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NEET PG Result: डॉक्टरों के परिवार से निकला डॉक्टर, NEET PG में हासिल की ऑल इंडिया 625वीं रैंक

NEET PG 2026: NEET PG में ऑल इंडिया 625वीं रैंक हासिल की। डॉक्टरों के परिवार से आने वाले करन ने इंटर्नशिप के साथ तैयारी की और अब कैंसर सर्जरी में विशेषज्ञता का लक्ष्य रखा है।
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NEET PG

डॉ. करन लेखवानी

NEET PG: @ ताबीर हुसैन। राजधानी के डॉ. करन लेखवानी ने नीट पीजी में शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया 625वीं रैंक प्राप्त की है। डॉक्टरों के परिवार से आने वाले करन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और बड़े भाई डॉ. शुभम लेखवानी को दिया है। उनके बड़े भाई वर्तमान में डीएम इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी कर रहे हैं। डॉ. करन के पिता डॉ. ओपी लेखवानी कान, नाक एवं गला रोग विशेषज्ञ और माता डॉ. संगीता लेखवानी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। डॉ. करन ने दिल्ली के यूसीएमएस एवं जीटीबी अस्पताल से एमबीबीएस की पढ़ाई की।

काम करने के साथ अपनी पढ़ाई

इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने अस्पताल में काम करने के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। वे बताते हैं कि नीट पीजी की तैयारी में उन्होंने थ्योरी के साथ एमसीक्यू पर विशेष ध्यान दिया। इससे विषयों की समझ के साथ परीक्षा के पैटर्न और सवालों को हल करने की गति पर भी काम किया। अब डॉ. करन का अगला लक्ष्य कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना है।

पारिवारिक माहौल ने किया प्रेरित

करन के लिए डॉक्टर बनना परिवार की परंपरा से आगे बढक़र एक तय लक्ष्य था। परिवार में सभी डॉक्टर होने के कारण उन्हें बचपन से ही चिकित्सा क्षेत्र की बारीकियों को करीब से देखने का अवसर मिला। बड़े भाई डॉ. शुभम ने भी नीट यूजी में ऑल इंडिया 27वीं रैंक हासिल की थी। इस पारिवारिक माहौल ने करन को लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। अपनी सफलता में वे माता-पिता और बड़े भाई के सहयोग को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि परिवार से मिले मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने में मदद की।

सफलता का श्रेय माता-पिता और भाई को

डॉ. करन अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने माता-पिता और बड़े भाई को देते हैं। उनका कहना है कि परिवार से मिले सहयोग और मार्गदर्शन ने उन्हें लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। पढ़ाई के दौरान जब भी किसी तरह की चुनौती सामने आई, परिवार ने उन्हें प्रोत्साहित किया। यही वजह है कि वे अपनी उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं मानते, बल्कि इसे पूरे परिवार के सहयोग का परिणाम बताते हैं।

डॉक्टर बनना सिर्फ पारिवारिक परंपरा नहीं लक्ष्य भी था

डॉक्टरों के परिवार में जन्म लेने के बावजूद करन के लिए डॉक्टर बनना केवल पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाना नहीं था। उन्होंने इसे अपने करियर के लक्ष्य के रूप में अपनाया और मेडिकल शिक्षा के दौरान लगातार आगे बढ़ने की कोशिश की। एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान अस्पताल में मरीजों के इलाज की प्रक्रिया को करीब से देखने और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने का अनुभव उन्हें मिला। इसी दौरान चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों को समझने का अवसर भी मिला।

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