के शामिल होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हड़ताल का वास्तविक दायरा इसमें शामिल होने वाले ड्राइवरों और परिवहन संगठनों के फैसलों से स्पष्ट होगा।
ड्राइवर संगठन के अनुसार, वर्ष 2025 में भी मांगों को लेकर हड़ताल की गई थी। उस दौरान शासन की ओर से आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन को करीब 36 घंटे में स्थगित कर दिया गया था। संगठन का आरोप है कि इसके बाद भी मांगों पर अपेक्षित पहल नहीं हुई। इसी वजह से अब दोबारा आंदोलन का निर्णय लिया गया है। संगठन चाहता है कि राष्ट्रीय ड्राइवर आयोग के गठन और राज्य स्तर पर वेलफेयर बोर्ड बनाने के मुद्दे पर ठोस कदम उठाए जाएं।
देशव्यापी हड़ताल के ऐलान के बीच परिवहन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने ट्रक मालिकों, ट्रांसपोर्टरों और संबंधित संगठनों के साथ चर्चा कर सहमति बनाने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि परिवहन कारोबार पहले से ही आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में हड़ताल से कारोबार और ड्राइवरों की आजीविका पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है। परिवहन सेवाएं बाधित होने पर माल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसका असर बाजारों तक सामान पहुंचने और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है। हालांकि, यह असर कितना व्यापक होगा, यह हड़ताल में भागीदारी और परिवहन सेवाओं की स्थिति पर निर्भर करेगा।
12 नवंबर से प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए छत्तीसगढ़ में भी परिवहन सेवाओं की स्थिति पर नजर रहेगी। यदि राज्य में बड़ी संख्या में ट्रक और मालवाहक वाहन आंदोलन में शामिल होते हैं, तो माल परिवहन प्रभावित हो सकता है। फिलहाल ड्राइवर संगठन की प्रमुख मांगें राष्ट्रीय ड्राइवर आयोग का गठन और राज्यों में वेलफेयर बोर्ड बनाना हैं। अब देखना होगा कि हड़ताल से पहले सरकार और संगठन के बीच कोई बातचीत होती है या नहीं और लंबित मांगों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।
Updated on:
21 Oct 2026 06:23 pm
Published on:
21 Oct 2026 06:23 pm
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